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सुधारों से बदलेगा आर्थिक परिदृश्य

Wed, 02 Jan 2019 07:35 PM IST
जयंतीलाल भंडारी जयंतीलाल भंडारी
जयंतीलाल भंडारी Published by: जयंतीलाल भंडारी Updated Wed, 02 Jan 2019 07:35 PM IST
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Economic scenario will change with reforms
जयंतीलाल भंडारी

बाजार में बेहतर मांग की बेहतर स्थिति, जीएसटी की सरलता, बुनियादी ढांचा क्षेत्र में किए गए निवेश से क्षमता विस्तार, आर्थिक सुधारों से होने वाले सकारात्मक प्रभाव, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और सार्वजनिक बैंकों की कर्ज देने की क्षमता में वृद्धि के कारण इस साल आर्थिक वृद्धि में तेजी रहने की संभावना है। कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्टों में कहा गया है कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद इस वर्ष भारत का आर्थिक परिदृश्य बेहतर होगा और जीडीपी का आकार बढ़ेगा।


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देश की अर्थव्यवस्था लोकसभा चुनाव के बाद बनने वाली सरकार के आर्थिक कदमों से प्रभावित होगी। नए वर्ष को कई चुनौतियां भी मिली हैं। सबसे बड़ी चुनौती कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की है। दिसंबर तक ऊंचाई पर पहुंच गए राजकोषीय घाटे को पाट पाना मुश्किल है। जीएसटी संग्रह लक्ष्य से करीब एक लाख करोड़ रुपये कम है। विनिवेश लक्ष्य प्राप्ति से दूर है। तेल सब्सिडी व अनाज सब्सिडी का अतिरिक्त बोझ है। इस साल राजकोषीय घाटा निर्धारित लक्ष्य से कुछ अधिक जीडीपी के 3.5 प्रतिशत पर पहुंच सकता है।
 
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में किसानों की कर्जमाफी की कांग्रेस की घोषणा के बाद मोदी सरकार पर भी किसानों की कर्जमाफी का दबाव बना है। इससे केंद्र पर चार लाख करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा, जिसका अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर होगा। पिछले साल सरकार ने कृषि, उद्योग, कारोबार एवं निर्यात क्षेत्र को जो राहतें दी हैं, उनसे अर्थव्यवस्था को लाभ होगा। ऐसे ही विलासिता की वस्तुओं को छोड़ जरूरी इस्तेमाल की 99 फीसदी वस्तुओं को 18 फीसदी या इससे कम वाली जीएसटी स्लैब में रखे जाने से उद्योग-कारोबार को लाभ होगा। बीते साल प्रत्यक्ष कर संग्रह 18 प्रतिशत बढ़कर 10.02 लाख करोड़ रुपये से अधिक हुआ है, इस साल इसमें और बढ़ोतरी होगी। आयकर रिटर्न की संख्या बढ़कर सात करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। दुनिया की छठी बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके भारत में कॉरपोरेट आय, सार्वजनिक निवेश और विदेशी निवेश बढ़ने की भी संभावना है। नई कृषि निर्यात नीति के कारण कृषि निर्यात बढ़ेगा। बैंकिंग घोटाला रोकने के लिए लागू किए गए कानूनों से बैंकिंग सुधार होगा। उद्योग-कारोबार और प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में बीते साल हुए सुधार का भारत को लाभ मिलेगा।
 
इस साल उद्योग-कारोबार के लिए जीएसटी को और सरल बनाना होगा। टैक्स रिफंड के लिए मैन्युअल रिकॉर्ड और प्रक्रिया की बड़ी खामी दूर करनी होगा। जीएसटी पोर्टल को अधिक कार्यक्षम बनाना होगा। जीएसटी की स्लैब को चार से घटाकर तीन किए जाने पर जो फैसला हुआ है, उसे अमली जामा पहनाना होगा। सरकार को सुनिश्चित करना होगा कि आयकर एवं प्रत्यक्ष कर पर गठित नया कार्यबल तय समय में अपनी रिपोर्ट उसे सौंप दे।

नए साल में बेनामी संपत्ति पर जोरदार चोट करनी पड़ेगी, काले धन का बकाया इलाज पूरा करना होगा, अर्थव्यवस्था को डिजिटल करने की रफ्तार बढ़ानी होगी, कृषि की हालत सुधारने के लिए जारी की गई रणनीति के कार्यान्वयन की दिशा में आगे बढ़ना होगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम को नरम करने, अनुबंध खेती को बढ़ावा देने, बेहतर मूल्य के लिए वायदा कारोबार को प्रोत्साहन देने, कृषि उपज की नीलामी के लिए न्यूनतम आरक्षित मूल्य लागू करने, शीतगृहों के निर्माण में वित्तीय सहायता देने जैसे कदमों से कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

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