{"_id":"5addd6fc4f1c1b54098b607f","slug":"expectations-from-good-monsoon","type":"story","status":"publish","title_hn":"अच्छे मानसून से उम्मीदें","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया ","slug":"opinion"}}
अच्छे मानसून से उम्मीदें
जयंतीलाल भंडारी
Updated Mon, 23 Apr 2018 06:22 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
जयंतीलाल भंडारी
मौसम विभाग और अन्य वैश्विक मौसम एजेंसियों द्वारा पेश किए गए पूर्वानुमान के मुताबिक, इस साल मानसून सामान्य रहेगा और जून से सितंबर में देश में 96 से 104 फीसदी बारिश होगी। लगातार तीसरे वर्ष सामान्य बारिश की संभावना वाला यह पूर्वानुमान संकटग्रस्त किसानों और अर्थव्यवस्था के लिए सुकून भरा समाचार है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि 90 फीसदी से कम बारिश होती है, तो देश के कई हिस्सों में सूखे के हालात बनने की आशंका रहती है। दूसरी ओर, 110 फीसदी से ज्यादा बारिश होने पर देश के कई हिस्सों में बाढ़ के हालात बनने की आशंका रहती है।
हमारे देश में अच्छा मानसून आर्थिक-सामाजिक खुशहाली का कारण माना जाता है। स्थिति यह है कि आज भी देश की 68 प्रतिशत खेती मानसून पर ही आधारित है। मानसून का प्रभाव न केवल करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है, वरन समाज, कला, संस्कृति और लोक जीवन पर भी इसका सीधा प्रभाव होता है। मानसून की बारिश खरीफ की फसल के लिए वरदान है, तो वर्षा से नदी, तालाब और नहरों को जो जल प्राप्त होता है, वह रबी की फसल का भी आधार होता है।
चूंकि 2014 और 2015 के भयंकर सूखे से किसान अभी तक उबर नहीं पाए हैं, अतः देश की संकटग्रस्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बेहतरी और धान, गेहूं, गन्ना और सोयाबीन समेत तिलहन की फसल के लिए अच्छा मानसून उपयोगी होगा। मानसून अच्छा रहने से महंगाई न बढ़ने के अलावा विकास दर बढ़ने की भी उम्मीद है। किसानों की फसल अच्छी होने से उनकी क्रयशक्ति बढ़ेगी। कच्चे तेल के वैश्विक मूल्य में लगातार वृद्धि होने से पेट्रो उत्पाद महंगे हुए हैं, जो देश के लोगों और अर्थव्यवस्था के लिए नई चुनौती है। ऐसे में, मानसून अच्छा होने पर खाद्य व उत्पादक वस्तुओं की कम कीमतें उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाएगी।
इस समय देश के 91 बड़े जलाशयों में पिछले साल की तुलना में पानी का स्तर 16 फीसदी कम है। यही नहीं, देश के अधिकांश हिस्सों में गर्मी सामान्य से ज्यादा पडऩे के अनुमान हैं। मौसम विभाग द्वारा जल संकट के मद्देनजर देश के जिन 588 जिलों में अध्ययन किया गया, उनमें से 404 जिलों में जल संकट गहरा सकता है और 140 जिलों में अत्यधिक सूखे की स्थिति आ सकती है। ऐसे में, आसन्न जल संकट से निपटने के लिए भी अच्छे मानसून की जरूरत महसूस की जा रही है।
ऐसे में, बेहतर मानसून की संभावनाओं को देखते हुए बारिश के पानी के बेहतर प्रबंधन और उपयुक्त भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। कृषि विकास से संबंधित ऐसे कौशल विकास कार्यक्रम भी चलाने की योजना बनाई जानी चाहिए, जिसके तहत गैर-कृषि ग्रामीण क्षेत्र में आय बढ़ाई जा सके। कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों में ग्रामीण युवाओं की रुचि बहाल किए जाने के प्रयास किए जाने चाहिए।
