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पड़ताल : इधर मोदी और उधर ट्रंप.... बीच में पाकिस्तान, और वह यात्रा जिसने सबको कर दिया था हैरान
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पीएम मोदी।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
आह! वे भी क्या दिन थे! लगता है, एक जमाना गुजर गया है! वह 25 दिसंबर, 2015 का दिन था, जब प्रधानमंत्री मोदी काबुल से सीधे लाहौर आए थे, जिसने पाकिस्तानी अवाम को ही नहीं, बल्कि हुकूमत को भी हैरान कर दिया था। यही नहीं, पाकिस्तान में भारत के बेहद लोकप्रिय उच्चायुक्त टीसीए राघवन को भी प्रधानमंत्री मोदी के ट्वीट से ही पता चला, क्योंकि दिल्ली से विदेश मंत्रालय ने उन्हें सूचित नहीं किया था।
यह दस वर्षों के बाद भारतीय प्रधानमंत्री की पहली विदेश यात्रा थी। वास्तव में उन्होंने आश्चर्यजनक कूटनीति से सबको हैरान कर दिया! उस दिन पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का जन्मदिन था और उनकी नातिन का निकाह भी। उस दिन रविवार था और केवल एक ट्वीट के कारण ऐसा हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा था, ‘आज दोपहर लाहौर में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मिलने के लिए उत्सुक हूं, जहां मैं दिल्ली लौटते समय रुकूंगा।’ मोदी ने यह ट्वीट करके दुनिया को हैरान कर दिया। इस पर दिल्ली से बहुत तेजी से प्रतिक्रिया हुई। भारत की बेहतरीन राजनीतिज्ञ और राजनयिकों में से एक दिवंगत सुषमा स्वराज ने तुरंत ट्वीट का जवाब दिया-‘यह राजनेता (स्टेट्समैन) के व्यवहार की तरह है। पड़ोसी से ऐसे ही रिश्ते होने चाहिए।’
मैं आज भी हैरान हूं कि एक ऐसे देश के प्रधानमंत्री, जो सख्त नौकरशाही प्रोटोकॉल रखने के लिए जाने जाते हैं, ने अचानक सभी प्रोटोकॉल तोड़कर एक पड़ोसी देश की यात्रा करने का निर्णय क्यों लिया। मैं प्रधानमंत्री मोदी की लगभग एक दशक पुरानी यात्रा को इसलिए याद कर रही हूं, क्योंकि इस हफ्ते प्रधानमंत्री मोदी ने पेरिस जाते हुए लगभग 41 मिनट पाकिस्तान के ऊपर से उड़ान भरी है, जबकि भारतीय और पाकिस्तानी विमानों को एक-दूसरे देश के ऊपर के आसमान में उड़ान भरने की अनुमति नहीं है। हालांकि, भारतीय प्रधानमंत्रियों के पाकिस्तान के आसमान पर उड़ान भरने के दूसरे मौकों की तरह, उन्होंने भी पाकिस्तान हुकूमत या वहां के लोगों के लिए कोई सद्भावना संदेश नहीं भेजा। यह सामान्य शिष्टाचार है, जिसका पालन न करना ठंडे द्विपक्षीय रिश्तों को भी दर्शाता है, जो अपने सबसे निचले स्तर पर हैं। हालांकि हमारी एशियाई परंपराएं और संस्कृतियां यह तय करती हैं कि इस तरह के बुनियादी शिष्टाचार की अपेक्षा की जाती है। क्या मोदी अपने घरेलू समर्थकों को नाराज न करना चाहते थे, जो ‘दुश्मन’ को ‘नमस्ते’ कहने के कारण उनकी आलोचना कर सकते थे? हम कभी नहीं जान पाएंगे।
मैं सोचती हूं कि जब मोदी और उनके साथ विमान में बैठे अन्य अधिकारी विमान की खिड़की से बाहर देख रहे थे, तो पाकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों को देखकर उनके मन में क्या चल रहा था? वे अपने निकटतम पड़ोसी और वहां के लोगों के बारे में क्या सोच रहे थे? शायद वे ‘छूटे हुए अवसरों’ के बारे में सोच सकते थे, या फिर इस बारे में कि यदि परिस्थितियां अलग होतीं, तो संबंध अधिक सामान्य होते।
