{"_id":"6cfe148a6fb1030dafb7b1e49bdb6555","slug":"feature-arises-dilemma","type":"story","status":"publish","title_hn":"'सुविधा’ से पैदा होती दुविधा!","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया ","slug":"opinion"}}
'सुविधा’ से पैदा होती दुविधा!
प्रकाश पुरोहित
Updated Thu, 06 Mar 2014 06:13 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नाव और हवाई जहाज में मेरी हालत एक जैसी रहती है। एक बार बैठ जाता हूं, तो फिर उठने की हिम्मत नहीं कर पाता। नाव का तो ठीक है, मगर हवाई जहाज का डर मुझे कई बार शर्मिंदा कर देता है। भले ही हवाई जहाज के आसमान में स्थिर होने के बाद सेफ्टी बेल्ट खोल लूं, मगर उठने में डर लगता है कि कहीं प्लेन डगमगा न जाए, जबकि प्लेन में आने-जाने वाले एक मिनट भी चुपचाप नहीं बैठ सकते। उनकी लगातार हरकतें यह बताने के लिए ही होती हैं कि पहली बार नहीं बैठे हैं।
विज्ञापन
प्लेन उड़ा नहीं कि ये फटाफट ‘सुविधा’ की तरफ यों भागते हैं, जैसे सफर करना तो दूसरा ही काम है, पहला काम तो ‘सुविधा’ का उपयोग करना है। ऐसा नहीं है कि मेरा मन नहीं होता, लेकिन न जाने किस-किस तरह के डर हावी होने लगते हैं कि मैं उठ ही नहीं पाता, और लोग हैं कि एक घंटे की फ्लाइट में दो-तीन बार ‘सुविधा’ तक पहुंच जाते हैं। पहले तो मुझे लगता था कि मेरी तरह डर रहे होंगे, इसलिए ‘सुविधा’ की तरफ भाग रहे हैं। वह तो बाद में पता चला कि डर-वर कुछ नहीं, बस परंपराओं का पालन किया जा रहा है।
विज्ञापन
मेरी आधी जान तो यही सोचकर निकल जाती है कि ‘सुविधा’ में गया और कहीं ऊंच-नीच हो गई तो! हवाई जहाज और लिफ्ट में कभी भी, कुछ भी हो सकता है। सच कहूं, तो ‘सुविधा’ के नाम पर ही दुविधा खड़ी हो जाती है कि जाऊं या नहीं जाऊं! पहला डर तो यही है कि सीट से खड़े होते ही कहीं गड़बड़ न हो जाए। मुझे यह यकीन रहता है कि मेरे सीट से चिपक कर बैठे रहने से ही प्लेन ठीक-ठाक चल रहा है।
विज्ञापन
ये सारी ‘सुविधा’ भरी बातें इसलिए याद आ रही हैं कि कुछ एयरलाइंस इस बात पर गौर कर रही हैं कि हवाई जहाज से ‘सुविधा’ खत्म कर दी जाए, तो कम से कम छह सीटें और बढ़ाई जा सकती हैं। मुझे तो यह विचार ठीक ही लग रहा है, क्योंकि एक ही बार प्लेन में बैठा हूं और समझ चुका हूं कि ‘सुविधा’ का होना, न होना मेरे लिए तो बराबर ही है। हां, बाकी लोग, उड़ते विमान में क्या करेंगे, यह सोचा जाना चाहिए।