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खंडहर, मलबे और अंधेरे में गाजा, पहचानना भी हुआ मुश्किल
Tue, 21 Nov 2023 06:14 AM IST
शिव शरण शुक्ला
पैट्रिक किंग्सले
पैट्रिक किंग्सले
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Tue, 21 Nov 2023 06:14 AM IST
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गाजा पट्टी पर शरणार्थी शिविर में धमाका, युद्धग्रस्त इलाके की तस्वीर (फाइल)
- फोटो :
ANI
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों के एक समूह में जब इस्राइली सेना की जीप पर हम बीते शुक्रवार की सुबह गाजा शहर के दक्षिणी किनारे पर पहुंचे, तो हमें खंडहरों, मलबों और अंधेरे के बीच रास्ता तलाशने के लिए संघर्ष करना पड़ा। इस्राइल से निकले हमें एक घंटे से भी कम समय हुआ था, जब हमारी जीप 42 दिनों के हवाई हमलों और करीब तीन हफ्ते की जमीनी लड़ाई से बर्बाद हो चुके इलाके से गुजर रही थी, और हमारे लिए यह पता करना मुश्किल था कि हम कहां हैं। घरों की दीवारें या छतें या दोनों गायब थीं। कई घर ताश के पत्तों की तरह एक-दूसरे पर पड़े थे।
पिछले तीन वर्षों में करीब एक दर्जन बार मैंने इस इलाके की यात्रा की है। पर अब इसे मुश्किल से ही पहचाना जा सकता है। मुझे एहसास हुआ कि अपार्टमेंटों के ब्लॉक गोलीबारी या हमलों से बर्बाद हो गए थे। पूरे इलाके में फैले इस्राइली टैंकों और बख्तरबंद वाहनों की आवाजाही के कारण सड़कें रेतीली और उबड़-खाबड़ हो गई हैं। यदि कुछ स्थिर है, तो वह है समुद्र। फलस्तीनियों और कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के अनुसार, आवासीय व वाणिज्यिक इलाकों में ऐसी व्यापक क्षति का कारण गाजा पर इस्राइल के अंधाधुंध हमले हैं, जिनमें गाजा के अधिकारियों के अनुसार, लगभग 12,000 लोग मारे गए और 40,000 से अधिक घरों को नुकसान पहुंचा है।
हमारे साथ चल रहे कमांडरों ने इसे सशस्त्र फलस्तीनी समूह हमास के खिलाफ, जो आम लोगों के घरों में छिप गए थे, शहरी लड़ाई लड़ने की अपरिहार्य लागत कहा। अब इस इलाके पर नियंत्रण करने वाले ब्रिगेड के डिप्टी कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल टॉम पेरेट्स ने कहा, 'हमारे ऊपर हर तरफ से गोलियां चलाई गईं। हमें उसका जवाब देना था।' वह कहते हैं कि विगत सात अक्तूबर को हमास द्वारा हमला किए जाने (जिसमें इस्राइली अधिकारियों के अनुसार, 1,200 लोग मारे गए और 240 लोगों को बंधक बना लिया गया) के बाद इस्राइल के पास इस इलाके पर फिर से हमला करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
हमारी यात्रा एक इस्राइली गांव बेरी से शुरू हुई थी, जिसे हमास के बर्बर हमले का सामना करना पड़ा था और जहां के लोग तब से पूरे देश में विस्थापित हो गए हैं। हमास के लड़ाकों द्वारा चलाई गई गोलियों के निशान अब भी घरों में देखे जा सकते हैं।
सेना की गाड़ी से यात्रा करने से पहले हमें गाड़ी की या किसी सैनिक की फोटो न लेने और गाजा पहुंचने पर अपना फोन बंद रखने की शर्तें माननी पड़ीं, ताकि हम युद्ध के समय गाजा के अंदर के जीवन की झलक पा सकें। अन्यथा इस क्षेत्र में रिपोर्टिंग करना बेहद मुश्किल है। हमारा काफिला उसी बाड़ के टूटे हिस्से से होकर गाजा में दाखिल हुआ, जिसे हमास के लड़ाकों ने इस्राइल में दाखिल होने के लिए तोड़ दिया था।
