फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   fun of real game: Red ball, white clothes and five days, this format truly enhances the players technique

असली खेल का मजा : लाल गेंद, सफेद कपड़े और पांच दिन, खिलाड़ी की तकनीक को सही मायने में निखारता है यह प्रारूप

Sun, 28 Aug 2022 09:24 AM IST
Ramchandra Guha रामचंद्र गुहा
Updated Sun, 28 Aug 2022 09:24 AM IST
विज्ञापन
सार
असली क्रिकेट लाल गेंद से, सफेद कपड़ों में, पांच दिनों में खेला जाता है, और इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है कि कोई व्यक्ति कितने ओवर गेंदबाजी कर सकता है या एक टीम कब तक बल्लेबाजी कर सकती है।
loader
fun of real game: Red ball, white clothes and five days, this format truly enhances the players technique
क्रिकेट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के एक सदस्य के नाते चिन्नास्वामी स्टेडियम में होने वाले सारे मैचों के लिए मुझे मुफ्त प्रवेश की इजाजत है। हालांकि मैंने इंडियन प्रीमियर लीग के मामले में कभी भी इस विशेषाधिकार का उपयोग नहीं किया। कमोबेश आईपीएल से मेरी एकमात्र स्मृति टूर्नामेंट के पहले संस्करण से जुड़ी हुई है, जब 2008 में एक बार बंगलूरू के एक रेस्तरां में भोजन करते हुए टेलीविजन के स्क्रीन पर शेन वार्न नजर आए। 



सर्वकालिक महान स्पिन गेंदबाज ने हाल ही में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था और उसके बाद उन्हें तरोताजा देखने का यह एक मौका मिला था। मैंने उन्हें महेंद्र सिंह धोनी को तीन गेंद फेंकते हुए देखा, जिसमें से आखिरी गेंद में बल्लेबाज गेंद की लंबाई को ठीक से नहीं आंक सके और शॉर्ट मिड विकेट पर कैच थमा बैठे। गेंद ने अप्रत्याशित तरीके से उछाल ली थी।


मैंने इंडियन प्रीमियर लीग के 2022 सीजन की एक भी गेंद लाइव या टेलीविजन पर नहीं देखी। इसके बजाय जब भी क्रिकेट देखने का मन हुआ, तो मैंने यूट्यूब पर शेन वार्न की स्मृति में हुए कार्यक्रमों को देखना मंजूर किया, जिनका आईपीएल टूर्नामेंट शुरू होने से करीब तीन हफ्ते पहले निधन हो गया था। माइक अथर्टन, एलन बॉर्डर, मर्व ह्यूज और ब्रायन लारा से वार्न के बारे में बातें सुनना समृद्ध होने के साथ-साथ सांत्वना देने वाला भी था और यूट्यूब पर उनकी गेंदबाजी की पुरानी क्लिप को देखने का भी ऐसा ही अनुभव रहा। मार्च, अप्रैल और मई के महीनों में मेरे लिए क्रिकेट का मतलब सिर्फ वार्न रहे। इसके बाद आईपीएल खत्म हो गया और फिर असली क्रिकेट शुरू हुआ।   

जून में एक अकादमिक काम के सिलसिले में मुझे यूनाइटेड किंगडम जाना पड़ा और मेरे प्रवास के समय ही लॉर्ड्स में एक टेस्ट हो रहा था। उम्र बढ़ने के साथ-साथ खेलों के मामले में मैं कम राष्ट्रवादी होता जा रहा हूं और जब अपना देश नहीं खेल रहा हो, तब भी सौंदर्यपूर्ण आनंद के लिए टेस्ट मैच देखा जा सकता है।
मैं मई के आखिरी दिन लंदन पहुंचा था। 

