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सन्नाटे में हो रही शादियां

Thu, 24 Nov 2016 07:03 PM IST
सुभाषिनी सहगल अली
सुभाषिनी सहगल अली Updated Thu, 24 Nov 2016 07:03 PM IST
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Getting married in silence
सुभाषिनी सहगल अली

लोगों के जीवन में विभिन्न रीति-रिवाज होते हैं। इनमें लड़की की शादी को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके लिए बहुत कुछ करना पड़ता है : जैसे उधार लेना, जमीन बेचना आदि। बेटियों की शादी में वर ढूंढने का काम बहुत पेचीदा होता है। इसमें जाति, डिग्री, और वेतन का ख्याल तो रखना ही पड़ता है, लेन-देन का पेचीदा सवाल भी हल करना होता है। कदम-कदम पर पंडित जी की मदद लेनी पड़ती है। बात पक्की करने से पहले उन्हीं से कुंडलियां मिलवानी पड़ती हैं। तब जाकर तिथि और मुहूर्त तय हो पाता है।

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चाहे कोई कितना भी पढ़ा-लिखा हो, विज्ञान में पी. एचडी. ही क्यों न हो, कोई चाहे कितना भी तार्किक क्यों न हो, जब लड़की की शादी की बात होती है, तो सौ में निन्यानबे माता-पिता इन तमाम चरणों से गुजरने के बाद ही शादी का निमंत्रण कार्ड छपवाने की हिम्मत जुटाते हैं।
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हर साल शादी का मौसम अपने साथ कुछ खुशियां, बहुत सारे आंसू, थोड़ा या ज्यादा कर्ज और तमाम चीजें लेकर आता है। लेकिन इस बार तो यह मौसम अपने साथ मुसीबतों का पहाड़ और निराशा का अंधकार लेकर आई है।विगत आठ नवंबर की रात प्रधानमंत्री जी ने सहालग की परवाह किए बगैर पांच सौ और एक हजार के नोटों को बारह बजे रात के बाद से गैरकानूनी हो जाने की घोषणा कर डाली। फिर क्या था? कर्ज लेने की बात तो दूर, जो पैसे बड़ी मिन्नतों से जोड़े गए थे, वे रद्दी कागज के ढेर बन गए, जिन्हें लंबी कतारों में खड़े होने के बाद बैंको को चार तालों के अंदर बंद कर देने पड़े। नोट तो चले गए, लेकिन उनकी जरूरत बनी रही। यहीं से लाखों परिवारों की व्यथा की कहानी शुरू हो गई, जो अभी तक चल रही है।
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जालौन के एक सेवानिवृत्त शिक्षक अपनी बेटी के तिलक के लिए पैसा निकालने के लिए बैंक के बाहर आठ घंटे खड़े रहे।वह अधिकारियों से हाथ जोड़कर कहते रहे कि उन्हें दूसरे ही दिन तिलक लेकर जाना है, लेकिन सब ही मजबूर थे। आठ घंटे के इंतजार के बाद उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वह मर गए। राजस्थान के सीकर में एक चाय बेचने वाले की मौत तब हुई, जब वह अपनी दो बेटियों की शादी का पैसा बैंक से नहीं निकाल पाए। तेलंगाना के एक किसान ने तय कर लिया था कि वह अपनी एक एकड़ जमीन बेचकर अपना कर्ज अदा कर लेगा और अपनी बेटी की शादी भी कर डालेगा। सौदा तय हो गया, लेकिन तभी प्रधानमंत्री की घोषणा हो गई और ग्राहक पीछे हट गया। निराश किसान ने रात के भोजन में कीटनाशक मिला दिया। वह मर गए, उनके परिवार के लोग अस्पताल में हैं।

हर बैंक के सामने रोज तमाम लोग हाथ में शादी का निमंत्रण कार्ड हिलाते हुए दिन भर खड़े रहते हैं। उन्हें विश्वास है कि उनकी अपनी गाढ़ी कमाई के ढाई लाख रुपये बैंक से मिल जाएंगे। लेकिन जब उन्हें पता चलता है कि अपना ही पैसा निकलने के लिए उन्हें कई शर्तें पूरी करनी पड़ेंगी, तो वे अपना-सा मुंह लेकर, सिर झुकाए बैंक से बाहर निकल आते हैं।


प्रधानमंत्री की घोषणा ने लाखों परिवारों को तो मुसीबत में डाल ही दिया है, बाजार, बैंड वाले, टेंट हाउस वाले, हलवाई सब गर्दिश में हैं। सन्नाटे में ही शादियां हो रही हैं। बताया गया कि सरकार का यह कदम अमीरों की नींद हराम करने वाला है। लेकिन भाजपा के पूर्व मंत्री जनार्दन रेड्डी ने अपनी बेटी की शादी में पचास हजार लोगों को खाना खिलाया और पांच सौ करोड़ रुपये खर्च किए! काले धन के इस बेहूदे प्रदर्शन पर सवाल तो उठेंगे ही।

-माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य

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