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भाग्य हमेशा जागृत रहता है

Fri, 06 Sep 2013 07:45 PM IST
शिवकुमार गोयल
शिवकुमार गोयल Updated Fri, 06 Sep 2013 07:45 PM IST
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Fate is always awake

एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा, धर्म का फल किसे प्राप्त होता है? शिव जी ने उत्तर दिया, जो हिंसा से सर्वथा विरत रहकर सभी प्राणियों से प्रेम करता है, सबसे सरलता का व्यवहार करता है, जो क्षमाशील और चरित्रवान है, उसे ही धर्म का फल प्राप्त होता है।

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'स्वर्ग के अधिकारी कौन होते हैं?' इस जिज्ञासा का समाधान करते हुए महादेव ने कहा, जो दूसरों के धन से मोह नहीं रखते, पराई स्त्री से सदा दूर रहते हैं, ईमानदारी और परिश्रम से प्राप्त खाद्य पदार्थों का उपभोग करते हैं, कभी असत्य नहीं बोलते, किसी की चुगली-निंदा नहीं करते, सौम्य वाणी बोलते हैं, वही स्वर्ग के अधिकारी होते हैं।
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भगवान शंकर ने आगे कहा, जीवन में सदा शुभ कार्य ही करना चाहिए। शुभ कार्यों से शुभ प्रारब्ध बनता है और शुभ प्रारब्ध से शुभ कर्म बनते हैं। शुभ कर्मों का फल शुभ होता है।
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मनुष्य जैसा कर्म करता है, वैसा ही प्रारब्ध बनता है। प्रारब्ध अत्यंत बलवान होता है। उसी के अनुसार जीव भोग करता है। प्राणी भले ही प्रमाद में पड़कर सो जाए, परंतु उसका प्रारब्ध सदा जागता रहता है। लोभ, लालच और तृष्णा को समस्त दुखों का कारण बताते हुए देवाधिदेव महादेव ने कहा, तृष्णा के समान कोई दुख नहीं है और त्याग एवं संतोष के बराबर कोई दूसरा सुख नहीं है।

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