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गाजा संघर्ष: ट्रंप के पास इतिहास रचने का मौका, अवसर मिलने पर नहीं चूकेंगे
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डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो :
पीटीआई
विस्तार
क्या डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस में दोबारा लौटने से इस्राइल और फलस्तीन पर दो राष्ट्र समाधान का अमेरिकी दबाव खत्म हो जाएगा? यह जरूरी नहीं है, क्योंकि यह इस पर निर्भर करता है कि व्हाइट हाउस में कौन-से डोनाल्ड ट्रंप बैठते हैं। क्या यह वह ट्रंप होंगे, जिन्होंने हाल ही में पश्चिमी तट पर इस्राइल कब्जे के समर्थक माइक हुकाबी को यरूशलम में अपना नया राजदूत नियुक्त किया है? या वह ट्रंप होंगे, जिन्होंने अपने दामाद जेरेड कुशनर के साथ मिलकर बिल क्लिंटन के कार्यकाल के बाद दो-राष्ट्र समाधान के लिए विस्तृत योजना तैयार की थी?
आपने सही पढ़ा-ट्रंप ऐसे दुर्लभ अमेरिकी राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने इस्राइल और फलस्तीन के बीच सह-अस्तित्व के लिए विस्तृत योजना बनाई थी। अगर ट्रंप 2025 में उस पहल को पुनर्जीवित करते हैं, तो उन्हें एक ऐसे राष्ट्रपति के रूप में याद किया जा सकता है, जिसने इस्राइल को एक यहूदी लोकतंत्र के रूप में संरक्षित किया और साथ ही फलस्तीन को सुरक्षित राष्ट्र के रूप में जन्म लेने में मदद की। चार साल पहले जब मैंने उनसे बात की थी, तो उन्होंने अब्राहम समझौते का समर्थन करने के लिए धन्यवाद दिया था, जिसने इस्राइल और संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सूडान और मोरक्को के बीच ऐतिहासिक शांति का मार्ग प्रशस्त किया था।
ट्रंप के बारे में आप जो कहें, लेकिन वह बड़े सौदे करने में ही दिलचस्पी रखते हैं, जिनके गंभीर और यहां तक कि इतिहास को आकार देने वाले परिणाम हो सकते हैं। मैंने हाल ही में इस्राइल और यूएई में एक सप्ताह बिताया, जहां मैंने राजनेताओं, सैन्य और व्यापारिक नेताओं, यहूदियों, फलस्तीनियों व अरबों से बात की है कि ट्रंप इस बार उनके क्षेत्र में क्या कर सकते हैं। अगर ट्रंप सही तरीके से करना चाहें, तो ऐतिहासिक सौदे करने के लिए यहां बहुत सारे अवसर और इच्छाएं हैं। ट्रंप के पास एक शुरुआती बिंदु है : दो-राष्ट्र समाधान योजना, जिसे उन्होंने जनवरी, 2020 में पेश किया था, जिसका शीर्षक था ‘शांति से समृद्धि : फलस्तीनी और इस्राइली लोगों के जीवन को बेहतर बनाने का दृष्टिकोण।’ कोई भी पक्ष इसे उस रूप में स्वीकार नहीं करेगा, जैसा कि वर्तमान में लिखा गया है, और सात अक्तूबर, 2023 की घटना के बाद गाजा में होने वाला युद्ध किसी भी सौदे को बहुत जटिल बना देगा। लेकिन ट्रंप की योजना का ‘दृष्टिकोण’ गाजा के बाद इस्राइल-फलस्तीनी वार्ता के लिए एक शुरुआती बिंदु है, जिसे किसी राष्ट्रपति ने 24 साल पहले क्लिंटन द्वारा निर्धारित क्लिंटन मापदंडों के बाद से दो राष्ट्र बनाने के लिए सार्वजनिक रूप से पेश किया है।
