फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Famine in Somalia, children in crisis

Somalia Crisis: सोमालिया में अकाल, संकट में बच्चे

nicholas christoff निकोलस क्रिस्टॉफ
Updated Sun, 22 Jan 2023 06:03 AM IST
विज्ञापन
सार
सोमालिया चार दशक में सबसे भीषण सूखे का सामना कर रहा है और संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, संकट गहराने पर जुलाई तक 18 लाख बच्चे भीषण कुपोषण का सामना करेंगे। युद्ध व भूख से करीब 38 लाख लोगों को देश से भागना पड़ा है। वर्ष 2011 के अकाल में यहां 2,60,000 बच्चे मारे गए थे, पर इनके बगैर भी यहां बच्चे मरते हैं।
 
loader
Famine in Somalia, children in crisis
starvation - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अपने बच्चे से अधिक जीना अपने दिल के एक टुकड़े को खोने जैसा है। अरब सागर में सैकड़ों किलोमीटर तक फैले पूर्वी अफ्रीका के प्रायद्वीप पर मंडराते अकाल का मतलब है कि जल्दी ही इस भूखंड पर और हजारों छोटी-छोटी कब्रें खोदने की जरूरत पड़ेगी। सोमालिया एक ऐसा देश है, जहां किसान और बकरी चराने वाले बड़ी मुश्किल से रेगिस्तान में अपनी आजीविका कमाते हैं। यहां अमूमन सालाना दो बार बरसात आती है, लेकिन पिछले करीब दो साल से बारिश नहीं हो रही। नतीजतन फसल नहीं हो रही और सूखी सख्त जमीन पर जहां-तहां बकरी और दूसरी पशुओं के कंकाल दिखते हैं। भागते हुए भूखे लोगों के समूहों के तंबू जगह-जगह लगे दिखते हैं, और रास्तों में भी वे पैसा कमाने की कोशिश में हैं, ताकि भूखे बच्चों को कुछ खिला सकें।



चार दशक में आए सबसे भीषण सूखे की वजह जलवायु परिवर्तन बताया जा रहा है। ज्यादा स्पष्ट शब्दों में कहें, तो समृद्ध देशों का कार्बन उत्सर्जन सोमालिया के बच्चों को मार रहा है। प्रोटीन के अभाव में 14 साल की एक लड़की सबरीन उमर की त्वचा पीली पड़ गई है,  उसके बाल भी पीले हैं और झर रहे हैं, जबकि पूरे शरीर में पानी भर गया है।


'बच्ची को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता', 27 साल की उसकी मां अमीना बताती है, जो पहले ही अपने तीन बच्चों को खो चुकी है। इस परिवार के पास पहले 100 बकरियां थीं, लेकिन सब मर गईं। अब उन्हें खाने को तभी मिलता है, जब अमीना या उसके पति को काम मिलता है। जब उन्हें नकदी मिलती है, जो कभी दो डॉलर से अधिक नहीं होती, तो वे दिन में एक बार चावल और मसले हुए टमाटर खाते हैं। चूंकि उनके पास प्रोटीन के लिए पैसे नहीं हैं, ऐसे में, सबरीन के रूप में उन्हें अपनी चौथी संतान भी खोनी पड़ सकती है।

सबरीन को सैकड़ों हजार से गुणा करने पर ही सोमालिया की असली तसवीर सामने आएगी। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े बताते हैं कि अकाल के घनीभूत होते ही जुलाई तक 18 लाख सोमालियाई बच्चे भीषण कुपोषण का सामना करेंगे। शिकागो में बेरसो कंपनी सबसे महंगा पॉपकॉर्न बेचती है, जिसके एक बड़े टीन की कीमत 2,500 डॉलर है। जबकि प्लंपी नट का एक पैकेट, जो मूंगफली का पेस्ट होता है और कुपोषण से जूझती आबादी के लिए रामबाण है, 38 सेंट्स में आता है। दिन भर में दो या तीन पैकेट कुपोषण से जूझते एक बच्चे के लिए काफी है। लेकिन सोमालिया को सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि शांति भी चाहिए। कट्टर इस्लामी समूह अल-शवाब सरकार से लड़ाई रहा है, और युद्ध व भूख के कारण लगभग 38 लाख सोमालियाई नागरिकों को देश से भागना पड़ा है।

