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पड़ोस: बांग्लादेश में पहले सुधार, फिर चुनाव, लेकिन अनिर्णय की स्थिति से कुछ दल असहज

Sat, 24 Aug 2024 04:24 PM IST
subir bhowmik सुबीर भौमिक
Updated Sat, 24 Aug 2024 04:24 PM IST
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सार
अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने चुनाव की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई। यह बात अवामी लीग, बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी को अच्छी नहीं लगेगी।
 
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First reforms in Bangladesh, then elections
बांग्लादेश। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अशांत बांग्लादेश में तुरंत संसदीय चुनाव कराने की संभावनाएं इस हफ्ते तभी धूमिल हो गईं, जब मुल्क की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने चुनाव की कोई निश्चित समय-सीमा बताने से इन्कार कर दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्हें पहले देश में महत्वपूर्ण सुधार करने का जनादेश मिला है। जाहिर है, यह बात बांग्लादेश के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों, अपदस्थ अवामी लीग और प्रमुख विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और उसकी सहयोगी जमात-ए-इस्लामी को अच्छी नहीं लगेगी। बीएनपी मुल्क के मौजूदा मिजाज का लाभ उठाना चाहती है, जो अवामी लीग के खिलाफ है और सत्ता में लौटना चाहती है। यह तभी संभव होगा, जब चुनाव जल्द कराए जाएं।



बीएनपी नौकरशाही, पुलिस और सुरक्षा सेवाओं तथा सरकार के अन्य विभागों में चल रहे बदलाव का स्वागत कर सकती है, जहां अवामी लीग के करीबी लोगों को कार्यकारी आदेशों या छात्र आंदोलनकारियों द्वारा  हटाया जा रहा है। जिस तरह से प्रदर्शनकारियों ने मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को दो घंटे की अंतिम चेतावनी देकर इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया, वह एक तरह का जबरन बदलाव है। वहीं, अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे साजिद वाजिद जॉय ने 'तीन महीने के भीतर नए चुनाव' कराने के लिए भारत से हस्तक्षेप करने की मांग की है। शायद चुनावों की घोषणा से सारा ध्यान उस पर केंद्रित हो जाए और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ चल रही साजिशें कम हो जाएं और अवामी लीग को स्वच्छ छवि वाले नए उम्मीदवारों को मैदान में उतारने का मौका मिल जाए, ताकि हसीना के अपदस्थ होने के बाद अनियंत्रित अराजकता और लूट से नाराज जनभावनाओं का फायदा उठाया जा सके। लेकिन नोबेल पुरस्कार विजेता यूनुस सुधारों पर ध्यान केंद्रित करके चुनावों में देरी कर सकते हैं। यूनाइटेड न्यूज ऑफ बांग्लादेश ने प्रेस सचिव शफीकुल आलम के माध्यम से यूनुस को उद्धृत करते हुए लिखा, 'सत्ता में बने रहने के प्रयास में हसीना की तानाशाही ने देश की हर संस्था को नष्ट कर दिया।'


यूनुस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश के पुनर्निर्माण में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि अंतरिम सरकार बांग्लादेश में शरण लिए हुए दस लाख से अधिक रोहिंग्याओं को सहायता देना जारी रखेगी। लेकिन उनकी असली परीक्षा आर्थिक विकास को पटरी पर लाना है, जो कोविड के बाद बुरी तरह से प्रभावित हुई है और भ्रष्टाचार के कारण बैंक डिफॉल्ट और बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग के कारण और बदतर हो गया है। यूनुस को सख्ती से वित्तीय अपराधियों से निपटना होगा। सैन्य समर्थित कार्यवाहक सरकार के दौरान यूनुस ने अपनी राजनीति पार्टी बनाने की कोशिश की थी, लेकिन फिर पीछे हट गए। अटकलें हैं कि वह बीएनपी-जमात गठबंधन एवं अवामी लीग के बीच लंबे समय से चल रही मुल्क की द्विदलीय व्यवस्था को तोड़ने के लिए इस बार नई राजनीतिक पार्टी बना सकते हैं। चुनाव में देरी से वैश्विक स्तर पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखने वाली बात होगी। अमेरिका और यूरोपीय संघ इसका स्वागत कर सकते हैं। भारत तब तक बीएनपी-जमात सरकार के बजाय अंतरिम प्रशासन को प्राथमिकता दे सकता है, जब तक कि वह अपना काम ठीक से नहीं कर लेता। चीन, जिसने भारत की तरह हसीना का समर्थन किया है, सत्ता में आने वाले किसी से भी निपट सकता है।

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