ढलान पर द्रविड़ पार्टियां
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तमिलनाडु में सत्तारूढ़ पार्टी अन्नाद्रमुक में भारी भ्रम की स्थिति है। पार्टी के दो वरिष्ठ नेता शशिकला और दिनाकरन जेल में हैं। ऐसे में पार्टी कैसे चलेगी? आगामी राष्ट्रपति चुनाव में अन्नाद्रमुक भाजपा प्रत्याशी को समर्थन देगी या विपक्षी उम्मीदवार को, इसका फैसला कौन करेगा? अन्नाद्रमुक नेताओं के घरों पर सीबीआई और आयकर विभाग के छापे यह खुलासा करते हैं कि जयललिता के जीवनकाल के दौरान ऐसे शर्मनाक घोटाले भी हो रहे थे, और वह खुद भी उसका एक हिस्सा थीं। अपने नेतृत्व के बूते वह पार्टी नेताओं पर नियंत्रण रखती थीं। लेकिन इन सवालों का जवाब भ्रमित करने वाला है। अन्नाद्रमुक के आंतरिक कलह से किसे फायदा होगा, द्रमुक को या भाजपा को? बताया जाता है कि तमिलनाडु में हिंदुत्व वोट 40 फीसदी है। ऐसे में केवल मोदी का करिश्मा ही भाजपा को तमिलनाडु में केंद्र में ला सकता है।
सबसे पहला सवाल है कि क्या 'दो पत्ती' चुनाव चिह्न को बचाने के लिए अन्नाद्रमुक के दोनों धड़े-ओ पन्नीरसेलवम गुट और मुख्यमंत्री पलानीस्वामी गुट के बीच विलय होगा। दोनों गुटों के बीच सुलह की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि पन्नीरसेलवम का गुट शशिकला और दिनाकरन के अपने पदों से इस्तीफा देने पर अडिग है।
ओ पन्नीरसेलवम गुट आगामी जून में चेन्नई में एमजीआर का शताब्दी समारोह मनाने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, पार्टी के 60 फीसदी कार्यकर्ता पन्नीरसेलवम गुट के साथ हैं। ओ पन्नीरसेलवम के एक करीबी सूत्र ने बताया कि हम और कार्यकर्ताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं और जुलाई, 2017 में पंचायत चुनाव लड़ेंगे, तब तक हम विलय-वार्ता में अपनी ऊर्जा नहीं खपाना चाहते।
हाल ही में ओ पन्नीरसेलवम चेन्नई में कांग्रेस से अलग हुए एक मजबूत धड़े तमिल मनिला कांग्रेस के नेता जीके वासन से मिले। इन दोनों नेताओं ने जुलाई में होने वाले पंचायत चुनाव के लिए संभावित चुनावी गठबंधन पर बातचीत की, जिसमें उन दोनों के धड़ों के साथ ही विजयकांत की डीएमडीके, एस रामदौस की पीएमके, वायको की एमडीएमके और प्रदेश भाजपा की इकाई के शामिल होने की संभावना है। यह महागठबंधन द्रमुक मोर्चे को कड़ी टक्कर देगा। इसके साथ ही पन्नीरसेलवम इडापट्टी पलानीस्वामी गुट को पूरी तरह से हाशिये पर ले जाने का इच्छुक है।
इन पंक्तियों के लेखक से बात करते हुए अन्नाद्रमुक के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि हमारी परिस्थितियां बहुत कठिन हैं। इडापट्टी गुट वार्ता के लिए अपने आप पहल नहीं करेगा। हम कुछ मुद्दों पर सार्वजनिक तौर पर इडापट्टी गुट की प्रतिक्रिया जानना चाहते हैं। एक, तमिलनाडु सरकार को जयललिता की मौत की सीबीआई जांच का आदेश देना चाहिए। दूसरा, शशिकला और दिनाकरन अपना इस्तीफा सौंपें और यह मीडिया में प्रकाशित हो। ओ पन्नीरसेलवम गुट का कहना है कि इन दोनों मुद्दों पर पिछले दस दिनों में पलानीस्वामी खेमे ने फैसले से संबंधित अपनी प्रतिक्रिया देने में रुचि नहीं दिखाई है।
