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संघवाद की मिसाल है जीएसटी

rajeev chandrashekharराजीव चंद्रशेखर Updated Fri, 10 Aug 2018 07:01 PM IST
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जीएसटी
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आजादी के बाद सबसे बड़ा कर सुधार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू हुए एक साल पूरा हो गया है। मैं हमेशा से इस सुधार का उत्साही समर्थक रहा हूं और वर्ष 2015 में जीएसटी पर बनी प्रवर समिति का भी सदस्य रहा हूं, जिसने जीएसटी के सांविधानिक संशोधन विधेयक पर काम किया और उसे अंतिम रूप दिया। हालांकि जीएसटी के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए एक वर्ष की अवधि संभवतः बहुत छोटी है, फिर भी यह मूल्यांकन के लायक है। मैंने लगभग एक साल पहले भविष्यवाणी की थी कि जीएसटी लागू करने से बेहतर कर का अनुपालन होगा, आगे कर राजस्व में वृद्धि  होगी और व्यापार सुगमता में बढ़ोतरी होगी।
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जीएसटी लागू होने के एक साल के भीतर इसमें 48 लाख उद्यम जोड़े गए, जबकि आजादी के बाद से लेकर इन वर्षों में मात्र 66 लाख उद्यम पंजीकृत हुए थे! यह जीएसटी के तहत अपनाई गई सरल प्रक्रियाओं के कारण हुआ है। जिन निर्माताओं, व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं की आय बीस लाख रुपये से कम है, उन्हें जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है, इस प्रकार यह उन छोटे व्यापारियों के लिए अनुकूल व्यवस्था बनाता है। जिनका वार्षिक टर्न ओवर एक करोड़ रुपये तक है, उनके लिए इसमें रियायती दर के साथ सरलीकृत संरचना की योजना है।
आर्थिक सर्वेक्षण का एक विश्लेषण अप्रत्यक्ष करदाताओं में इस अप्रत्याशित वृद्धि का कारण बताता है। नए पंजीकृत उद्यमों में से अधिकांश बिजनेस-टू-बिजनेस सेगमेंट और छोटे उद्यमों से आते हैं, जिन्होंने स्वेच्छा से पंजीकरण कराया है, ताकि वे इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ ले सकें, हालांकि वे अपने कारोबार के आधार पर पंजीकरण नहीं भी करा सकते थे। यह इसलिए संभव हुआ, क्योंकि जीएसटी ने कच्चा माल से लेकर खुदरा बिक्रय तक पूरी मूल्य शृंखला को एकीकृत कर दिया।
आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, जीएसटी से पूर्व की प्रणाली की तुलना में जीएसटी के तहत अप्रत्यक्ष कर दाताओं में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह नोटबंदी और जीएसटी के कारण नवंबर, 2016 से व्यक्तिगत कर दाताओं में लगभग 18 लाख लोगों को जोड़ा गया है। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है और इस बात का सबूत है कि भारत तेजी से गैर-कर अनुपालन से कर अनुपालन देश में बदल रहा है।

पहले नौ महीनों में 8.2 लाख करोड़ रुपये (वार्षिक 11 लाख करोड़ रुपये) का राजस्व इकट्ठा हुआ है, यानी जीएसटी पूर्व आंकड़ों की तुलना में 11.9 फीसदी की दर से राजस्व वृद्धि हुई है। अंतर्निहित कर उछाल (मामूली जीडीपी वृद्धि के बरक्स कर वृद्धि प्रतिक्रिया) 1.2 है, जो अप्रत्यक्ष करों के ऐतिहासिक मानक से ज्यादा है। एकीकृत जीएसटी राजस्व आवंटन और केंद्रीय जीएसटी में अवरुद्ध माध्यमिक क्रेडिट तथा आईजीएसटी राजस्व में बकाया निर्यात रिफंड समायोजन, दोनों के बाद वास्तविक वृद्धि 14 फीसदी होगी।

