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हीरोइन, देखन चली सिनेमा
प्रकाश पुरोहित
Updated Thu, 15 Jan 2015 07:24 PM IST
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हीरोइन का मन है कि सिनेमाघर में अपनी फिल्म देखे। पक्की सहेली ने सुझाया, तू बुर्का पहन ले। कोई नहीं पहचानेगा। इस पर हीरोइन का कहना था कि यह पुराना पड़ गया है। बुर्का देखते ही लोग समझ जाते हैं कि इसमें हीरोइन होगी।
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ऐसा करते हैं, तेरे बाल ही तेरी पहचान हैं। इसलिए तू कैप लगा ले। फिर गॉगल लगा लेना, तो कोई भांप भी नहीं पाएगा। तू चूड़ियां तो कभी पहनती नहीं है, इसलिए दस-बीस रंग-बिरंगी चूड़ियां दोनों हाथों में पहन ले। सोच भी नहीं पाएगा कोई कि तू फिल्म देखने आई है। पक्की सहेली उत्साह में थी, तो कच्ची सहेली कैसे पीछे रह जाती।
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तूने ज्यादातर फिल्में घर-परिवार की ही तो की हैं, इसलिए साड़ी मत पहनना, वरना नाभि-दर्शन से ही लोग पहचान लेंगे। बढ़िया जींस-पैंट और टॉप का टॉप पहन ले। गले में मोतियों की माला डाल ले और चाहे, तो स्टोल भी लपेट सकती है। वैसे गरमी है, लेकिन टॉकीज में तो ठंडक रहती ही है।
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हाई हिल पहनना, क्योंकि तू तो हर फिल्म में अपनी हाइट छिपाने के लिए सपाट चप्पल ही पहनती है। ऊंची एड़ी की चप्पल पहन लेगी, तो ठिगने हीरो भी तुझे नहीं पहचान पाएंगे। पक्की सहेली ने पक्का इंतजाम कर दिया।
टॉप पर जैकेट भी डाल सकती है। आजकल लड़कियां यही फैशन कर रही हैं। बाइक के पीछे बैठने वाली तो पहनती ही हैं। जैकेट पहन लेगी, तो लोग यही समझेंगे कि बाइक से आई है और हीरोइन कभी बाइक से नहीं आती।
अगर मैं सचमुच बाइक से ही चली जाऊं, तो? हीरोइन का उत्साह फर्राटा भरने लगा।
तब तो लोग तुझे टॉकीज में भी नहीं घुसने देंगे, कच्ची बोली। उसका यह डर था कि उसका क्या होगा।
मैं तो कहती हूं, सड़क पर ही रोक लेंगे तुझे तो। पक्की का डर भी कच्ची जैसा ही पक्का था।
एक बात कहूं। तू जैसी है, वैसी ही चल, कोई नहीं पहचानेगा। पक्की ने पका-पकाया आइडिया परोस दिया।
फिर अगले दिन अखबारों में फोटो कैसे छपेगी? हीरोइन ने यह कहा, तो सहेलियों ने मान लिया कि वह सही कह रही है।