जब इडापट्टी पलानीस्वामी गुट के शीर्ष अन्नाद्रमुक नेता जेल में हैं, तो दूसरे दर्जे के नेता कैसे विलय की बात कर सकते हैं। यह इडापट्टी पलानीस्वामी गुट की ओर से उचित मांग है। पलानीस्वामी गुट पिछले तीन दिनों से चुनाव आयोग को सौंपे जाने वाले हलफनामे पर हस्ताक्षर कराने के लिए जिला सचिवों की बैठक कर रहा है। हलफनामे से स्पष्ट संकेत है कि दोनों गुटों के बीच विलय नहीं होने जा रहा है, क्योंकि पलानीस्वामी गुट के जिला सचिव अब भी शशिकला और दिनाकरन के प्रति अपनी निष्ठा जता रहे हैं। पन्नीरसेलवम गुट ने हलफनामा देखा है, जिससे लगता नहीं कि इस नकारात्मक माहौल में विलय की कोई बात हो पाएगी।
सूत्रों का यह भी कहना है कि ओ पन्नीरसेलवम गुट आगामी आठ और नौ जून को चेन्नई के निकट अन्नाद्रमुक के संस्थापक नेता एमजीआर की जन्म शताब्दी समारोह का आयोजन करने वाला है। पन्नीरसेलवम इस आयोजन की तैयारियों में व्यस्त हैं। पन्नीरसेलवम गुट के नेताओं ने एमजीआर की जयंती से पहले पूरे तमिलनाडु की यात्रा की योजना बनाई है। इससे न केवल यह सुनिश्चित होगा कि अन्नाद्रमुक के कार्यकर्ता सक्रिय हैं, बल्कि जयललिता के कट्टर समर्थकों की प्रतिक्रिया भी जानने को मिलेगी।
सूत्रों ने इस बात की भी पुष्टि की कि अगर पन्नीरसेलवम को फिर से शासन करने का मौका मिलता है, तो बहुमत साबित करने का खतरा हमेशा उनके साथ रहेगा। शशिकला का परिवार पन्नीरसेलवम का आदेश नहीं मानेगा। इसी जोखिम के लिए हम अन्नाद्रमुक कार्यकर्ताओं और वोटरों का सामना कर रहे हैं। पूरे तमिलनाडु के इस दौरे से पन्नीरसेलवम को अपनी स्थिति का आभास हो जाएगा। सूत्रों ने यह भी बताया कि एक बार विलय वार्ता विफल होने के बाद इंतजार कर रहे पलानीस्लामी गुट के आधे से ज्यादा लोग पन्नीरसेलवम के साथ आ जाएंगे, ऐसे में अन्नाद्रमुक सरकार अल्पमत में आ जाएगी और बहुत संभव है कि सरकार गिर जाएगी।
दिनाकरन की गिरफ्तारी पन्नीरसेलवम गुट के लिए एक उपहार की तरह आई, लेकिन उप महासचिव पद से उसके इस्तीफा नहीं देने के कारण सारा उत्साह ठंडा पड़ गया। तमिलनाडु की राजनीति पर नजर रखने वाले पंडितों का भी अनुमान है कि दस वर्षों में द्रविड़ आंदोलन के समाप्त होने की संभावना है। ईवी रामास्वामी, नायकर, अन्नादुरई, करुणानिधि जैसे द्रविड़ आंदोलन के कद्दावर नेता परिदृश्य से गायब हो गए हैं। ऐसे में यही कहा जा सकता है कि राज्य की राजनीति ठहर-सी गई है। यदि अन्नाद्रमुक के दोनों के गुटों के बीच सुलह नहीं होती है, तो राज्य राष्ट्रपति शासन के हवाले हो सकता है। जाहिर है, इससे भाजपा और मोदी की छवि को फायदा होगा। पर इस मामले में कोई भी हलचल जुलाई के बाद ही दिखेगी, क्योंकि केंद्र राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही कोई राजनीतिक कदम उठाएगा।