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होली विशेष: कबीरा सरररर, मोदी जी सरररर
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सार
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सांकेतिक तस्वीर (फाइल फोटो)
- फोटो :
नरेश
विस्तार
कबीरा सरररर, जोगी जी सरररर, मोदी जी सरररर, सोरोस जी सरररर, अदाणी सरररर, हिंडनबर्ग जी सरररर, बीबीसी जी सरररर, राहुल भैया सरररर, केजरीवाल सरररर, कि ममता दीदी सरररर, कि स्टालिन भैया सरररर, कि बुलडोजर जी सरररर, बुलडोजर बाबा सरररर, माफिया सरररर, कि पूर्वोत्तर सरररर...। हेट की होली जारी है। नेट की होली जारी है। पेट की होली जारी है। फेट की होली जारी है और सेठ की होली जारी है।
होली का सीजन है, होली का रीजन है। दिल्ली से लंदन तक होली ही होली है। कोई रंग खेल रहा है, कोई लठामार खेल रहा है और सब कुछ झेल रहा है...।
कबीरा सरररर, कबीरा सरररर।
बड़े खिलैया अपने भैया कि जैसे ही महायात्रा में मोहब्बत की दुकान खोलकर दिल्ली आए कि चेलों ने खोल डाली नफरत की दुकान, कि एक ने मारी नफरत की पिचकारी और हो गए केस पर केस, कि करने लगे गुहार कि जमानत दे दो भैया कि आगे से नहीं करेंगे ऐसी ता ता थैया...।
कबीरा सरररर, कबीरा सरररर, कबीरा सरररर...पूर्वोत्तर ने खेली ऐसी होली कि होने लगा मोदी मोदी मोदी और बाकी सब खोजने लगे जिस-तिस की गोदी गोदी गोदी...।
बोल कबीरा सरररर, बोल मेरे बीरा सरररर कि त्रिपुरा ने की ऐसी होली कि वोटों से भर दी भाजपा की झोली...नगालैंड और मेघालय वाले भी गाते दिखे कि मोदी, मोदी, मोदी, मोदी जी हमें भी ले लो गोदी जी! कबीरा सरररर, कबीरा सरररर कि बाबा जी सरररर, बाबा जी सरररर, बाबा जी सरररर कि बाबाजी गाएं कि
भंग भवानी भय हरै भाग जांय भय भूत!/ललित लेखनी से लिखें लेख ललित अवधूत !!’/कि अवधू सरररर, अवधू सरररर कि /‘अवधू जी सिलबट्ट पर पीसन लागे भंग!/अंटा डाले पेट में खेलन लागे रंग!!
कि अवधू सरररर, अवधू सरररर कि खेलें ब्रज की लठामार होली कि दुनिया खेले लठामार होली! एक साल से पुतिन जेलेंस्की और यूक्रेन से खेल रहे हैं होली, होली होली...गोला गोली, मार होली...टैंक मार होली...मिसाइल मार होली...धांय धांय होली। यूक्रेन के कंधे पर बंदूक चढ़ाकर बाइडन खेलें रूस से होली...
और इधर ‘जी-20’ कहे कि मोदी जी आओ और विश्वगुरु बनके दिखाओ और दुनिया को शांति का पाठ सिखाओ कि ओम् शांतिः ओम् शांतिः ओम् शातिः ओम् शांति: शाति: शांतिः भ्रांतिः भ्रांतिः भ्रांतिः क्रांतिः क्रांति: क्रांतिः...
ओम् सरररर, कि भैया जी सरररर, अघ्यक्ष जी सरररर, कि चौबीस में हमीं आएंगे...कि अब हमारे हवाले वतन साथियो... कि कबीरा बोले सरररर, मोदी जी बोले सरररर, कि एक मोदी सब पर भारी और गाओ होली किः
आज बिरज में होरी रे रसिया होरी रे रसिया बरजोरी रे रसिया
उड़त अबीर लाल भए बादर कहूं ज्यादा कहूं थोरी रे रसिया
आज बिरज में होरी रे रसिया... ढोलक चंग मजीरे बज रहे हैं, रंग हवा में तैर रहे हैं और अखिल ब्रज के हुरिहारे गाए जा रहे हैं कि होली आई रे कन्हाई रंग छलके सुना दे जरा बांसुरी...