गाजा में प्रवेश करने का मतलब अंधेरे में प्रवेश करना था। इस क्षेत्र के ज्यादातर हिस्सों में ईंधन की कमी हो गई है। इस्राइल द्वारा बिजली बंद करने और ईंधन आयात को बाधित करने के बाद मजबूरन गाजा के बिजली संयंत्र को बंद करना पड़ा। सभी गांवों में जो घर सुरक्षित बचे थे, वे अंधेरे में डूबे हुए थे। ड्राइवरों ने इस्राइली सैनिकों पर ग्रेनेड एवं एंटी-टैंक मिसाइलों से हमला करने वाले लड़ाकों द्वारा देख लिए जाने के भय से अपनी गाड़ियों की हेडलाइट्स बंद कर दी। बस केवल आसमान में टिमटिमाते तारों की रोशनी बची थी। साथ ही, इस्राइली सैनिकों द्वारा युद्ध के मैदान को रोशन करने के लिए कभी-कभार फायरिंग भी की गई। सड़क के किनारे जीवन का एकमात्र संकेत देने वाले इस्राइली पैदल सैनिक थे, जो रणनीतिक फासले पर मार्ग की सुरक्षा कर रहे थे।
गाजा के उत्तरी इलाके से दस लाख से ज्यादा लोग अपना घर छोड़कर पलायन कर गए हैं और पूरा इलाका खाली कर दिया है। कुछ लोग जो पीछे छूट गए हैं, उन्हें किसी तरह की मदद न मिलने का जोखिम है। 39 वर्षीय अहमद खालिद ने, जो उत्तरी इलाके में रुके हुए हैं, हमारे सहयोगी को फोन पर बताया, 'हर कोई घर खाली नहीं कर सकता, मेरी मां बीमार है और चल नहीं सकती, इसलिए मैं उसे अकेले नहीं छोड़ सकता।' उन्होंने बताया कि एंबुलेंस को कभी-कभी यहां आने में दो दिन लग जाते हैं, तो कभी-कभी वह आता ही नहीं। यदि रात में हमें उसकी जरूरत पड़ जाए, तो उसके आने का कोई रास्ता नहीं है।
गाजा शहर में पहुंचने के बाद हमने खुली जीप छोड़ दी और एक बख्तरबंद वाहन में सवार हुए, जो इसका संकेत है कि वहां अब भी इस्राइल के विरोधी हैं। कुछ देर बाद हम गाजा के सबसे बड़े अस्पताल पहुंचे, जिसके विशाल परिसर के कुछ हिस्से पर इस्राइल ने कब्जा कर लिया है और अब वहां युद्ध में विस्थापित हुए लोगों के तंबू भरे पड़े हैं। अल-शिफा अस्पताल इस्राइली हमले का प्रमुख निशाना था, क्योंकि इस्राइलियों का कहना है कि यह हमास द्वारा उपयोग किए जाने वाले भूमिगत सैन्य परिसर के ऊपर स्थित है।
इस्राइल अपने हमले को अंतरराष्ट्रीय वैधता दिलाने के लिए पत्रकारों के सामने यह साबित करना चाहता है कि अस्पताल का वास्तव में सैन्य परिसर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन हमास एवं अस्पताल नेतृत्व ने इसे खारिज कर दिया है। हम इस्राइली विशेष बलों के साथ बमों से ध्वस्त इमारत और मलबों के बीच से रास्ता बनाते हुए परिसर में पहुंचे। अंदर हमें इस्राइली सैनिकों का एक दस्ता सोता हुआ मिला। कुछ दूरी पर अस्पताल की खिड़कियों से रोशनी चमक रही थी। इस्राइलियों ने हमसे कहा कि यह इस बात का सबूत है कि हमारी उपस्थिति में भी अस्पताल अपना काम कर रहा है। लेकिन हमें अस्पताल की स्थिति जानने के लिए अस्पताल प्रबंधन से फोन पर बात करने की इजाजत नहीं दी गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि इस हफ्ते अल-शिफा ने अस्पताल के रूप में काम करना बंद कर दिया है।
अस्पताल में अपनी मौजूदगी को उचित ठहराने की कोशिश करते हुए सैनिक हमें मैदान में पत्थर एवं कंकरीट से तैयार सुरंग दिखाने ले गए, जहां से एक सीढ़ी नीचे उतर रही थी। उन्होंने कहा कि यह सबूत है कि अस्पताल के नीचे हमास के सैन्य ठिकाने हैं। इस्राइली सेना विस्फोटकों के डर के कारण नीचे नहीं उतरी। अंधेरे में यह स्पष्ट नहीं था कि सुरंग कहां और कितनी गहराई तक थी। जब हम वहां से निकले, तब भी सुरंग की पहेली नहीं सुलझी। पास में लड़ाई भी चल रही थी और गोलियों की आवाजें आ रही थीं।
©The New York Times 2023