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भाईचारे में बदलती दोस्ती

Mon, 10 Apr 2017 08:57 AM IST
आनंद कुमार
आनंद कुमार Updated Mon, 10 Apr 2017 08:57 AM IST
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friendship converted in Fraternity
आनंद कुमार

अगर बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की 2010 की यात्रा भारत-बांग्लादेश संबंधों में आई गिरावट को खत्म करने और द्विपक्षीय रिश्तों में सकारात्मकता की नींव बनाने के लिए थी, तो उनकी नवीनतम भारत यात्रा इस द्विपक्षीय रिश्ते को एक नई ऊंचाई तक पहुंचाने के लिए है। इस द्विपक्षीय रिश्ते को और गहरा करना भारत और बांग्लादेश, दोनों की इच्छा थी, जो अन्यथा संघर्षोन्मुख दक्षिण एशिया में दोस्ती और सहयोग का एक उत्तम उदाहरण बन गया है। सौभाग्य से इस प्रयास में दोनों पक्ष सफल रहे, हालांकि मामूली परेशानियां अब भी बाकी हैं।

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शेख हसीना की भारत यात्रा लंबे समय से प्रतीक्षित थी। हालांकि ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान वह भारत आई थीं, लेकिन तब यात्रा का उद्देश्य बिल्कुल अलग था। पर ताजा यात्रा द्विपक्षीय रही है और सफलता के लिहाज से इस पर सबकी नजर थी। यह यात्रा दो और कारणों से महत्वपूर्ण बन गई। वर्ष 2018 में बांग्लादेश में होने वाले चुनाव से पहले यह शेख हसीना की संभवतः आखिरी यात्रा होगी। इसलिए इस यात्रा के नतीजे विशेष रूप से बांग्लादेश जैसे देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण था, जहां राजनीतिक दल अक्सर अपनी विदेश नीति को भारत को ध्यान में रखते हुए परिभाषित करते हैं। यह यात्रा इसलिए भी अहम थी, क्योंकि यह चीन के राष्ट्रपति शी जिंनपिंग की बांग्लादेश यात्रा के कुछ ही महीने बाद हुई, जब उन्होंने अपनी चेकबुक कूटनीति के जरिये बांग्लादेश को प्रभावित करने की कोशिश की थी।
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भारत जानता है कि पैसों के मामले में वह चीन का मुकाबला नहीं कर सकता, जो दक्षिण एशियाई देशों को धनबल के सहारे प्रभावित करने की कोशिश करता है। इसलिए भारत ने अब अपने दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के साथ धनबल पर कम निर्भर रहने और गुणवत्तापूर्ण संबंध बनाने का फैसला किया है। भारत ऐतिहासिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से बांग्लादेश से जुड़ा हुआ है। सिर्फ धनबल के जरिये इस रिश्ते की जगह लेना किसी भी देश के लिए मुश्किल है।
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भारत ने 1971 में मुक्ति युद्ध के दौरान बांग्लादेश का समर्थन किया था। हालांकि भारत के इस योगदान की पूरी तरह सराहना नहीं हुई, क्योंकि बांग्लादेश की राजनीति ने 1975 में उसके संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या के बाद एक अलग मोड़ ले लिया। अब जब भारत और बांग्लादेश एक-दूसरे के काफी करीब हैं, तो इस बदले हुए हालात में दोनों पक्षों ने उस मुक्ति युद्ध की विरासत को पर्याप्त सम्मान देने का फैसला किया है। भारत ने केंद्रीय दिल्ली में एक सड़क का नाम शेख मुजीब के नाम पर रखने का फैसला किया है। उनकी अधूरी जीवनी के हिंदी संस्करण को भी जारी किया गया। दोनों पक्षों ने संयुक्त रूप से मुक्ति युद्ध पर एक डॉक्यूमेंटरी और शेख मुजीबुर्रहमान पर एक फिल्म बनाने का फैसला किया है। बांग्लादेश ने भी मुक्ति युद्ध में शहीद हुए 1,661 भारतीय जवानों को सम्मानित करने का फैसला किया है।

