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कामयाबी के पांच सूत्र
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम
Updated Tue, 28 Jul 2015 08:13 PM IST
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मौके पर मैं नए वर्ष 2011 के लिए अपने विचार आपके साथ साझा करना चाहता
हूं। मैं तमाम युवाओं को नववर्ष की बधाई देना चाहता हूं। पिछले दशक ने हमें
सिखाया कि हम अर्थव्यवस्था से लेकर जिंदगी के हर मोर्चे पर कैसे सफलता
अर्जित कर सकते हैं, और कैसे नाकाम हो सकते हैं। लिहाजा 2011 संकल्प का
वर्ष होना चाहिए। हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम भारत के नागरिक, ईमानदारी
से काम करेंगे और ईमानदारी से सफलता हासिल करेंगे। इस मौके पर मैं नववर्ष
पर लिखी मेरी कविता आपसे साझा करना चाहता हूं।
महान राष्ट्र का जन्म
सुदूर खूबसूरत लालिमा ने/ आकाशगंगा को ढक लिया है/ यह हमारी आकाशगंगा है/ सारे सितारे हैरत से पूछ रहे हैं/ कहां से आ रही है यह खूबसूरत रोशनी/ आकाशगंगा में हर कोई पूछ रहा है/ किसने बिखेरी ये रोशनी, कौन है वह/ मेरे मित्रो, मैं जानता हूं उसे/ आकाशगंगा के मेरे मित्रो, मैं सूर्य हूं/ मेरी परिधि में आठ ग्रह लगा रहे हैं चक्कर/ उनमें से एक है पृथ्वी/ जिसमें रहते हैं छह अरब मनुष्य/ सैकड़ों देशों में/ इन्हीं में एक है महान सभ्यता/ भारत 2020 की ओर बढ़ते हुए/ मना रहा है एक महान राष्ट्र के उदय का उत्सव/ भारत से आकाशगंगा तक पहुंच रहा है/ रोशनी का उत्सव/ एक ऐसा राष्ट्र, जिसमें नहीं होगा प्रदूषण/ नहीं होगी गरीबी, होगा समृद्धि का विस्तार/ शांति होगी, नहीं होगा युद्ध का कोई भय/ यही वह जगह है, जहां बरसेंगी खुशियां...
देश के 50 करोड़ से ज्यादा युवाओं को इसी खूबसूरत राष्ट्र के उदय के लिए समर्पित होना चाहिए। मगर इसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए हर युवा में यह जज्बा होना चाहिए कि, हां मैं कर सकता हूं! यही जज्बा 'हम' में बदलेगा और हम कह सकेंगे कि हां हम कर सकते हैं, और इस तरह भारत यह कर दिखाएगा।
मित्रो, 2020 के भारत को लेकर मैं अपनी परिकल्पना साझा करना चाहता हूं, ताकि समूचा देश अपने मिशनों के जरिये देश के आर्थिक विकास में अपनी सहभागिता निभा सके। 2020 के भारत को लेकर मेरे मन में कल्पना है। यह ऐसा राष्ट्र होगा, जहां शहरी और ग्रामीण आधार पर किसी तरह का भेदभाव नहीं होगा। ऊर्जा और स्वच्छ पानी तक सबकी पहुंच होगी। एक ऐसा राष्ट्र, जिसमें कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र एक साथ मिलकर कदम से कदम मिलाकर काम करेंगे। जहां कोई भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी सामाजिक या आर्थिक भेदभाव की वजह से गुणवत्ता वाली शिक्षा हासिल करने से वंचित नहीं होगा। ऐसा राष्ट्र, जहां प्रतिभाशाली स्कॉलर, वैज्ञानिक और निवेशक आना चाहेंगे। सभी के लिए बेहतर स्वास्थ सुविधाएं होंगी और जहां जिम्मेदार तथा पारदर्शी प्रशासन होगा। एक