मैं संयुक्त राष्ट्र के एक विमान से सोमालिया की राजधानी मोगादिशु हवाई अड्डे पर उतरता हूं। हवाई अड्डे के आसपास का इलाका पूरी तरह सुरक्षित है और मदद पहुंचाने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठनों के लोग यहीं रहते हैं। इस सुरक्षित इलाके से बाहर निकलना जोखिम भरा है। अंतरराष्ट्रीय मददगार संगठन से जुड़े एक व्यक्ति ने मुझे बताया कि वह तीन साल से सोमालिया में है, लेकिन इस सुरक्षित इलाके से मोगादिशु में घूमने के लिए सिर्फ एक बार निकला है। एक बख्तरबंद गाड़ी में बाहर निकलते हुए, जिसमें अनेक सुरक्षाकर्मी थे, मैं सोचने लगा कि एक नोटबुक के साथ बाहर निकलते हुए मेरे साथ जब इतनी सुरक्षा है, तो ग्रामीण इलाकों में मदद पहुंचाने का काम कितना जोखिम भरा होगा।

यूक्रेन में चल रहा युद्ध भी सोमालिया के बच्चों को मार रहा है। सोमालिया में गेहूं का 90 फीसदी आयात रूस या यूक्रेन से होता है। युद्ध से सिर्फ तमाम खाद्य पदार्थों और खाद की कीमत ही नहीं बढ़ी है, बल्कि इससे सोमालिया में मानवीय मदद का काम भी बहुत प्रभावित हुआ है। यूनिसेफ का आकलन है कि कुपोषण दूर करने की लागत प्रति बच्चा रोजाना 15 सेंट और सालाना 55 डॉलर है। अमेरिका में एक कुत्ते पर रोज औसतन दो डॉलर का डॉग फूड खर्च होता है। मैं कुत्ते पालने वाले अमेरिकियों को शर्मिंदा नहीं कर रहा, सिर्फ उन्हें याद दिला रहा हूं कि जब हमारे कुत्ते खा रहे हैं, तब सोमालिया के बच्चे भूखे रह रहे हैं। भूख बच्चों को सिर्फ मारती नहीं है, उन्हें स्कूल से बाहर करती है और बच्चियों को शादी के लिए मजबूर करती है।

वर्ष 2011 के अकाल में सोमालिया में 2,60,000 बच्चे मारे गए थे। लेकिन सूखे और अकाल के बिना भी यहां बच्चे मरते हैं, जैसे कि 2020 में मारे गए 72,000 बच्चों में से करीब आधे भूख से मरे थे। मोगादिशु के अस्पताल में अपने बीमार बच्चे पर झुकी हुई एक मां कहती है, 'हम पानी का इस्तेमाल सिर्फ खाना बनाने और पीने के लिए करते हैं। नहाने और हाथ धोने के लिए पानी रखना संभव नहीं है।' शायद इसी कारण उसके बच्चे को हैजा हो गया है।

'सोमालिया भूख का वैश्विक केंद्र बन गया है। इस पीढ़ी के बच्चे इस संकट से नहीं उबर पाएंगे', संयुक्त राष्ट्र की अकाल समन्वयक रीना गिलानी कहती हैं। भूखे सोमालियाइयों का इंटरव्यू करते हुए मैं सोचता हूं- अमेरिका में करीब पांच फीसदी चूजे बढ़ने से पहले मर जाते हैं, जबकि सोमालिया में 11 प्रतिशत बच्चे  पांच वर्ष से पहले मर जाते हैं। हम कहते हैं कि सभी जीवन का मोल समान है, लेकिन सोमालिया के बच्चों का जीवन तो मुर्गे से भी बदतर है।  

 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed