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बुरे व्यक्ति से घृणा नहीं, प्रेम करो
शिवकुमार गोयल
Updated Wed, 28 Aug 2013 07:23 PM IST
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जेन संत बेनजोई ने अपना जीवन बालकों और किशोरों को शिक्षा देने और संस्कारित करने के काम में समर्पित किया था। वह आश्रम में अपने शिष्यों के साथ रहकर उन्हें शिक्षित किया करते थे। वह कहा करते थे, सभी से प्रेम करो। असहायों की सेवा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
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एक दिन आश्रम में रहनेवाला एक लड़का चोरी करता हुआ पकड़ा गया। संत ने उसे चोरी की बुराइयों से अवगत कराया और क्षमा कर दिया। पहले से ही बिगड़ैल उस लड़के ने दोबारा चोरी की। अन्य शिष्य उसे पकड़कर फिर गुरु के पास ले गए। संत ने उसे पुनः क्षमा कर दिया।
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यह देखकर शिष्यों ने उत्तेजित होकर कहा, यह बार-बार चोरी करता रहेगा और आप उसे माफ करते रहेंगे। यदि ऐसा है, तो हम आश्रम छोड़कर जाने पर मजबूर हो जाएंगे।
संत विनम्रता से बोले, मैंने माना कि तुम सब अच्छे हो, संस्कारी हो, लेकिन यह अबोध किशोर अपने दुर्व्यसनी पिता और भाइयों द्वारा ठुकराया हुआ है। इसे मैं सुधारने, संस्कारित करने के उद्देश्य से यहां लाया हूं। मैं यह जानता हूं कि तुम सब यदि मेरे आश्रम से चले गए, तो अन्य किसी शिक्षक से शिक्षा प्राप्त कर सकते हो, किंतु इस बिगड़ैल लड़के को कौन अपने यहां रखेगा? इसे सुधरने का मौका कैसे मिलेगा?
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उस किशोर ने संत के वाक्य सुने, तो उसकी आंखें छलछला आईं। उसने सबके सामने कभी चोरी न करने की प्रतिज्ञा की।