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बाजार: अनिश्चय के बीच चमकता सोना, अमेरिका में मंदी की आहट से बढ़ी चमक

Madhurendra Sinha मधुरेंद्र सिन्हा
Updated Tue, 28 Mar 2023 07:15 AM IST
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सार
अभी कोई महामारी तो नहीं है, पर रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन में लॉकडाउन, अमेरिका में मंदी की आहट और डॉलर की तेजी ने सोने की चमक बढ़ा दी है।
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Gold Shines Amid Market Uncertainty banking crisis fears of recession in US
Gold - फोटो : Istock

विस्तार

जब शेयर बाजार धराशायी है और म्यूचुअल फंडों की हवा निकली हुई है, तब सोना फिर अपनी चमक बिखेर रहा है। अमेरिका के दो बैंकों के चारों खाने चित्त हो जाने के बाद बाजारों में कंपकंपी है और सभी को अमेरिकी फेडरल बैंक के अगले कदम की प्रतीक्षा है। इस अनिश्चित माहौल में भी सोने की चमक बरकरार है। भारत ही नहीं, दुनिया भर में सोना सदियों से बुरे समय का सच्चा साथी माना जाता रहा है। जब भी दुनिया में संकट आता है, मसलन लड़ाइयां होती हैं, प्राकृतिक आपदाएं आती हैं या फिर महामारी फैलती है, तब सोना चमक उठता है और जिन्होंने सोने में निवेश किया, उनके सामने यह सुरक्षा दीवार की तरह खड़ा हो जाता है। महामारी के दौरान लाखों लोगों ने अपना सोना बेचकर घर चलाया।



अभी कोई महामारी तो नहीं है, पर रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन में लॉकडाउन, अमेरिका में मंदी की आहट और डॉलर की तेजी ने सोने की चमक बढ़ा दी है। यह 60,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर जा चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यह प्रति औंस 2,000 डॉलर को पार कर फिलहाल नीचे आ गया है, लेकिन इसकी उड़ान के बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है। दरअसल सारा खेल अमेरिका के फेडरल बैंक की ब्याज दरों पर निर्भर है। पिछले दिनों महंगाई रोकने के लिए अमेरिका के इस केंद्रीय बैंक ने कई बार ब्याज दरें बढ़ाईं। ब्याज दरें बढ़ाने के पीछे बैंकिंग सिस्टम से पैसे का उठाव कम होने और कीमतों के नियंत्रण में रहने का तर्क रहता है, पर इस बार ऐसा कुछ हुआ नहीं और अब इस बात के संकेत मिलने लगे हैं कि फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें बढ़ाने का विचार त्याग दिया है।


इससे सोने के दाम में तेजी आ सकती है, क्योंकि मुद्रास्फीति से लड़ने में मौद्रिक नीतियां विफल हो गई हैं, ऐसे में, निवेशक और सोना खरीद सकते हैं। गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, अगले एक साल में सोना 2,050 डॉलर प्रति औंस पर जा सकता है। डॉलर के अब उतना मजबूत न रहने से सोने में तेजी आई है। ध्यान देने वाली बात है कि डॉलर के साथ सोने का विपरीत संबंध है, जिसका मतलब हुआ कि जब डॉलर चढ़ेगा, तब सोना गिरेगा। अब विशेषज्ञ मान रहे हैं कि सोना फिर बढ़ेगा। कम ब्याज दरों की वजह से अमेरिका-यूरोप में लोग सोने में निवेश करते हैं, जिससे उसकी कीमत बढ़ती रहती है।

सोने ने निवेशकों को कभी निराश नहीं किया। उसकी कीमत धीरे-धीरे बढ़ती ही रही है। वर्ष 2010 में देश में सोने की कीमत 18,500 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो 2020 में बढ़कर 52,000 रुपये तक जा पहुंची। इसके लगातार महंगे होते जाने के पीछे आर्थिक कारणों के अलावा प्राकृतिक आपदाएं तो हैं ही, एक बड़ा कारण यह भी है कि सोना एक दुर्लभ धातु है, जिसका उत्पादन सीमित है। इसके खनन में लगे कारोबारी उत्पादन को समय-समय पर नियंत्रित करते हैं, ताकि इसका उत्पादन ज्यादा न बढ़े और मांग बरकरार रहे।

हम भारतीय सदियों से सोने के दीवाने रहे हैं। मध्यकाल तक यहां सोने की कई बड़ी-बड़ी खदानें भी थीं। फिर हमारी परंपराएं ऐसी हैं कि सोना खरीदना मजबूरी भी है। अक्षय तृतीया, धनतेरस जैसे पर्वों पर हमारे यहां सोना खरीदने का चलन तो है ही, हम बेटियों के ब्याह में भी सोना खरीदते हैं। महिलाएं अपनी सुंदरता में चार चांद लगाने के लिए स्वर्णाभूषण खरीदती ही हैं। आने वाले बुरे वक्त के लिए भी सोना खरीदना अच्छा माना जाता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना आयातक देश है और कई वर्षों तक यह दुनिया का सबसे बड़ा आयातक देश रहा है। अब जब यहां सोने पर लगभग 15 प्रतिशत टैक्स है, तो इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजारों से कहीं ज्यादा हो गई है और तस्करी काफी बढ़ गई है।

बहरहाल सोने के दाम ज्यादा गिरते नहीं दिख रहे और जैसी परिस्थितियां हैं, उनमें सोने का दाम आज के स्तर से ज्यादा नीचे जाने वाला नहीं है। देश में आई समृद्धि का असर सोने की बिक्री पर भी पड़ा है और पड़ता रहेगा। सोने की खरीदारी इसके बढ़ते दामों के बावजूद घटी नहीं। सोना लोगों के लिए अपनी अमीरी दिखाने का खूबसूरत माध्यम भी है, इसलिए इसके चाहने वाले करोड़ों में हैं।

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