इस योजना में इस्राइल को पश्चिमी तट के लगभग 30 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा करने का अधिकार दिया गया था, जहां अधिकांश यहूदी बसते हैं, जबकि शेष हिस्सा पश्चिमी तट और गाजा में असैन्यीकृत फलस्तीनी राष्ट्र के लिए था। ट्रंप ने प्रस्ताव दिया कि गाजा का विस्तार इस्राइल के नेगेव रेगिस्तान की भूमि से किया जाएगा, ताकि फलस्तीनियों को पश्चिमी तट से छोड़े जाने वाले क्षेत्र के हिस्से के लिए मुआवजा दिया जा सके। और ट्रंप ने प्रस्ताव दिया कि गाजा और पश्चिमी तट को ऊपर की सड़कों और सुरंगों से जोड़ा जाए, लेकिन केवल तभी, जब हमास को गाजा में नेतृत्व से हटा दिया जाए, जैसा कि उन्होंने उस समय जोर दिया था। फलस्तीनी राजधानी यरूशलम के बाहरी इलाके में होगी। इस योजना में दोनों पक्षों से कहा गया कि एकमात्र स्थायी समाधान दो स्वदेशी लोगों के लिए दो राष्ट्रों का होना है, जिसमें भूमि विनिमय और पारस्परिक रूप से सहमत सुरक्षा व्यवस्था शामिल है, जिस पर वे बातचीत करेंगे। और नहीं भूलिए कि ट्रंप की 2020 की योजना पर कुछ महत्वपूर्ण छापें हैं।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू और रॉन डर्मर, जो तब अमेरिका में उनके राजदूत थे, ने उस समय इसे स्वीकार किया था, लेकिन नेतन्याहू ने इसे कभी औपचारिक रूप से अपने मंत्रिमंडल के सामने पेश नहीं किया। इसके बजाय, नेतन्याहू ने ट्रंप द्वारा इस्राइल के लिए निर्धारित क्षेत्र के कुछ हिस्सों को अपने में मिलाने की कोशिश की, लेकिन ट्रंप ने उन्हें रोक दिया। फिर यूएई ने दखल देते हुए कहा कि अगर नेतन्याहू पश्चिमी तट को एकतरफा ढंग से अपने में नहीं मिलाने का वादा करते हैं, तो वे इस्राइल के साथ रिश्तों को सामान्य कर देंगे। इस तरह से अब्राहम समझौते की शुरुआत हुई। लेकिन यह सिर्फ एक सांत्वना पुरस्कार था, बेशक मूल्यवान, लेकिन सदी का वह सौदा नहीं था, जिसकी ट्रंप आकांक्षा रखते थे। इसलिए अगर गाजा में युद्ध विराम और बंधकों की अदला-बदली होती है, तो मुझे उम्मीद है कि ट्रंप इस दूसरे मौके का फायदा उठाने पर विचार करेंगे, जो इतिहास उन्हें दे रहा है, दोनों पक्षों को शांति शिखर सम्मेलन के लिए कैंप डेविड में आमंत्रित करके वह वहां से बातचीत शुरू कर सकते हैं।
इस पहल से दोनों पक्षों को यह पता चल जाएगा कि ट्रंप इस पर चर्चा करने के लिए उनकी राजनीति का इंतजार नहीं करेंगे, क्योंकि इस संघर्ष को रोकना अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण है, इससे पहले कि यह अमेरिका को कहीं ज्यादा इस युद्ध में घसीट ले। और हम जानते हैं कि ट्रंप को यह युद्ध पसंद नहीं है। अगर ट्रंप अपनी योजना को फिर से शुरू करते हैं, तो यह दुनिया को स्पष्ट कर देगा कि इस्राइल को अमेरिका से कोई कोरा चेक नहीं मिला है, जिससे वह बिना किसी विश्वसनीय योजना के गाजा में हमेशा के लिए लड़ सके।
यह संकेत देगा कि फलस्तीनियों को अपनी बातचीत एक साथ करने की जरूरत है, न कि केवल शिकायत करने की, और यह ईरान को संकेत देगा कि ट्रंप तेहरान को कूटनीतिक ढंग से सैन्य रूप से अलग-थलग करने का इरादा रखते हैं, जैसा कि उन्होंने अपनी योजना में कहा है, अगर वे इस्राइल से सुरक्षित शांतिपूर्ण रिश्ते बनाते हैं, तो ‘फलस्तीनियों के आत्मनिर्णय की वैध इच्छा’ को साकार करने में मदद मिलेगी। पिछले हफ्ते इस्राइल में, मैंने इस्राइली यहूदियों, इस्राइली अरबों और पश्चिमी तट के फलस्तीनियों से बातचीत में एक बात समान देखी कि वे सभी इस युद्ध से थक चुके हैं और दोनों पक्षों के सर्वश्रेष्ठ लोग देश छोड़ने के बारे में सोच रहे हैं। ट्रंप युद्ध खत्म करवा कर उन्हें आश्चर्यचकित कर सकते हैं।
©The New York Times 2024