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ग्रीनलैंड और ट्रंप: एक देश पर नियंत्रण के पक्ष और विपक्ष में..

Mon, 19 Jan 2026 07:24 AM IST
लव गौर अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: लव गौर Updated Mon, 19 Jan 2026 07:24 AM IST
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सार
आठ यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाकर ट्रंप ने जाहिर किया है कि वह ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे को लेकर किस कदर गंभीर हैं। आर्कटिक क्षेत्र में जिस तरह से महाशक्तियों के हित गुंथे दिख रहे हैं, उसमें देखना होगा कि कहीं हम शीतयुद्ध के अगले दौर की तरफ तो नहीं बढ़ रहे?
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Donald Trump is serious about gaining US control over Greenland
डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : ANI

विस्तार

वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले पर बहस अभी थमी भी नहीं थी कि अब ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण को लेकर डोनाल्ड ट्रंप जिस तरह से आमादा दिख रहे हैं, उससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तो हलचल मची ही है, आधुनिक वैश्विक राजनीति में भी एक नए किस्म के उपनिवेशवाद पर चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। ट्रंप टैरिफ को अपना पसंदीदा शब्द कहते हैं और इसका उपयोग करते हुए उन्होंने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे का विरोध करने वाले आठ यूरोपीय देशों पर आगामी एक फरवरी से दस फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी है।


ट्रंप पहले भी कई बार ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की बात कह चुके हैं और पिछले वर्ष तो उन्होंने इस क्षेत्र के लिए एक विशेष दूत की नियुक्ति भी की थी। दरअसल, इस क्षेत्र में ट्रंप की बढ़ती रुचि की वजहें भूराजनीतिक होने के साथ सामरिक व आर्थिक भी हैं। ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र के केंद्र में स्थित एक द्वीप है, जो डेनमार्क के अधीन रहते हुए कई तरह की स्वायत्तता रखता है। रूस इस क्षेत्र में नए सैन्य अड्डे बना रहा है, जबकि चीन भी खुद को आर्कटिक की ही नजदीकी शक्ति साबित करने पर तुला है।


यह भी माना जाता है कि दुनिया के एक-चौथाई दुर्लभ खनिज इसी क्षेत्र में हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ये खनिज बहुमूल्य हैं, क्योंकि इनका उपयोग इलेक्ट्रिक कारों से लेकर सैन्य उपकरणों तक के निर्माण में होता है। यह कोई छिपी बात नहीं है कि दुर्लभ खनिजों के मामले में चीन पूरी दुनिया में सबसे आगे है। उसका ग्रीनलैंड की खनन कंपनियों में निवेश तो है ही, पिछले कई साल से वह ग्रीनलैंड में अपनी उपस्थिति सशक्त बनाने की भी कोशिश कर रहा है और अमेरिका पर दबाव भी बना रहा है। नैतिक और संप्रभुता संबंधी चिंताएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन स्थितियों में अमेरिका का ग्रीनलैंड को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी मानना अतार्किक नहीं कहा जा सकता।

ऐसा मानने वाले ट्रंप कोई पहले अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं हैं। उनसे पहले भी कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने इसका समर्थन किया है, यह दीगर बात है कि वे आगे बढ़ नहीं सके। ट्रंप विशुद्ध व्यापारी सोच वाले व्यक्ति हैं, लेकिन व्यापार आदर्शवाद से नहीं चलते। अपनी यही सोच वह अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी लागू कर रहे हैं। व्यापार और अर्थव्यवस्था हमेशा से ही कूटनीति के प्रभावी औजार रहे हैं, जिनका ट्रंप भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। ग्रीनलैंड के मुद्दे पर भी ट्रंप के इरादे और घोषणाएं नेतृत्व की उसी शैली को दर्शाते हैं, जिसके लिए वह जाने जाते हैं। अमेरिका के हितों के लिहाज से हो सकता है कि वह सही हों, लेकिन आज की जुड़ी हुई दुनिया में विश्व का सबसे ताकतवर देश सिर्फ और सिर्फ खुद के हित के बारे में सोचे, तो यह वैश्विक व्यवस्था के लिए सुसंकेत नहीं है।
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