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क्रांतिकारी आंदोलन की दुर्गा भाभी: आजाद भारत में उन्हें आदर और उपेक्षा, दोनों का सामना करना पड़ा

सुधीर विद्यार्थी Updated Sun, 13 Oct 2019 01:53 AM IST
Durgawati Devi (File Photo)
Durgawati Devi (File Photo) - फोटो : सोशल मीडिया
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लखनऊ में पुराने किले पर एक प्रतिष्ठित शिक्षा संस्था है लखनऊ मांटेसरी इंटर कॉलेज, जिसकी नींव प्रसिद्ध क्रांतिकारी दुर्गा भाभी ने आजादी के बाद रखी थी। लखनऊ वह 1940 में ही आ गई थीं। मॉडल हाउस के बीच का हिस्सा उन्होंने किराये पर ले लिया था और कैंट रोड पर पांच बच्चों को लेकर ‘लखनऊ मांटेसरी’ की स्थापना की थी। वह स्कूल ही आज लखनऊ मांटेसरी इंटर कॉलेज के नाम से जाना जाता है।
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क्रांतिकारी आंदोलन में भाभी अपने पति भगवतीचरण वोहरा के साथ सक्रिय थीं। वे दोनों चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व वाले ’हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र संघ’ के शीर्ष सदस्यों में शुमार थे। भगवतीचरण को मुक्तयुद्ध के लिए चलाए जा रहे सशस्त्र क्रांतिकारी संग्राम का मस्तिष्क कहा जाता था। क्रांतिकारी दल को भगवती भाई भरपूर आर्थिक मदद भी देते थे। ‘साइमन कमीशन’ के विरोध में लाला लाजपत राय पर लाठियां चलाने वाले पुलिस अफसर सांडर्स को मारने के बाद भगत सिंह अपने केश कटवाकर सिर पर हैट लगाए भाभी के तीन वर्षीय बेटे शची को गोद में लेकर कोलकाता निकल गए थे।

ब्रिटिश सरकार के जन विरोधी कानूनों के विरोध में भगत सिंह ने आठ अप्रैल, 1929 को सेंट्रल एसेंबली में बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर बम विस्फोट किया था। कौन जाने कि उस अभियान पर जाने से पहले दिल्ली के निकाेल्सन पार्क में भाभी और सुशीला दीदी ने अपने रक्त से तिलक कर उन्हें अंतिम विदाई दी थी। उसके बाद भगत सिंह वाले मुकदमे में गिरफ्तार क्रांतिकारियों की मदद के लिए चंदा मांगने वाली चालीस-पचास महिलाओं में भाभी भी शामिल रहती थीं। संकट के समय भाभी यहां से वहां संदेश पहुंचाने का काम बड़ी सतर्कता से करती रहीं।
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