भारत ने इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए बांग्लादेश को अतिरिक्त 4.5 अरब डॉलर का कर्ज बढ़ा दिया है, जो मौजूदा 2.8 अरब डॉलर के कर्ज से काफी ज्यादा है। इसमें 17 परियोजनाएं शामिल हैं। दोनों पक्षों ने चार रक्षा समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। भारत ने सैन्य हार्डवेयर खरीदने के लिए अपनी तरह का पहला 50 करोड़ डॉलर का कर्ज भी ढाका को दिया है। चारों एमओयू दोनों पक्षों के बीच हुए 22 समझौतों का हिस्सा हैं। निजी क्षेत्रों में नौ अरब डॉलर के अन्य 12 समझौतों पर भी हस्ताक्षर होंगे। भारत ने आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ हसीना की शून्य सहिष्णुता की तारीफ की।

ऊर्जा सहयोग के क्षेत्र में भी रिश्ते को आगे बढ़ाया गया है। भारत ने त्रिपुरा से बांग्लादेश को 60 मेगावाट अतिरिक्त बिजली देने का फैसला किया है। बांग्लादेश को पहले से ही 600 मेगावाट बिजली दी जा रही है। एक हजार मेगावाट की पेशकश बांग्लादेश को और की जाएगी, जब अतिरिक्त इंटरकनेक्शन पॉइंट अस्तित्व में आ जाएंगे। भारत ने बांग्लादेश के लिए हाई स्पीड डीजल पाइपलाइन की भी योजना बनाई है, जो असम के नुमालिगढ़ से उत्तरी बांग्लादेश के पार्वतीपुर तक जाएगी। जब तक यह योजना पूरी होगी, तब तक रेल लिंक के जरिये बांग्लादेश डीजल भेजा जाएगा। नई दिल्ली और ढाका ने एक औपचारिक असैन्य परमाणु सहयोग समझौता करने का फैसला किया है, जो परमाणु सामग्री के हस्तांतरण, परमाणु संयंत्र के विकास, कार्मिकों के प्रशिक्षण और विशेषज्ञता साझा करने के लिए 'बुनियादी आधारभूत समझौता' है। सामरिक क्षेत्र में सहयोग का यह नया क्षेत्र है, खासकर जबसे मास्को ने बांग्लादेश में परमाणु बिजली संयंत्र का निर्माण करने के लिए कदम उठाया है।

पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार तेजी से बढ़ा है। हालांकि बांग्लादेश के लिए व्यापार घाटा एक मुद्दा है। भारत ने अब विशेष रूप से बांग्लादेश के जूट उत्पादों पर टैरिफ और गैर टैरिफ बाधाओं को पर ध्यान देने का वायदा किया है, जिसे वह ज्यादा प्रतिस्पर्धी समझता है। दोनों पक्षों ने कोलकाता और खुलना तथा राधिकापुर और बिरल के बीच बस और ट्रेन संपर्क भी बहाल किए हैं। दोनों पक्षों ने अंतर्देशीय जलमार्ग को सुधारने और तटीय शिपिंग समझौते के लिए कदम उठाने पर सहमति जताई है।


हालांकि इस समय तीस्ता जल बंटवारे पर समझौता नहीं हुआ, पर मोदी ने द्विपक्षीय रिश्तों के लिए इसकी महत्ता को रेखांकित किया और बांग्लादेशी लोगों से इसके प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि उनकी और बांग्लादेश में हसीना सरकार को इस मुश्किल मुद्दे का हल खोजने के लिए सबसे अच्छा माना गया है। यह भी माना जा रहा है कि बांग्लादेश के आम चुनाव से पहले मोदी तीस्ता समझौते करके हसीना को चकित कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो चुनाव से पहले हसीना को एक बड़ी बढ़त मिलेगी और इस समझौते से भारत-बांग्लादेश संबधों की प्रमुख बाधा को हटा दिया जाएगा।

-लेखक आईडीएसए में एसोशिएट फेलो हैं।

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