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इतना भी मत गिरो

Tue, 20 Aug 2013 08:05 PM IST
अंशुमाली रस्तोगी
अंशुमाली रस्तोगी Updated Tue, 20 Aug 2013 08:05 PM IST
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Fall of indian rupee

क्या भूलूं, क्या याद करूं की तर्ज पर क्या लिखूं, क्या छोड़ दूं जैसे स्थितियां हैं, मेरे सामने। एक मसला निपट नहीं पाता कि दूसरा तैयार हो जाता है। गजब यह है कि मसले में मसला कम, मसाला ज्यादा होता है। मीडिया और बुद्धिजीवी वर्ग जमकर मसाले को भूनते हैं और व्यंग्यकार उसकी खुशबू से ही तृप्त होता रहता है।

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रुपये और डॉलर का मसला कई दिनों से आर्थिक वातावरण को गंभीर किए हुए है। दोनों के बीच होड़-सी लगी है कि कौन कित्ता गिरा सकता है और कौन कित्ता बढ़ा। न रुपया मानने को तैयार है, न डॉलर। हालांकि रुपये का यों गिरते जाना बहुतों को बेचैन कर रहा है, मगर रुपया मस्त है। वो जित्ता नाम गिरकर कमा रहा है, शायद उत्ता बढ़कर नहीं कमा पाता।
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रुपये का गिरना भयंकर-भयंकर खबरों को भी जन्म दे रहा है। खबरिया चैनलों और अखबारों के पन्नों पर रुपये के बहाने महंगाई की भयावहता से जुड़ी कोई न कोई खबर टंगी रहती है। फोकस अब रुपये से कहीं ज्यादा महंगाई पर केंद्रित हो गया है। महंगाई का जिक्र आते ही प्याज, टमाटर, आलू, मिर्च, फूलगोभी को आगे कर दिया जाता है चर्चा व बहस के लिए। लेकिन इत्ती चर्चा या बहस से क्या फायदा? कौन-सा रुपया मान जाएगा और प्याज आंसू निकलवाना बंद कर देगा।
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वैसे सेंसेक्स ने गहरा गोता लगाकर मसले को और भी अधिक मसालेदार बना दिया है। एक ही दिन में दलाल पथ पर हाहाकार मचा दिया। न निवेशक को कहीं का छोड़ा, न दलाल को। अब तो उनके कने चुल्लू भर पानी भी नहीं, डूब सकने के लिए। वैसे सेंसेक्स का ईमान-धर्म कुछ नहीं होता। जब जैसा जी चाहता है, किसी को भी लपेट लेता है। नाजुक इत्ता कि जरा-सी छींक से ढह पड़ता है। मंदी अमेरिका-यूरोप के बाजारों में आती है, और कांप हमारा सेंसेक्स जाता है।

इन सबके बीच सबसे मसालेदार मसला तो टुंडा का पकड़ा जाना है। आज हर कहीं बस टुंडा ही टुंडा है। वैसे मुझे टुंडा की डाइनुमा दाढ़ी बहुत पसंद आई। टुंडा की दाढ़ी में कित्ते बड़े-बड़े तिनके हैं, अब पता लगा। दाऊद और हाजिफ सईद उसी की दाढ़ी में छिपे तिनके हैं। क्या समझे प्यारे!


बहरहाल, मसलों-मसालों के बीच नरेंद्र मोदी ने 272 प्लस सीटों का आश्वासन देकर कांग्रेस को तगड़ा झटका दे दिया है। देखना बाकी है कि 2014 में कौन-सा मसला हकीकत में तब्दील होता है या फिर मसाला ही बनकर रह जाता है।

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