लेकिन भारत पर ज्यादा ध्यान देने के बजाय इन दिनों पाकिस्तान के नीति निर्माता वाशिंगटन पर ध्यान दे रहे हैं कि कैसे ट्रंप की अप्रत्याशित नीतियां दुनिया भर की राजधानियों को प्रभावित कर रही हैं। पाकिस्तान के नीति निर्माताओं ने कहा है कि उनका देश विभिन्न स्तरों पर अमेरिका के साथ जुड़ा हुआ है और यह मानता है कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण संबंध है। साथ ही, वह पाकिस्तान-अमेरिका संबंधों को और अधिक मजबूत और सुदृढ़ बनाने के लिए तत्पर है, जो पाकिस्तान, अमेरिका और क्षेत्रीय स्थिरता के दृष्टिकोण से भी अहम है। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘अमेरिका वास्तव में दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था है।’ दोनों राजधानियां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सभी विदेशी विकास सहायता कार्यक्रमों को 90 दिनों के लिए रोकने के हालिया निर्णय के कारण संपर्क में हैं, जिससे पाकिस्तान में चल रहे कार्यक्रम प्रभावित होंगे। इससे यह पता चलता है कि भले ही आप परमाणु शक्ति संपन्न हों, लेकिन आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हैं, तो विदेशी सहायता पर निर्भर रहना गंभीर परिणाम दे सकता है।
यही स्थिति अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ भी है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी सहायता कार्यक्रमों (यूएसएआईडी) ने पाकिस्तान में ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य और मादक पदार्थ नियंत्रण के क्षेत्रों में काफी लाभ पहुंचाया है। अमेरिकी सहायता पर इस रोक से पाकिस्तान को वार्षिक अनुदान आधारित परियोजनाओं में मिलने वाले लाखों डॉलर का नुकसान होगा। हालांकि, हाल के वर्षों में यूएसएआईडी सहायता में काफी गिरावट आई है, जो वित्त वर्ष 2022-23 में 3.1 करोड़ डॉलर और 2023-24 में 4.1 करोड़ डॉलर रह गई है। वाशिंगटन में नए सत्तारूढ़ अभिजात वर्ग द्वारा यूएसएआईडी के खिलाफ जारी राजनीतिक प्रतिक्रिया से विकासशील देशों, विशेषकर पाकिस्तान में नीति निर्माण पर अमेरिकी प्रभाव और कमजोर होने की आशंका है, जहां यूएसएआईडी एक प्रमुख विकास साझेदार रहा है। लेकिन ज्यादा चिंताजनक तथ्य यह है कि इससे हजारों नौकरियां खत्म हो जाएंगी, वह भी ऐसे समय में, जब बेरोजगारी के आंकड़े पहले से ही बहुत ऊंचे हैं। पाकिस्तान को इन कार्यक्रमों पर लगी रोक हटाने के लिए वाशिंगटन को मनाने के व्यापक कूटनीतिक प्रयास करने होंगे। लेकिन पाकिस्तान अकेला नहीं है, दुनिया की सैकड़ों अन्य राजधानियां भी इससे प्रभावित हुई हैं। इनमें से कई की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान से भी बदतर है।
ट्रंप अब धीरे-धीरे अफगानिस्तान पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और नीति निर्माता यह सवाल उठा रहे हैं कि इसका पाकिस्तान पर क्या असर होगा। अब तक पाकिस्तान और ट्रंप प्रशासन के बीच नेतृत्व स्तर पर कोई बातचीत नहीं हुई है, और डोनाल्ड ट्रंप के स्वभाव को देखते हुए कौन जानता है कि क्या वह अपना ध्यान पाकिस्तान की जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की ओर लगाएंगे? वाशिंगटन में कई लोग मांग कर रहे हैं कि उन्हें रिहा किया जाना चाहिए। अगर ट्रंप इमरान खान को जेल से रिहा करने का संकेत भी देते हैं, तो यह पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी कूटनीतिक चुनौती होगी। इसलिए आगे क्या होता है, यह देखने वाली बात होगी।