अच्छे मानसून के पूर्वानुमान के बाद अच्छी बारिश की संभावना और मानसून के अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए अभी से बनाई गई रणनीति जहां देश के करोड़ों किसानों के चेहरे पर मुस्कराहट लाएगी, वहीं अर्थव्यवस्था भी आगे बढ़ेगी। ऐसे में इसके साथ-साथ आने वाले वर्षों में भी किसानों की खुशहाली और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए कृषि और सिंचाई क्षमता बढ़ाने की ऐसी दीर्घकालीन रणनीति बनाना भी जरूरी है, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था मानसून का जुआ ही नहीं बनी रहे।
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
हमारे देश में अच्छा मानसून आर्थिक-सामाजिक खुशहाली का कारण माना जाता है। स्थिति यह है कि आज भी देश की 68 प्रतिशत खेती मानसून पर ही आधारित है। मानसून का प्रभाव न केवल करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है, वरन समाज, कला, संस्कृति और लोक जीवन पर भी इसका सीधा प्रभाव होता है। मानसून की बारिश खरीफ की फसल के लिए वरदान है, तो वर्षा से नदी, तालाब और नहरों को जो जल प्राप्त होता है, वह रबी की फसल का भी आधार होता है।
चूंकि 2014 और 2015 के भयंकर सूखे से किसान अभी तक उबर नहीं पाए हैं, अतः देश की संकटग्रस्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बेहतरी और धान, गेहूं, गन्ना और सोयाबीन समेत तिलहन की फसल के लिए अच्छा मानसून उपयोगी होगा। मानसून अच्छा रहने से महंगाई न बढ़ने के अलावा विकास दर बढ़ने की भी उम्मीद है। किसानों की फसल अच्छी होने से उनकी क्रयशक्ति बढ़ेगी। कच्चे तेल के वैश्विक मूल्य में लगातार वृद्धि होने से पेट्रो उत्पाद महंगे हुए हैं, जो देश के लोगों और अर्थव्यवस्था के लिए नई चुनौती है। ऐसे में, मानसून अच्छा होने पर खाद्य व उत्पादक वस्तुओं की कम कीमतें उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाएगी।
इस समय देश के 91 बड़े जलाशयों में पिछले साल की तुलना में पानी का स्तर 16 फीसदी कम है। यही नहीं, देश के अधिकांश हिस्सों में गर्मी सामान्य से ज्यादा पडऩे के अनुमान हैं। मौसम विभाग द्वारा जल संकट के मद्देनजर देश के जिन 588 जिलों में अध्ययन किया गया, उनमें से 404 जिलों में जल संकट गहरा सकता है और 140 जिलों में अत्यधिक सूखे की स्थिति आ सकती है। ऐसे में, आसन्न जल संकट से निपटने के लिए भी अच्छे मानसून की जरूरत महसूस की जा रही है।
ऐसे में, बेहतर मानसून की संभावनाओं को देखते हुए बारिश के पानी के बेहतर प्रबंधन और उपयुक्त भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। कृषि विकास से संबंधित ऐसे कौशल विकास कार्यक्रम भी चलाने की योजना बनाई जानी चाहिए, जिसके तहत गैर-कृषि ग्रामीण क्षेत्र में आय बढ़ाई जा सके। कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों में ग्रामीण युवाओं की रुचि बहाल किए जाने के प्रयास किए जाने चाहिए।
अच्छे मानसून के पूर्वानुमान के बाद अच्छी बारिश की संभावना और मानसून के अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए अभी से बनाई गई रणनीति जहां देश के करोड़ों किसानों के चेहरे पर मुस्कराहट लाएगी, वहीं अर्थव्यवस्था भी आगे बढ़ेगी। ऐसे में इसके साथ-साथ आने वाले वर्षों में भी किसानों की खुशहाली और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए कृषि और सिंचाई क्षमता बढ़ाने की ऐसी दीर्घकालीन रणनीति बनाना भी जरूरी है, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था मानसून का जुआ ही नहीं बनी रहे।