ऐसा राष्ट्र, जहां गरीबी और निरक्षरता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और समाज का कोई भी तबका खुद को उपेक्षित महसूस नहीं करेगा। समृद्ध, स्वस्थ और सुरक्षित राष्ट्र, जिसमें आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं होगी, और जो निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर होगा। मेरी कल्पना में ऐसा राष्ट्र है, जहां किसी तरह की तकलीफ न हो और हमें अपने नेतृत्व पर गर्व हो।
मगर यह सब हासिल करना आसान नहीं है। इसके लिए हमें समग्र कार्ययोजना पर काम करना होगा। हमने ऐसे पांच क्षेत्रों की शिनाख्त की है, जिनमें समग्र रूप से काम करने का हमारा माद्दा है। ये हैं- कृषि तथा खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा तथा स्वास्थ्य, सूचना तथा दूरसंचार प्रौद्योगिकी, देश के सभी हिस्सों के लिए विश्वसनीय और गुणवत्ता वाली बिजली, सड़क परिवहन तथा आधारभूत संरचना, और जटिल प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता। ये पांचों क्षेत्र यदि आपस में तालमेल के साथ आगे बढ़ें, तो हम खाद्यान्न, अर्थव्यवस्था और देश की सुरक्षा के मामले में मजबूत हो सकते हैं।
इस नए दशक में एक राष्ट्र के रूप में भारत के पास तेज आर्थिक वृद्धि, औद्योगिक विकास, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में अवसरों की कमी नहीं होगी। मगर विकास की ओर बढ़ते हर कदम के साथ भ्रष्टाचार, गरीबी, बीमारी, जलवायु परिवर्तन और समाज में बढ़ती असहिष्णुता को खत्म करने की नई तरह की चुनौतियां भी होंगी। यह देश भौगोलिक रूप से काफी विशाल है और इसका समृद्ध इतिहास है। यहां छह लाख से ज्यादा गांव हैं, जो राष्ट्र के दमकते विकास के पहरुए हो सकते हैं। अब जब नया दशक अंगड़ाई ले रहा है। देश के विकास के मद्देनजर इन्हीं गांवों का विकास पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। मगर यह कैसे संभव होगा?
इसके लिए 'पुरा' (प्रॉविजन ऑफ अर्बन एमेनिटीज इन रूरल एरिया) के तहत अनेक ग्रामीण उद्यमों की रचना करनी होगी। ऐसी टिकाऊ व्यवस्था बनाने की जरूरत है, जो वाहक के रूप में काम करते हुए देश में समग्र विकास ला सके। 'पुरा' के लिए लोगों के परस्पर संपर्क, इलेक्ट्रॉनिक कनेक्टिविटी के रूप में उभर सकेंगे। प्रत्येक 'पुरा' के अंतर्गत 50 से 100 गांव होंगे, जो मानव पूंजी की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और सशक्तीकरण की दिशा में काम करेंगे। पूरे देश में अनुमानतः 7,000 'पुरा' होंगे, जिनमें 70 करोड़ लोग रहते हैं। देश में कई 'पुरा' काम कर रहे हैं, जिनकी शुरुआत अनेक शैक्षणिक, स्वास्थ्य सेवा संस्थानों, उद्योगों और अन्य संस्थाओं ने किया है। भारत सरकार पहले ही विभिन्न जिलों में 'पुरा' पर अमल कर रही है। पर सरकार के अलावा ऐसे नवीन मंचों की जरूरत होगी, जो टिकाऊ हों। 'पुरा कॉरपोरेशन' ऐसा ही मंच है, जिसे आईआईएम, अहमदाबाद के मेरे एक छात्र ने अंजाम दिया है। इसने स्थानीय स्तर पर एकीकृत उद्यमों की रचना की है, जो साझा बाजार में हिस्सेदारी करते हैं।
