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श्रमदान से आई खुशहाली

Fri, 09 Aug 2013 08:18 PM IST
शिवकुमार गोयल
शिवकुमार गोयल Updated Fri, 09 Aug 2013 08:18 PM IST
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Happiness from labour donation

मगध राज्य में लगातार कई वर्षों तक वर्षा न होने के कारण अकाल पड़ा। फसलें नष्ट हो गईं। खाद्यान्न के अभाव में असंख्य लोगों को काल का ग्रास बनना पड़ा।

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सम्राट चंद्रगुप्त ने परिषद की बैठक बुलाई। महामंत्री कौटिल्य ने सुझाव दिया कि बाहर से खाद्यान्न मंगाकर लोगों के प्राणों की रक्षा की जाए। इसके अलावा जगह-जगह यज्ञ भी कराए जाएं। वरुण देव एवं मां अन्नपूर्णा को प्रसन्न करके ही इस भीषण आपदा से छुटकारा पाया जा सकता है। पाटलिपुत्र में विशाल यज्ञ की तैयारी शुरू की गई। अनेक यज्ञाचार्यों की उपस्थिति में यज्ञ प्रारंभ हुआ। सम्राट चंद्रगुप्त ने पूर्ण विधि-विधान से प्रमुख यजमान की भूमिका निभाई। यज्ञ के बाद राजा और रानी ने बंजर धरती पर हल चलाया। लोगों ने देवी-देवताओं का जयघोष किया। आचार्य कौटिल्य ने कहा, राजन, यज्ञ से हमने भगवान को संतुष्ट कर लिया है। किंतु स्थायी समाधान के लिए हमें नदी से खेतों में पानी पहुंचाने के लिए नहर का निर्माण करना चाहिए।
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सम्राट ने कुदाल उठाई और नहर खोदने लगे। देखते-ही देखते अनेक लोगों ने श्रमदान करना शुरू कर दिया। कुछ दिनों में नहर का विस्तार होने लगा और खेतों तक पानी पहुंचने लगा। पूरा राज्य तरह-तरह के खाद्यान्न उत्पन्न होने के कारण खुशहाल हो गया और अकाल से स्थायी मुक्ति मिल गई।
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