लॉर्ड्स टेस्ट तीन जून से शुरू हुआ और तब तक उड़ान की थकान से मैं मुक्त हो चुका था। पहले दिन मेरे पास टिकट नहीं था, जब कुल 17 विकेट गिर गए। लेकिन अगले दिन मैं वहां था, जब न्यूजीलैंड के दो जांबाज मिशेल और ब्लंडेल ने बहादुरी के साथ पांचवें विकेट की लंबी साझेदारी की। तीसरे दिन इंग्लैंड ने चौथी पारी के कुल स्कोर का पीछा करते हुए अच्छी शुरुआत की। चौथे दिन का खेल मैं नहीं देख सका, जब इंग्लैंड ने आसानी से जीत का लक्ष्य हासिल कर लिया।

मैं जानता हूं कि उपनिवेश विरोधी भारतीय होने के नाते मुझसे यह अपेक्षा की जाती है कि मैं इंग्लैंड का समर्थन न करूं। वास्तव में मैं शायद ही ऐसा करता हूं, लेकिन लॉर्ड्स का यह टेस्ट अपवाद था। ऐसा इसलिए, क्योंकि जो रूट मेरे पसंदीदा क्रिकेटरों में से एक हैं। मैं याद करता हूं कि इंग्लैंड के एक भारत दौरे के मध्य में वह अपनी टीम से जुड़ने के लिए आए थे और तब वह इक्कीस साल के तरोताजा युवा थे। 

रूट ने टेस्ट में अपनी शुरुआत नागपुर से की थी, जिस शहर का मौसम और मिजाज उनके गृहनिवास यॉर्कशायर से एकदम भिन्न होता है। उस मैच में उन्होंने भारतीय स्पिनरों को बहुत शांत ढंग से खेला और अपनी टीम को आसानी से ड्रॉ कराने में मदद की, जिसकी बदौलत उसने दो के मुकाबले एक मैच से शृंखला जीत ली। (यह आखिरी मौका था, जब किसी प्रवासी टीम ने भारत में कोई टेस्ट शृंखला जीती) उसके बाद से पिछले एक दशक से मैं बल्लेबाज और एक व्यक्ति के रूप में रूट का बड़ा प्रशंसक हूं। 

क्रीज पर आते ही वह जिस तरह से आगे बढ़ते हैं, वह मुझे पसंद है। मैं उनके विविधता भरे स्ट्रोक्स (जिनमें खासतौर से कवर ड्राइव और बैक कट शामिल हैं) की तारीफ करता हूं। मैं स्लिप में उनके बेहतरीन क्षेत्ररक्षण, और एकदम सहज ऑफ स्पिन के साथ अप्रत्याशित रूप से विकेट लेने की उनकी क्षमता का कायल हूं। वह हमेशा मुस्कराते रहते हैं, और अब भी काफी युवा लगते हैं, जिससे वह मुझे प्रिय हैं।

कप्तान के रूप में कठिन वक्त बिताने के बाद लॉर्ड्स में उस जून टेस्ट में रूट को इतना शानदार योगदान देते हुए देखना विशेष रूप से अच्छा लगा, जिसमें उन्होंने टीम के एक साधारण सदस्य के रूप में खेलते हुए कई वर्षों बाद मिली जीत में हिस्सेदारी की थी। जून के तीसरे हफ्ते में मैं बंगलूरू लौट आया और उड़ान की थकान मिटाने के बाद मैंने चिन्नास्वामी स्टेडियम का रुख किया। 

वहां पिछली 41 चैम्पियनशिप (रणजी) की विजेता मुंबई की टीम मध्य प्रदेश के खिलाफ खेल रही थी, जिसने एक भी टूर्नामेंट नहीं जीता है। मुंबई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए सभी विकेट खोकर शानदार 374 रन बनाए। अतीत में जब उनके पास पद्माकर शिवालकर जैसे गेंदबाज होते थे, तो यह एक पारी से जीत के लिए काफी होता। मैं दूसरे दिन लंच के बाद मैदान पहुंचा और तीसरे दिन का पूरा खेल मैंने देखा, जब मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों ने साहस और संकल्प के साथ बल्लेबाजी की। 