मुझे यकीन है कि 2011 देश के इतिहास में एक बेहद महत्वपूर्ण चरण साबित होगा। यह एक ऐसे दशक की शुरुआत होगी, जिसमें भारतीय अर्थव्यवस्था और उद्योग, मानव पूंजी, कृषि और विज्ञान और अनुसंधान वैश्विक पैमाने पर अगुआ बनकर उभर सकेंगे। नववर्ष पर मैं यही शुभकामना दे रहा हूं।
(1 जनवरी, 2011/ अमर उजाला)
महान राष्ट्र का जन्म
सुदूर खूबसूरत लालिमा ने/ आकाशगंगा को ढक लिया है/ यह हमारी आकाशगंगा है/ सारे सितारे हैरत से पूछ रहे हैं/ कहां से आ रही है यह खूबसूरत रोशनी/ आकाशगंगा में हर कोई पूछ रहा है/ किसने बिखेरी ये रोशनी, कौन है वह/ मेरे मित्रो, मैं जानता हूं उसे/ आकाशगंगा के मेरे मित्रो, मैं सूर्य हूं/ मेरी परिधि में आठ ग्रह लगा रहे हैं चक्कर/ उनमें से एक है पृथ्वी/ जिसमें रहते हैं छह अरब मनुष्य/ सैकड़ों देशों में/ इन्हीं में एक है महान सभ्यता/ भारत 2020 की ओर बढ़ते हुए/ मना रहा है एक महान राष्ट्र के उदय का उत्सव/ भारत से आकाशगंगा तक पहुंच रहा है/ रोशनी का उत्सव/ एक ऐसा राष्ट्र, जिसमें नहीं होगा प्रदूषण/ नहीं होगी गरीबी, होगा समृद्धि का विस्तार/ शांति होगी, नहीं होगा युद्ध का कोई भय/ यही वह जगह है, जहां बरसेंगी खुशियां...
देश के 50 करोड़ से ज्यादा युवाओं को इसी खूबसूरत राष्ट्र के उदय के लिए समर्पित होना चाहिए। मगर इसे अंजाम तक पहुंचाने के लिए हर युवा में यह जज्बा होना चाहिए कि, हां मैं कर सकता हूं! यही जज्बा 'हम' में बदलेगा और हम कह सकेंगे कि हां हम कर सकते हैं, और इस तरह भारत यह कर दिखाएगा।
मित्रो, 2020 के भारत को लेकर मैं अपनी परिकल्पना साझा करना चाहता हूं, ताकि समूचा देश अपने मिशनों के जरिये देश के आर्थिक विकास में अपनी सहभागिता निभा सके। 2020 के भारत को लेकर मेरे मन में कल्पना है। यह ऐसा राष्ट्र होगा, जहां शहरी और ग्रामीण आधार पर किसी तरह का भेदभाव नहीं होगा। ऊर्जा और स्वच्छ पानी तक सबकी पहुंच होगी। एक ऐसा राष्ट्र, जिसमें कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र एक साथ मिलकर कदम से कदम मिलाकर काम करेंगे। जहां कोई भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी सामाजिक या आर्थिक भेदभाव की वजह से गुणवत्ता वाली शिक्षा हासिल करने से वंचित नहीं होगा। ऐसा राष्ट्र, जहां प्रतिभाशाली स्कॉलर, वैज्ञानिक और निवेशक आना चाहेंगे। सभी के लिए बेहतर स्वास्थ सुविधाएं होंगी और जहां जिम्मेदार तथा पारदर्शी प्रशासन होगा। एक ऐसा राष्ट्र, जहां गरीबी और निरक्षरता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और समाज का कोई भी तबका खुद को उपेक्षित महसूस नहीं करेगा। समृद्ध, स्वस्थ और सुरक्षित राष्ट्र, जिसमें आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं होगी, और जो निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर होगा। मेरी कल्पना में ऐसा राष्ट्र है, जहां किसी तरह की तकलीफ न हो और हमें अपने नेतृत्व पर गर्व हो।
