फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Film and patriotism

फिल्म और देशभक्ति

Sun, 23 Oct 2016 07:32 PM IST
तवलीन सिंह
तवलीन सिंह Updated Sun, 23 Oct 2016 07:32 PM IST
विज्ञापन
Film and patriotism
तवलीन सिंह

करन जौहर की ऐ दिल है मुश्किल फिल्म का विवाद आखिरकार सुलझ गया है। अब कुछ शर्तों के साथ इस फिल्म का प्रदर्शन होगा। दरअसल पिछले सप्ताह राज ठाकरे के मनसे (महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना) के सैनिक यह मांग करते हुए मुंबई की सड़कों पर उतर आए थे कि ऐ दिल है मुश्किल को वे मुंबई के सिनेमाघरों में किसी हाल में लगने नहीं देंगे, क्योंकि करन जौहर की इस नई फिल्म में एक पाकिस्तानी अभिनेता ने रोल किया है। अगर ये लोग असली सैनिक होते, तो इन्हें देशभक्ति और गुंडागर्दी का फर्क बताने की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन यह बताना जरूरी हो गया है, क्योंकि इन नकली सैनिकों की हरकतों से भारत बदनाम हो रहा है। दुनिया मानती है कि भारत और पाकिस्तान में दिन और रात का फर्क है, लेकिन मनसे के ये ‘देशभक्त’ इसे समझ नहीं पाए हैं। जब भी वे इस किस्म की हिंसा पर उतर आते हैं, तो भारत को घसीटकर पाकिस्तान के स्तर पर ले आते हैं।

विज्ञापन


मुंबई में शिवसेना और मनसे की ऐसी दादागीरी है कि स्थानीय पुलिस भी उनसे बचकर रहती है और सरकारी अधिकारी भी। सो जब ये सिनमाघरों में तोड़फोड़ करने या परीक्षा भवनों में से दूसरे राज्यों से आए गैरमराठी बच्चों को निकाल कर मारने आते हैं, तो पुलिस या तो गायब हो जाती है या तब पहुंचती है, जब ये लोग अपना काम कर चुके होते हैं। इनकी हिंसक घटनाओं की सूची लंबी है, लेकिन दो अति शर्मनाक घटनाओं को भूलना मुश्किल है। एक वह, जब शिवसैनिकों ने रेलवे की परीक्षा देने बिहार से आए एक लड़के को परीक्षा भवन से घसीट कर जान से मार डाला था। इसी तरह करीब पंद्रह साल पहले एक अस्पताल में शिवसैनिकों ने सिर्फ इस वजह से आग लगा दी थी कि उनके किसी नेता की उस अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। उस वक्त अस्पताल में नवजात बच्चे और लाचार वृद्ध मरीज भी थे, लेकिन शिवसैनिकों ने उनकी जरा भी परवाह नहीं की।
विज्ञापन


शिवसेना से अलग होकर राज ठाकरे ने मनसे का गठन किया, तो इसकी हरकतें और भी उग्र हो गईं। राज ठाकरे की यह पार्टी चुनाव जीतने में तकरीबन नाकाम रही है, लेकिन गुंडागर्दी में सबसे आगे है। मनसे ऐ दिल है मुश्किल का विरोध इसलिए कर रही थी कि इसमें एक पाकिस्तानी अभिनेता ने काम किया है। जबकि इसका प्रदर्शन रोकने से नुकसान भारतीयों का होगा। फिल्मों में सिर्फ अभिनेता काम नहीं करते, इनसे हजारों गरीब लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी होती है। जब कोई फिल्म नहीं चलने दी जाती, तब सबसे ज्यादा नुकसान इनका ही होता है, क्योंकि अक्सर निर्माता इनका वेतन तक नहीं दे पाते। पिछले सप्ताह करन जौहर ने अपना पक्ष रखने की कोशिश की थी। उन्होंने यहां तक कहा था कि भविष्य में वह कभी पाकिस्तानी अभिनेताओं को लेकर फिल्म नहीं बनाएंगे। लेकिन मनसे टस से मस होने को तैयार नहीं थी। अंत में करन जौहर ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मदद मांगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


अजीब है मनसे की देशभक्ति, जो महानगरों में तोड़फोड़ करने में दिखती है, सीमा पर नहीं। अजीब किस्म की बहादुरी है यह, जो निहत्थे लोगों को डराने-धमकाने में काम आती है। अपने देश की प्रशासन-व्यवस्था अजीब है कि गुंडों को पकड़ कर अंदर करने से पुलिस डरती है। मुंबई में मनसे से लोग इसलिए भी डरते हैं, क्योंकि बहुत बार इनकी हिंसा देख चुके हैं। ऐसी गुंडागर्दी से भारत और भारत की छवि का सबसे ज्यादा नुकसान होता है। कौन समझाएगा इन ‘देशभक्तों’ को कि असली देशभक्त सरहद पर लड़ते हैं, सड़कों पर नहीं!

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed