एक भरोसेमंद पड़ोसी का साथ

कुलदीप तलवार Updated Thu, 24 Oct 2013 06:39 PM IST
विज्ञापन
friend with a good neighbour

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
आज बांग्लादेश की संसद का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। संविधान के अनुसार 90 दिनों के भीतर वहां कार्यवाहक सरकार के तहत चुनाव कराना जरूरी है। इस बार भी अवामी लीग के अध्यक्ष शेख हसीना और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की मुखिया खालिदा जिया चुनावी मैदान में आमने-सामने होंगी। 1991 से ये दोनों बेगमें वहां बारी-बारी से प्रधानमंत्री रही हैं। शेख हसीना ने अपने एक ताजा बयान में कहा है कि बांग्लादेश के धर्मनिरपेक्ष चरित्र को हर सूरत में बरकरार रखा जाएगा। जबकि खालिदा जिया कट्टरपंथियों के कंधे पर सवार होकर सत्ता हासिल करना चाहती हैं।
विज्ञापन

पिछले चुनाव में अवामी लीग को 300 में से 230 सीटें मिली थीं, जबकि बीएनपी के खाते में 30 और कट्टरपंथी पार्टी जमात को केवल दो सीटें हासिल हुई थीं। दो महीने पहले अदालत ने जमात के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है। माना जा रहा है कि इस चुनाव में बीएनपी कुछ छोटी-छोटी कट्टरपंथी पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। कट्टरपंथी चाहते हैं कि बांग्लादेश के संविधान से 'सेक्यूलर' शब्द हटाकर देश को इस्लामी राष्ट्र घोषित किया जाए। इनका यह भी दबाव है कि देश में पाकिस्तान की तरह 'ईशनिंदा कानून' लागू हो। जबकि सरकार ने ये मांगें रद्द कर दी हैं।
शेख हसीना की सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कट्टरपंथियों के घुटने तोड़ने और मुक्तियुद्ध के दौरान हजारों महिलाओं, बच्चों व लाखों निर्दोष लोगों पर जुल्म ढाने वाले नेताओं को कठोर सजाएं दिलवाई हैं। आंतरिक प्रतिरोध और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद शेख हसीना ने अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी। जनवरी, 2009 में प्रधानमंत्री का पद संभालने के चार दिन बाद वह भारत यात्रा पर आईं और भारत-विरोधी ताकतों को यह पैगाम दिया कि आने वाले समय में बांग्लादेश के संबंध भारत के साथ कैसे होंगे।
बांग्लादेश के भारत के साथ संबंध सभ्यता, संस्कृति, संगीत, समाज एवं अर्थनीति जैसे विषयों के साथ जुड़े हुए हैं। शेख हसीना ने इन संबंधों को एक नया आयाम दिया है। इस दौरान भारत ने भी बांग्लादेश को हरसंभव मदद दी। इसने ढाका से होने वाले निर्यात को कई तरह की छूट दी। शेख हसीना के सत्ता में आने के बाद भारत का बांग्लादेश से निर्यात छह गुना बढ़ गया। इस दौरान बांग्लादेश को भारत ने 80 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया और 20 करोड़ डॉलर का अनुदान भी।

भारत और बांग्लादेश ने हाल ही में दो साझा बिजली परियोजनाओं के उद्घाटन के साथ ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के नए युग की शुरुआत की है। इसमें पश्चिम बंगाल में 500 मेगावाट बिजली आपूर्ति के लिए पारेषण लाइन तथा बांग्लादेश में 1,320 मेगावाट तापीय बिजली परियोजनाएं शामिल हैं। हसीना ने दशकों से चले आ रहे भारत-बांग्लादेश के बीच अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा को अंतिम रूप दिया। इसके तहत दोनों देशों के बीच 160 क्षेत्रों के आदान-प्रदान की बात कही गई है। भारत सरकार ने समझौते की मंजूरी लेने के लिए संसद में एक विधेयक पेश किया था, लेकिन कुछ राजनीतिक पार्टियों के विरोध के कारण मंजूरी अभी लटकी हुई है।

पिछले महीने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन में शेख हसीना ने मनमोहन सिंह से मुलाकात के दौरान इस समझौते और तीस्ता नदी साझा जल समझौते को जल्दी लागू करने की मांग की। ये दोनों समझौते बांग्लादेश की भावनाओं से तो जुड़े हुए हैं ही, शेख हसीना का राजनीतिक भविष्य भी इसमें दांव पर लगा हुआ है। अगर इन दोनों समझौतों पर अमल न हुआ, तो भारत अपना एक भरोसेमंद मित्र खो सकता है, जिसका फायदा पाकिस्तान और चीन उठाएगा।

दुनिया जानती है कि खालिदा जिया के शासनकाल में भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में खटास पैदा हुई और सुरक्षा के मुद्दे पर बांग्लादेश भारत के लिए एक बड़ी परेशानी बना रहा। ऐसे में अब अगर भारत की तरफ से बांग्लादेश सरकार को सकारात्मक संकेत न मिले, तो दोनों मुल्कों में खटास के साथ अवामी लीग को आगामी चुनाव में नुकसान झेलना पड़ सकता है।

ये दोनों समझौते ऐसे समय में सामने आए हैं, जब दोनों देशों की सरकारों को आगामी लोकसभा चुनाव का सामना करना है। चुनाव निकट होने के कारण शेख हसीना पर चुनावी नतीजे प्रदर्शित करने का भारी दबाव है, जिनमें ये दोनों समझौते शामिल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us