मगर यह सब हासिल करना आसान नहीं है। इसके लिए हमें समग्र कार्ययोजना पर काम करना होगा। हमने ऐसे पांच क्षेत्रों की शिनाख्त की है, जिनमें समग्र रूप से काम करने का हमारा माद्दा है। ये हैं- कृषि तथा खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा तथा स्वास्थ्य, सूचना तथा दूरसंचार प्रौद्योगिकी, देश के सभी हिस्सों के लिए विश्वसनीय और गुणवत्ता वाली बिजली, सड़क परिवहन तथा आधारभूत संरचना, और जटिल प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता। ये पांचों क्षेत्र यदि आपस में तालमेल के साथ आगे बढ़ें, तो हम खाद्यान्न, अर्थव्यवस्था और देश की सुरक्षा के मामले में मजबूत हो सकते हैं।
इस नए दशक में एक राष्ट्र के रूप में भारत के पास तेज आर्थिक वृद्धि, औद्योगिक विकास, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में अवसरों की कमी नहीं होगी। मगर विकास की ओर बढ़ते हर कदम के साथ भ्रष्टाचार, गरीबी, बीमारी, जलवायु परिवर्तन और समाज में बढ़ती असहिष्णुता को खत्म करने की नई तरह की चुनौतियां भी होंगी। यह देश भौगोलिक रूप से काफी विशाल है और इसका समृद्ध इतिहास है। यहां छह लाख से ज्यादा गांव हैं, जो राष्ट्र के दमकते विकास के पहरुए हो सकते हैं। अब जब नया दशक अंगड़ाई ले रहा है। देश के विकास के मद्देनजर इन्हीं गांवों का विकास पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। मगर यह कैसे संभव होगा?
इसके लिए 'पुरा' (प्रॉविजन ऑफ अर्बन एमेनिटीज इन रूरल एरिया) के तहत अनेक ग्रामीण उद्यमों की रचना करनी होगी। ऐसी टिकाऊ व्यवस्था बनाने की जरूरत है, जो वाहक के रूप में काम करते हुए देश में समग्र विकास ला सके। 'पुरा' के लिए लोगों के परस्पर संपर्क, इलेक्ट्रॉनिक कनेक्टिविटी के रूप में उभर सकेंगे। प्रत्येक 'पुरा' के अंतर्गत 50 से 100 गांव होंगे, जो मानव पूंजी की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और सशक्तीकरण की दिशा में काम करेंगे। पूरे देश में अनुमानतः 7,000 'पुरा' होंगे, जिनमें 70 करोड़ लोग रहते हैं। देश में कई 'पुरा' काम कर रहे हैं, जिनकी शुरुआत अनेक शैक्षणिक, स्वास्थ्य सेवा संस्थानों, उद्योगों और अन्य संस्थाओं ने किया है। भारत सरकार पहले ही विभिन्न जिलों में 'पुरा' पर अमल कर रही है। पर सरकार के अलावा ऐसे नवीन मंचों की जरूरत होगी, जो टिकाऊ हों। 'पुरा कॉरपोरेशन' ऐसा ही मंच है, जिसे आईआईएम, अहमदाबाद के मेरे एक छात्र ने अंजाम दिया है। इसने स्थानीय स्तर पर एकीकृत उद्यमों की रचना की है, जो साझा बाजार में हिस्सेदारी करते हैं।
मुझे यकीन है कि 2011 देश के इतिहास में एक बेहद महत्वपूर्ण चरण साबित होगा। यह एक ऐसे दशक की शुरुआत होगी, जिसमें भारतीय अर्थव्यवस्था और उद्योग, मानव पूंजी, कृषि और विज्ञान और अनुसंधान वैश्विक पैमाने पर अगुआ बनकर उभर सकेंगे। नववर्ष पर मैं यही शुभकामना दे रहा हूं।
(1 जनवरी, 2011/ अमर उजाला)