सतर्क यश दुबे और आक्रामक शुभम शर्मा ने मिलकर दूसरे विकेट की साझेदारी में दोहरा शतक जड़ दिया। उसके बाद रजत पाटीदार ने शानदार ड्राइव लगाते हुए अपनी टीम को पहली पारी में बढ़त में पहुंचा दिया। मैं पांचवें दिन आखिरी सत्र में फिर मैदान पहुंचा जब देखा कि मध्य प्रदेश ने छह विकेट से मैच जीतकर पहली बार चैंपियनशिप जीत ली। खेल के अंत में विजेता टीम के कोच चंद्रकांत पंडित को उनके बच्चों ने ऊपर उठा लिया।

इस मैच में मौसम क्रिकेट के एकदम अनुकूल था और मैं स्टेडियम में सबसे अच्छी (पैवेलियन ऐंड की साइटस्क्रीन से ऊपर) जगह पर बैठा था। मैं मध्य प्रदेश की तरफ था, इसलिए नहीं कि, तेईस साल पहले, मैंने चंद्रकांत पंडित की कप्तानी वाली मध्य प्रदेश टीम को कर्नाटक के खिलाफ कड़े मुकाबले में रणजी फाइनल में हारते देखा था। दरअसल घरेलू क्रिकेट में मेरा मोटो है, 'मुंबई के अलावा कोई भी।' जुलाई में मैंने इन दो मैचों के बारे में लिखने के बारे में सोचा था, लेकिन सौभाग्य से मुझे इंतजार करना पड़ा, क्योंकि तीसरा मैच भी नजदीक ही था। 

अगस्त में मुझे एक वार्ता के सिलसिले में फिर इंग्लैंड जाना पड़ा और मेरी इस यात्रा के दौरान भी लॉर्ड्स में टेस्ट हो रहा था। इस बार मेजबान टीम दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेल रही थी। मेरे पास तीसरे और चौथे दिन का टिकट था। इंग्लैंड पहली पारी में करीब डेढ़ सौ रनों पर ढेर हो गई। प्रवासियों ने शानदार टीम वर्क का प्रदर्शन किया, जिनमें विविधतापूर्ण शैली वाले पांच गेंदबाजों का योगदान था। इसकी अगुवाई की रबाडा ने, जो सहजता से गति और स्विंग को नियंत्रित कर रहे थे। 

इसके अलावा दो तेज गेंदबाज एनगिडी और नोर्त्जे 90 मील की रफ्तार से ऑफ स्टंफ के आसपास गेंद डाल रहे थे। बाएं हाथ के गेंदबाज जॉनसन ने रफ्तार में कमी की भरपाई अपनी लेफ्ट स्विंग से की। और आखिरी थे, बाएं हाथ के स्पिनर महाराज जिन्होंने एक छोर संभाले रखा था। दक्षिण अफ्रीका हाल ही में राजनीतिक और आर्थिक, दोनों अर्थों में कुछ मुश्किल दौर से गुजरा है, इसलिए क्रिकेट के मैदान पर उनके कौशल को इतनी खूबसूरती से प्रदर्शित होते हुए देखकर खुशी हुई।

मैंने आईपीएल, 2022 का एक भी मैच-वास्तव में एक गेंद नहीं देखी, फिर भी मुझे लगता है कि मेरा क्रिकेट वर्ष अब तक पूरी तरह से उन लोगों की तुलना में अधिक आनंददायक रहा है, जिन्होंने आईपीएल के हर मैच, हर गेंद को देखा। असली क्रिकेट लाल गेंद से, सफेद कपड़ों में, पांच दिनों में खेला जाता है, और इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है कि कोई व्यक्ति कितने ओवर गेंदबाजी कर सकता है या एक टीम कब तक बल्लेबाजी कर सकती है।

खेल का सबसे लंबा रूप ही है, जिसमें बल्लेबाजी, गेंदबाजी, क्षेत्ररक्षण, विकेट कीपिंग और कप्तानी का तकनीकी रूप और सौंदर्य निखरता है। अन्य टेस्ट मैचों और रणजी ट्रॉफी के फाइनल की तरह, जो मैंने दशकों से देखे हैं, 2022 के इन तीन खेलों की यादें मेरा साथ बनाए रखेंगी, और मुझे आगे आने वाले बुढ़ापे के दर्द भरे वर्षों में सांत्वना देंगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed