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पर्यावरण : क्या गर्मी तोड़ेगी अब तक के सारे रिकॉर्ड, इस आशंका का यह है आधार

Wed, 05 Mar 2025 07:39 AM IST
Seema Javed सीमा जावेद
Updated Wed, 05 Mar 2025 07:39 AM IST
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सार
फरवरी 2025 भारत में पिछले 125 वर्षों में सबसे गर्म था। अप्रैल से जून तक हीटवेव का लंबा दौर चलने की आशंकाएं जताई जा रही हैं।
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Environment: Will heat break all the records so far?
गर्मी - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

विस्तार

नोडल मौसम एजेंसी, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, वर्ष 2025 में अप्रैल से मई तक आसमान से आग बरसने की आशंका है। एजेंसी के अनुसार, फरवरी 2025 भारत में पिछले 125 वर्षों में सबसे गर्म था। मौसम वैज्ञानिक पहले से ही कह रहे हैं कि इस साल भारत को एक बार फिर तीव्र और लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव के चरम गर्मी, उमस और लू के मौसम का सामना करना पड़ेगा, जिससे इसके सबसे गर्म साल बनने की प्रबल आशंका है।



पिछले कुछ वर्षों में औसत तापमान में जो क्रमिक वृद्धि हुई है, उसमें जलवायु परिवर्तन की भूमिका से इन्कार नहीं कर सकते। ग्लोबल वार्मिंग ने भारत में सर्दियों की बारिश को भी प्रभावित किया है। गर्मियों का मौसम बड़ा हो गया है और सर्दियों का मौसम छोटा। वर्षा के अनियमित पैटर्न ने पूरे देश में तापमान प्रोफाइल को प्रभावित किया है। जलवायु परिवर्तन दुनिया भर में मौसम और जल विज्ञान, दोनों की चरम सीमाओं को बढ़ा रहा है, जिसके चलते लगातार चरम मौसमी घटनाएं हो रही हैं। वर्तमान में, सभी महाद्वीपों में सामान्य से अधिक तापमान देखा जा रहा है, जो अपेक्षाकृत एक समान ग्लोबल वार्मिंग पैटर्न का संकेत देता है। जब तक हम ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में तेजी से कटौती नहीं करते, मौसम के रिकॉर्ड लगातार टूटते रहेंगे। आईएमडी के आंकड़ों से पता चला है कि फरवरी 2025 में सामान्य की तुलना में आधे से भी कम वर्षा हुई। गौरतलब है कि भारत में साल की शुरुआत में ही हीटवेव का दौर शुरू हो गया है। खास तौर पर पश्चिमी तट, तटीय महाराष्ट्र और गोवा के कुछ हिस्सों में लू के हालात बने।


तटीय शहर मुंबई में 25 और 26 फरवरी को हीटवेव की चेतावनी जारी की गई। 26 फरवरी को मुंबई में अधिकतम तापमान 38.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य औसत से 5.9 डिग्री अधिक था। इन क्षेत्रों में पारा 37 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया है। इस बीच, कर्नाटक और गुजरात के तटीय भागों में भी गर्म और उमस भरा मौसम रहा। यहां तापमान लू की दहलीज को छूने से बस कुछ ही दूर रहा और 35 डिग्री सेल्सियस से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।

क्लाइमेट शिफ्ट इंडेक्स (सीएसआई) के अनुसार, गोवा के पणजी में 25-27 फरवरी के तापमान में  कम से कम पांच गुना अधिक वृद्धि हुई है। इसी तरह, इसी अवधि में मुंबई के तापमान में कम से कम तीन गुना अधिक वृद्धि हुई। सीएसआई एक ऐसी प्रणाली है, जो दुनिया भर में स्थानीय दैनिक तापमान पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को मापती है।

जलवायु परिवर्तन के चलते गर्मी, सर्दी और बरसात-सभी मौसम के पैटर्न में भारत में दीर्घकालिक बदलाव आ रहे हैं। जलवायु से जुड़ी आपदाएं साल दर साल विकराल रूप लेती जा रही हैं। जर्मन वॉच द्वारा जारी क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स 2025 के अनुसार, 1993 से 2022 के बीच भारत ने 400 से अधिक चरम मौसमी घटनाओं का सामना किया, जिसके चलते 80,000 लोगों की मौत हुई और 180 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ। यह दुनिया भर में ऐसी घटनाओं से होने वाली मौतों का 10 फीसदी और कुल आर्थिक क्षति का 4.3 फीसदी हिस्सा है।
हीटवेव की वजह से भारत में अन्य प्राकृतिक आपदाओं की तुलना में अधिक लोगों की मौत हुई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2019 और 2020 के बीच हीटवेव के कारण मृत्यु दर में 62.2 फीसदी की वृद्धि हुई है। आईएमडी द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में 2024 की गर्मियों के दौरान 536 हीटवेव दिवस देखे गए। ये 2010 के बाद से सबसे अधिक हैं। और अब देखना है कि इस साल ऐसे कितने चरम गर्मी और उमस से भरे दिनों का सामना देश के लोगों को करना पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में गर्मी का कहर राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों सहित देश के अधिकांश हिस्सों पर टूटना शुरू होता दिख रहा है।

हीटवेव की स्थिति आम तौर पर मार्च और जून के बीच पैदा होती है और कुछ दुर्लभ मामलों में जुलाई तक भी जारी रहती है। भारत में तटीय क्षेत्रों के लिए हीटवेव तब घोषित की जाती है, जब अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस या उससे ज्यादा हो, बशर्ते वास्तविक अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मौजूदा गर्म मौसम बारिश की अत्यधिक कमी वाले सर्दियों के मौसम का परिणाम है, जो जलवायु परिवर्तन की देन है।

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