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जीएसटी सुधार की ओर: टैक्स दरों में बदलाव के बजाय व्यापार आसान बनाने की दिशा में पहल, 57वीं बैठक कई अहम फैसले

Fri, 09 Oct 2026 04:33 AM IST
न्यूज डेस्क अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: न्यूज डेस्क Updated Fri, 09 Oct 2026 04:33 AM IST
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GST Reform Initiatives focus on ease of doing business rather than tax rates change GST council key decisions
जीएसटी काउंसिल की बैठक - फोटो : amarujala.com

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में नई दिल्ली में जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में लिए गए फैसले टैक्स दरों में बदलाव के बजाय मुख्य तौर पर व्यापार को आसान बनाने और अनुपालन के बोझ को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। दरअसल, सरकार लगातार स्थिर और मजबूत राजस्व संग्रहण के कारण अब नियमों को अधिक तर्कसंगत व कारोबारी-अनुकूल बनाने पर ध्यान दे रही है।

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बैठक में लिया गया सबसे महत्वपूर्ण फैसला जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियों को वापस लेने और अभियोजन की सीमा को एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का है। साथ ही, न्यूनतम सजा का प्रावधान हटाने और सामान्य जुर्माना 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने से भी कारोबारियों को काफी राहत मिलेगी। क्लेम स्वीकार करने की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करना बेशक मामूली बदलाव लग सकता है, लेकिन कारोबार में नकदी का प्रवाह बेहद महत्वपूर्ण होता है।
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सरकार जिस तत्परता से कर वसूलती है, उसी तत्परता से वैध रिफंड भी लौटाए जाने चाहिए। 10,000 रुपये से कम की राशि के लिए जीएसटी डिमांड नोटिस नहीं जारी करने और नोटिस तथा कानूनी कार्यवाही के लिए साझा मानक तय करने का फैसला भी छोटे विवादों को अनावश्यक मुकदमेबाजी में बदलने से रोक सकता है।
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इसके अलावा, छोटे व्यापारियों और ई-कॉमर्स विक्रेताओं को अब हर उस राज्य में रजिस्ट्रेशन कराने से छूट दी गई है, जहां वे सामान बेचते हैं। इससे लगभग 9.5 लाख छोटे विक्रेताओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ने और देशभर में व्यापार करने में सहूलियत होगी। पांच करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले करदाताओं के लिए एक वैकल्पिक स्कीम के तहत साल में एक बार रिटर्न और तिमाही कर भुगतान की प्रस्तावित व्यवस्था भी अनुपालन का बोझ घटा सकती है।


इससे उद्योग जगत को बार-बार होने वाले नीतिगत बदलावों से मुक्ति मिलेगी और वे अपने बजट, निवेश व दीर्घकालिक व्यावसायिक योजनाएं अधिक स्थिरता व स्पष्टता के साथ बना सकेंगे। सुधारों का संदेश स्पष्ट है कि सरकार अब करदाताओं को डराने के बजाय वित्तीय तकनीकों से धोखाधड़ी पकड़ने और आपसी भरोसे पर आधारित टैक्स प्रशासन को बढ़ावा देने के साथ कारोबारी अनुकूल व तर्कसंगत व्यवस्था बनाने पर जोर दे रही है।

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