रंग बरस रहा है, जनतंत्र भीग रहा है, बड़े लड़ैया अपने भैया कैंब्रिज जाके बोल रहे हैं कि सब खतरे में, सब खतरे में, लोकतंत्र खतरे में है, देशवा खतरे में और अब तो खतरा भी खतरे में है...इतने में एक एंकर ने दे मारी जवाबी पिचकारी कि यहां जनतंत्र खतरे में होता, तो इतना न बोल पाते भैया जी...और फिर लंदन में जाके क्या मारते हो पिचकारी? अरे मारनी हो तो यहीं से मारो पिचकारी सर जी...
कि कबीरा सरररर कबीरा सरररर, मोदी जी सरररर, मोदी जी सरररर
कि कुछ हुरिहारे खेलने लगते हैं ‘हेटीली’ होली कि ‘मर जा मोदी, मर जा मोदी’ तो जवाब में मोदी भी खेलने लगते हैं शब्दों की होली कि वो कहते हैं ‘मर जा मोदी’ देश कहता है कि ‘मत जा मोदी, मत जा मोदी’
मोदी जी वाह! मोदी जी वाह! मोदी जी वाह! मोदी जी सरररर, मोदी जी सरररर...कबीरा सरररर...कबीरा सरररर...इटली की पीएम बोली, मोदी जी सबसे अच्छे हुरिहारे...
कबीरा सरररर, कबीरा सरररर..
सबसे रंग-रंगीली होली बाबा जी वाली होली...एकदम ब्रज की नंदगांव-बरसाने वाली लठामार होली कि माफिया पर सरेआम लठ बज रहे हैं...एक से एक माफिया हुरहारा भाग रहा है...एक बड़ी-बड़ी मूंछों वाला तो कह रहा है, भैया सब रंग डालना, लेकिन बाबा वाला बुलडोजरी रंग न डालना...यूपी वाला रंग न डालना, नहीं तो कहीं के न रहेंगे...
और लीजिए, इस बरस हुई ग्लोबल होली। पहले खेली हिंडनबर्ग ने अदाणी से होली, फिर बानवे साला सटोरिए सोरोस बाबा ने खेली अदाणी से सट्टाबाजारी होली और गाने लगे कि अदाणी गए, तो मोदी भी गए, मोदी गए तो अपन आए, अपन आए तो इंडिया को फिर से कब्जाए...फिर बीबीसी ने भर मारी मोदी पर पिचकारी, लेकिन कबीरा सरररर कि मोदी सरररर... कि मोदी जी सरररर, मोदीजी सरररर कि लंदन में भारत मूल के शुनक जी भी खेलते होली कि पहले करते ‘गउपूजा’, फिर लगाते माथे पर तिलक, फिर खेलते इंग्लैंड की महारानी संग होली... कि फिर होने लगी विश्वगुरु वाली होली कि सब गाने लगे सरररर, विश्वगुरु सरररर...कि अपना विश्वगुरु खेले बरतानिया से होली, कि विश्वगुरु बनकर ‘जी-20’ खेले होली, कि विश्वगुरु गूगल से खेलें होली, कि फेसबुक से खेलें होली, कि ट्विटर ऑनलाइन खेलें होली, होली, होली...
अपनी इस लठामार होली में कौन तो बचे और कौन बचाए! लठामार को देख एक फेमिनिस्टा बोलिन कि होली मिसोजिनिस्टक है कॉमरेड। लेकिन जवाब में बोली बिरज की लठमार होली वाली एक नार कि मैडम जी, जरा आ जाओ एक लठ किसी हुरिहारे पर चलाओ, तब बताना कैसी रही होली? अंग्रेजी वाले क्या जानें होली? कबीरा सरररर, कबीरा सरररर।
एक और होली बागेश्वर धाम वाले बाबा की होली, कि बाबा का जादू, कि बाबा कहे भक्त से कि तुम्हें जो बीमारी है हुर्र-हुर्र, फुर्र-फुर्र, चटक-फटक, फटाक, ओम फुर्र फटाक, कि मारो दस दंड-बैठक, कि सब बालाजी की कृपा हमारे ऊपर...हम कहां, बालाजी जी ही खेलत हैं भक्तन संग होली...कि बाबा जी खेलत 'हिंदू राष्ट्र’ की होली कि हिंदू राष्ट्र सरररर, सरररर...
कबीरा सरररर, कबीरा सरररर कि तेईस से चौबीस तक पूरे बरस भर खेली जानी है ऐसी ही लठामार होली...।