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जलवायु परिवर्तन: नया बजट और पर्यावरणीय चिंताएं, सकारात्मक नतीजों के लिए धरातल पर काम जरूरी

Fri, 02 Aug 2024 07:47 AM IST
Seema Javed सीमा जावेद
Updated Fri, 02 Aug 2024 07:47 AM IST
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सार
पहली बार जलवायु परिवर्तन से जुड़े हर पहलू को बजट में शामिल किया गया है और उद्योगों में कार्बन फुट प्रिंट कम करने की बात की गई है।
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every aspect related to climate change has been included in the budget For the first time
निर्मला सीतारमण - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

जलवायु परिवर्तन आज भारत के लिए एक हकीकत बन चुकी है। देश में एक तरफ गर्मी के रिकॉर्ड टूट रहे हैं, दूसरी तरफ  बिहार, असम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, केरल जैसे राज्य बाढ़ और भूस्खलन की तबाही का सामना कर रहे हैं। मुंबई में हर दिन झमाझम बारिश हो रही है, वहीं उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में बारिश न होने के कारण धान के पौधे खेतों में मुरझा कर सूख रहे हैं।


ऐसे में भारत का 2024 का केंद्रीय बजट जलवायु परिवर्तन से निपटने और टिकाऊ विकास के लिए कई राहें निकालने के प्रति तत्पर दिख रहा है। इसके लिए बजट में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (जो थर्मल एनर्जी पर निर्भरता को कम करने में मददगार होगा), पंप्ड स्टोरेज परियोजना (जो नवीनीकृत ऊर्जा को बिजली ग्रिड में एकीकृत करने में मददगार होगी), क्रिटिकल मिनरल मिशन (इसके तहत लिथियम, तांबा, कोबाल्ट और रेयर अर्थ मिनरल जैसे पच्चीस महत्वपूर्ण खनिजों को सीमा शुल्क से पूरी तरह छूट दी जाएगी), उन्नत ताप विद्युत संयंत्र (थर्मल पावर उत्पादन में उच्च दक्षता के लिए उन्नत अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल, एयूएससी, प्रौद्योगिकी का उपयोग) जैसे अनेक आयाम इसमें समाहित हैं।


यह कहना गलत नहीं होगा कि पहली बार इतनी बारीकी से जलवायु परिवर्तन से जुड़े हर पहलू को बजट में शामिल किया गया है। भारतीय लघु और कुटीर उद्योगों में कार्बन फुट प्रिंट कम करने के लिए 60 पारंपरिक लघु और कुटीर उद्योगों के समूहों में ऊर्जा जांच और स्वच्छ ऊर्जा अपनाने के लिए बजट में वित्तीय सहायता प्रदान करने की बात कही गई है।

कुल मिलाकर, बजट में नवीकरणीय ऊर्जा, बुनियादी ढांचे के विकास और नवाचार पर ध्यान देने से भारत ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक नेता के रूप में उभर कर सामने आएगा। यह बात इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है कि कुछ महीनों बाद ही आगामी 11-22 नवंबर में संयुक्त राष्ट्र का जलवायु परिवर्तन महासम्मेलन अजरबैजान, ब्राजील में होने जा रहा है। इस साल जिस तरह से गर्मी के रिकॉर्ड टूट रहे हैं, उसके मद्देनजर हर देश से यह अपेक्षा होगी कि वह अपनी उत्सर्जन कटौतियों में कुछ नया करे। भारत इस मामले में हमेशा से अग्रणी रहा है और बजट की रूपरेखा से लगता है कि एक बार फिर वह दुनिया का मार्गदर्शन करने को तैयार है।

वैश्विक ऊर्जा थिंक टैंक एम्बर की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के भारी उद्योगों के अनुमानित कार्बन उत्सर्जन के 17 फीसदी को नवीकरणीय ऊर्जा आधारित विद्युतीकरण से 2030 तक कम किया जा सकता है। यह रिपोर्ट यूरोपीय संघ के साथ कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) के अनुपालन के लिए भारत की रणनीतियों को रेखांकित करती है। सीबीएएम एक नियामक ढांचा है, जो यूरोपीय संघ में आयात पर कार्बन शुल्क लगाता है। लेकिन भारत के लघु और कुटीर उद्योग उसकी रीढ़ की हड्डी हैं और बजट ने सीबीएएम लागू होने से पहले स्वच्छ ऊर्जा में उनके रूपांतरण और कार्बन फुट प्रिंट को कम करने की तरफ तवज्जो देने का सराहनीय कदम उठाया है।

इसके साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा के लिए रूफटॉप सौर पैनल, पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं से लैस होकर उन्नत ताप विद्युत संयंत्र के जरिये थर्मल पावर के कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में वह कदम बढ़ाता दिख रहा है। लगता है कि नवीकरणीय ऊर्जा में भारत की प्रगति दुनिया भर के लिए एक मानक स्थापित करेगी, जो स्वच्छ और हरित ग्रह की ओर सामूहिक कार्रवाई को प्रेरित करेगी।

इस बजट में परमाणु ऊर्जा विकास के लिए स्मॉल रिएक्टर और भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर विकसित करने के लिए निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी की योजना बनाई गई है। हालांकि परमाणु ऊर्जा विकास को लेकर विशेषज्ञ अतीत की घटनाओं के चलते अभी सशंकित हैं। लेकिन भारत के भारी उद्योगों को 2030 तक अपनी ऊर्जा खपत को पूरी तरह से डीकार्बोनाइज करने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए 120 गीगावॉट की समर्पित रिन्यूबल एनर्जी क्षमता की आवश्यकता होगी। परमाणु ऊर्जा विकास ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लिए भी बजटीय आवंटन 100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 600 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

पिछले साल भारत में 80 फीसदी से ज्यादा सीमांत किसानों को जलवायु परिवर्तन के चलते हुई घटनाओं के कारण फसलों का नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे में जलवायु के अनुकूल कृषि के लिए सरकार 109 ज्यादा उपज देने वाली, मौसमी बदलाव को सहने वाली फसल किस्मों को जारी करेगी और एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।  
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