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सपने देखो तो मोदी जी जैसे
प्रवीण कुमार सिंह
Updated Mon, 18 Aug 2014 06:39 PM IST
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मेरे अच्छे दिन का सपना कब पूरा होगा, कोई नहीं बताता। अच्छे दिन यानी एक अदद नौकरी। जिससे अपनी समस्या बताओ, वही एक और सपना दिखाने लगता है। वर्षों से नौकरी का फॉर्म भरते हुए सपने देखता रहा कि शानदार नौकरी लग गई है, कल जॉइन करना है। न नौकरी मिली, न वह कल आया। फिर नौकरी के सपने आना बंद हो गया। घरवाले उठते-बैठते बुदबुदाने लगे, हे भगवान, तुम्हारा क्या होगा? नौकरी नहीं मिली, तो तुम्हारी शादी कैसे होगी? हमारे दादा-दादी बनने का सपना कब पूरा होगा? यानी मेरी नौकरी के साथ उनके भी सपने जुड़े थे।
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सपनों को टूटते देख मैं टूटने लगा था। लेकिन मोदी जी की दिलेरी देख मेरा आत्मविश्वास लौटने लगा है। उनके अमेरिका जाने का सपना, न जाने कितनी बार टूटा। अमेरिका वालों ने उन्हें वीजा देने से इन्कार कर दिया था। लेकिन मोदी जी ने अमेरिका के सपने को मरने नहीं दिया। नतीजा यह है कि अब वही अमेरिका वाले उन्हें आदर के साथ ले जाने को तैयार हैं।
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मोदी जी के अच्छे दिन आए हैं, तो देश के अच्छे दिन भला कैसे नहीं आएंगे? एफडीआई आने वाले अच्छे दिनों की कुंजी है। इससे देश का भी विकास होगा और हमारा भी। कुछ साल पहले तक हमारी जेब में या तो अठन्नी होती थी या कटे-फटे नोट। अब इन्हीं जेबों में डॉलर और यूरो रख हम शान से घूमेंगे।
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बचपन में बुलेट मोटर साइकिल की दनदनाती आवाज बहुत अच्छी लगती थी। वह बुलेट तो दुर्लभ हो गई, लेकिन मोदी जी के कारण बुलेट ट्रेन का सपना साकार होने वाला है। तीन सौ किलोमीटर की रफ्तार से चलेगी। जो नासपीटे बोल रहे हैं कि हमारी पटरी उस लायक नहीं है, उन्हें बताना चाहिए कि एफडीआई के जरिये पटरी विदेश से आएगी। किराया तो बढ़ेगा ही, पर घटती कौन-सी चीज है, जो इसका रोना रोएं? कोई स्वर्गयान तो है नहीं कि फ्री में बैकुंठ जाओगे।
हम मामूली लोग सपने भी मामूली देखते हैं। वही आलू-प्याज-टमाटर का सपना। सपना देखो, तो मोदी की तरह देखो। विनिवेश और एफडीआई से हिंदुस्तान की तरक्की के देखो।