गिफ्ट को रिश्वत तो न कहें

अशोक बंसल Updated Mon, 19 Nov 2012 07:49 AM IST
gifts should not be said bribe
अगर कंस के युग में गिफ्ट का प्रचलन होता, तो वह एक बढ़िया-सा गिफ्ट और ब्रज की मिठाई अपने भांजे कृष्ण को भिजवा देते। ऐसा करके वह मरने से तो बचते ही, मामा-भांजे के बीच लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी की खाई भी क्षण भर में पट जाती।

गिफ्ट की ताकत की पहचान जितनी इस युग में हुई है, उतनी पहले कभी नहीं हुई। होली, दशहरा, ईद, क्रिसमस, न्यू ईयर आदि मौकों पर गिफ्ट का लेन-देन होता है, लेकिन दीपावली के त्योहार पर चमकीले आवरण में लिपटी गिफ्ट और उसमें छिपी मंशा का कोई जवाब नहीं। इसीलिए अफसर और नेता उतावलेवन के साथ इसी त्योहार का इंतजार करते हैं।

मेरे शहर के कलेक्टर को रिहाइश के लिए अंगरेज के जमाने की एक कोठी मिली थी, जिसमें सत्तरह कमरे थे। कलेक्टर साहब ने एक कमरे को 'गिफ्ट वाला कमरा' नाम दे रखा था। उनका दिल इलेक्ट्रॉनिक सामान में बसता था। उनके अर्दली ने शहर में कलेक्टर की पसंद का अच्छा-खासा प्रचार कर दिया था।

कलेक्टर साहब तीन दीपावली तक मेरे शहर में रहे। इस दौरान उनका गिफ्ट रूम पूरी तरह भर गया था। तबादले ने उनके सामने समस्या पैदा कर दी कि गिफ्ट रूम का सामान अन्य शहर में लेकर कैसे जाएं। तभी अर्दली शहर की एक इलेक्ट्रॉनिक दूकान के मालिक को ले आया। मालिक ने गिफ्ट रूम में रखे सामान की बोली एक साथ लगा दी। कलेक्टर साहब ने तत्काल हामी भरी और तीन साल के उपहारों की रकम क्षण भर में सीधी कर ली।  

गिफ्ट में मिली चीज को शिफ्ट करने का भी अलग आनंद है। मेरे एक मित्र दिवाली के दिन शाम तक घर पर रहते हैं। तब तक जितनी गिफ्ट आती है, उनमें से कुछ अपने घर छोड़ बाकी गाड़ी में रखकर अपने दोस्तों के घर दीपावली की शुभकामनाएं देने निकल पड़ते हैं। हालांकि गिफ्ट को शिफ्ट करने की उनकी यह कला धीरे-धीरे बेनकाब होती जा रही है।

मेरे एक अफसर मित्र को शिकायत है कि गिफ्ट जैसी पवित्र चीज को रिश्वत का नाम नहीं देना चाहिए। पिछले ही दिनों मेरे कुछ परिचित पूर्व अधिकारियों ने मिलकर सरकार के पास कुछ सुझाव भेजे हैं, जिनमें सरकारी मकान में एक गिफ्ट रूम होने और उसमें रखे सामान आयकर या अन्य किसी विभाग द्वारा की जाने वाली जांच से मुक्त करने जैसे सुझाव हैं। पता चला है कि सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है।

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