जीएसटी संग्रह की उतार-चढ़ाव भरी प्रवृत्ति के कारण शुरू में निश्चित रूप से कुछ चिंताएं पैदा हुई थीं। पर अप्रैल, 2018 में एक लाख करोड़ रुपये के साथ यह चिंता खत्म हो गई। अधिकांश राज्यों ने इस राजस्व लाभ में हिस्सा लिया है और कुल कर राजस्व में अपने जीएसटी पूर्व राजस्व को कायम रखा है। यदि राज्य रिसाव की पहचान के लिए उन्नत डाटा एनालिटिक्स का उपयोग करते हुए अपने व्यावसायिक कर विभाग की क्षमता का निर्माण करें, तो वे अपने राजस्व संग्रह में सुधार कर सकते हैं।
 
जीएसटी एक उपभोक्ता और व्यवसाय अनुकूल कर व्यवस्था है, क्योंकि इसमें टेक्नोलॉजी में भारी निवेश किया जाता है, जो एक अन्य महत्वपूर्ण सुधार का कदम है। जीएसटी नेटवर्क कर अनुपालन और फाइलिंग का मंच है। यानी यह इंस्पेक्टर राज के बिना कर प्रशासन के लिए एक नया दृष्टिकोण है, जिसके प्रति उपभोक्ताओं और व्यवसायियों में घृणा पैदा हुई। पहले 17 अलग-अलग करों का अनुपालन एवं भुगतान करना पड़ता था, पर जीएसटी में मात्र राज्य जीएसटी और केंद्रीय जीएसटी का ही भुगतान करना होता है। जीएसटी सुधार का यह प्रभाव सभी उपभोक्ताओं और व्यवसायियों के लिए एक बड़ा सौदा है, खासकर छोटे व्यवसायियों के लिए, जिनके लिए लागत और जटिल कर अनुपालन के साथ अक्सर भ्रष्टाचारग्रस्त अंतरराज्यीय व्यापार निराशाजनक था। कर अनुपालन की लागत में यह कमी मामूली नहीं है, इसने लागत घटा दी है और व्यापार सुगमता बढ़ा दी है, जिससे छोटे और बड़े व्यवसायियों को प्रत्यक्ष लाभ हुआ है।

एक भारतीय बाजार के निर्माण ने हमारी अर्थव्यवस्था में बेहतर प्रतिस्पर्धा और दक्षता पैदा की है और इससे देश भर के उपभोक्ताओं को लाभ हुआ है। व्यापार सुगमता के अलावा जीएसटीएन द्वारा उत्पन्न डाटा हमें यूपीए और एनडीए के दृष्टिकोण में जो अंतर है, वह है, राज्य सरकारों के साथ भागीदारी का दृष्टिकोण। प्रधानमंत्री मोदी ने सहकारी संघवाद के महान उदाहरण के रूप में जीएसटी की सराहना की है, जहां सभी राज्यों ने देशहित और जनहित में मिलकर सर्वसम्मति से फैसला लेने का निर्णय किया। राज्य सरकारों के सहयोग और केंद्र में निर्णायक नेतृत्व के बिना जीएसटी जैसा सुधार संभव नहीं होता।

जैसा कि मैक्स वेबर कहते हैं, 'सुधार सख्त बोर्ड में धीमे से छेद करना है।' अधिकांश सरकारें राजनीतिक लागत को वहन करते हुए सुधारों को आगे बढ़ाती हैं, जिसमें मध्यम अवधि में लाभ होता है। इसके लिए राजनीतिक नेतृत्व में दृढ़ संकल्प और विश्वास की आवश्यकता होती है। प्रधानमंत्री मोदी ने तमाम आलोचनाओं के बावजूद इसे सुनिश्चित किया है। वास्तविक संरचनात्मक सुधारों के साथ जीएसटी भी विकसित हो रहा है और अगर इसके दायरे में रियल एस्टेट तथा पेट्रोलियम पदार्थों को शामिल कर लिया जाए, तो इसका और विस्तार होगा। रियल एस्टेट को शामिल करने से भूमि बाजार स्वच्छ हो जाएगा, जो काले धन के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है। अर्थव्यवस्था और व्यवसाय पर जीएसटी के पूर्ण प्रभाव को जानने के लिहाज से अभी शुरुआती दिन हैं, लेकिन आने वाले वर्षों में यह अप्रत्यक्ष कर के नेटवर्क, राजस्व संग्रह और अर्थव्यवस्था के विकास की उम्मीदों पर खरा उतरेगा।
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