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एक शिक्षक की हत्या से स्तब्ध फ्रांस, 2015 का मंजर याद आया

Tue, 20 Oct 2020 02:09 AM IST
राम यादव राम यादव
राम यादव Published by: राम यादव Updated Tue, 20 Oct 2020 02:09 AM IST
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France stunned by the murder of a teacher
फ्रांस

फ्रांस एक बार फिर सन्न और संतप्त है। एक बार फिर एक इस्लामी आतंकवादी ने नृशंसता की हद पार कर दी। इतिहास-भूगोल के एक स्कूली शिक्षक पर घात लगा कर चाकू से हमले में उसे मार डाला गया और उसका सिर धड़ से अलग कर दिया गया। पेरिस से 35 किलोमीटर दूर कोंफ्लां-सोंत-ओनोरौं में शुक्रवार, 16 अक्तूबर को हुए इस हत्याकांड ने, कोरोना वायरस की दूसरी भीषण लहर की मार से कराह रहे फ्रांसीसियों का खून खौला दिया है। मृतक को श्रद्धांजलि देने के बाद-कोरोना के कारण जमावबंदी आदेश होते हुए भी- रविवार को इस्लामी आतंकवाद के विरुद्ध देशव्यापी प्रदर्शन हुए। पेरिस के 'प्लास दे ला रेपुब्लीक' (गणतंत्र चौक) पर  एक विशाल रैली हुई।


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वहां कुछ लोग व्यंग्य पत्रिका 'चार्ली एब्दो' में प्रकाशित उन्हीं व्यंग्यचित्रों (कर्टूनों) वाली तख्तियां उठाए हुए थे, जिनके कारण जनवरी 2015 में इस पत्रिका के कार्यालय पर हुए इस्लामी आतंकवादी हमले के दौरान पत्रकारों-चित्रकारों सहित कुल 17 लोगों को मार डाला गया था। पेरिस की एक अदालत में इस समय उस हत्याकांड की सुनवाई चल रही है। अभी कुछ ही सप्ताह पहले 'चार्ली एब्दो' के उस समय के संपादकीय कार्यालय के पास ही, चाकू द्वारा एक नए हमले में दो लोगों को घायल कर दिया गया। फ्रांस के आतंकवाद निरोधक सरकारी अभियोक्ता जौं-फ्रौंस्वा रिकार्द के अनुसार, 16 अक्तूबर वाले हमले के आतंकवादी ने 47 वर्षीय शिक्षक सामुएल पाती का एक फोटो सोशल मीडिया पर डाला। फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों को 'काफिरों का मुखिया' बताते हुए उसने बेहद अपमानजनक और भड़काने वाली पोस्ट डाली।

रिकार्द का कहना था कि मात्र 18 साल का यह हत्यारा रूस के चेचन्या गणराज्य से आया एक शरणार्थी था। पुलिस के साथ मुठभेड़ में वह मारा गया। उसे इसी साल चार मार्च को फ्रांस में रहने की विधिवत अनुमति मिली थी। उसके परिवार के चार सदस्यों सहित 11 लोगों को पूछताछ के लिए गिरफ्तार कर लिया गया है। पेरिस स्थित रूसी दूतावास ने बताया कि हत्यारा अब्दुल्लाख अन्जोरोव जब छह साल का था, उसका परिवार शरणार्थी बनकर फ्रांस आ गया था। रिकार्द का कहना है कि सामुएल पाती को इसलिए मार डाला गया, क्योंकि 'चार्ली एब्दो' ने अपने साहसिक कार्टूनों के प्रकाशन के पांच वर्ष पूरे होने पर कुछ दिन पहले, उन्हें दुबारा प्रकाशित किया था। सामुएल पाती ने आठवीं कक्षा के अपने छात्रों को समाजशास्त्र के घंटे में फ्रांस में विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का महत्व समझाने के लिए इन कार्टूनों का उदाहरण दिया था। इस पर बहस भी हुई। इसके बाद एक मुस्लिम छात्रा के पिता ने सोशल मीडिया में सामुएल पाती के विरुद्ध निंदा-अभियान छेड़ दिया। 18 वर्षीय हत्यारे ने इसी अभियान से प्रभावित होकर शिक्षक सामुएल पाती को मार डालने की योजना बनाई। सरकारी अभियोक्ता के अनुसार, शुक्रवार 16 अक्तूबर को सामुएल पाती तीसरे पहर जब घर जा रहे थे, तभी रास्ते में उन पर चाकू से हमला हुआ।

इस घटना की खबर मिलते ही राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने इसे एक 'वीभत्स इस्लामी आतंकवादी हमला' बताते हुए कहा, 'हमारे एक नागरिक की बर्बर हत्या कर दी गई है... वह एक शिक्षक था, अपने छात्रों को पढ़ा रहा था कि धार्मिक आस्था होने, न होने का क्या मतलब होता है।' वह उस स्कूल की प्रधान अध्यापिका से भी मिले, जहां सामुएल पाती पढ़ाते थे। राष्ट्रपति महोदय ने उनके प्रति आभार प्रकट किया कि सारी बाधाओं और खतरों के बावजूद उन्होंने अपने स्कूल में विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की, और उसे पढ़ाने की व्यवस्था कर रखी है। 

फ्रांस ही नहीं, यूरोप के उन सभी देशों की जनता और नेता इस बात से बहुत क्षुब्ध हैं कि जिन विदेशियों की हालत पर दया कर उन्हें शरण दी जाती है, वे कृतज्ञता का उत्तर कई बार कृतघ्नता से देते हैं। यूरोपीय देशों में अपनी अलग परिपाटी वाले समानांतर मुस्लिम समाजों का उभार भी एक बड़ी समस्या बन गया है। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने तो इसकी रोकथाम के लिए हाल ही में एक नया विधेयक भी पेश किया है। उसमें शिक्षा और शिक्षा संस्थानों की भूमिका को केंद्र में रखा गया है। मैक्रों का तर्क है कि स्कूलों में ही फ्रांसीसी गणतंत्र के मूल्यों की आधारशिला रखी जाती है।

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