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आर्थिकी: घरेलू बाजार ही अर्थव्यवस्था की ताकत
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विस्तार
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ की 115वीं कड़ी में कहा कि पिछले 10 साल में देश जिस तेजी से आत्मनिर्भरता की नीति और वोकल फॉर लोकल के मंत्र के साथ आगे बढ़ा है, उससे हमारे स्थानीय और घरेलू बाजार मजबूत हुए हैं। विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में वहां के घरेलू बाजार की अहम भूमिका है। घरेलू बाजार के दम पर भारत की अर्थव्यवस्था सरपट दौड़ रही है। स्विस कंपनी एसआईजी के सीईओ सैमुअल सिग्रिस्ट ने कहा है कि भारतीय घरेलू बाजार में तेजी से कारोबार की स्थापना और प्रोत्साहन की सारी विशेषताएं हैं।
डेलॉइट इंडिया की इंडियाज होम एंड हाउसहोल्ड मार्केट रिपोर्ट 2024 में कहा गया है कि भारत का घरेलू बाजार 10 फीसदी से अधिक की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ रहा है और इस तेज गति से वर्ष 2030 तक भारत का घरेलू बाजार लगभग 237 अरब डॉलर की ऊंचाई पर पहुंच सकता है। निश्चित रूप से भारत के घरेलू बाजार की मजबूती में वस्तुओं, सेवाओं, कृषि उत्पादों और प्रतिभूतियों की बढ़ती हुई मांग और आपूर्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके अलावा, डिजिटलीकरण, खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता, कृषि का तेज विकास, मैन्यूफैक्चरिंग हब बनने की डगर, टियर 2 और टियर 3 शहरों में मांग में तेज वृद्धि, ऋण तक आसान पहुंच, युवा उपभोक्ताओं की बढ़ती क्रयशक्ति तथा छलांगें लगाता सर्विस सेक्टर भी घरेलू बाजार को बढ़ाने में महत्वपूर्ण है।
डिजिटलीकरण से भारत को वित्तीय समावेशन में मदद तो मिल ही रही है, यह लागत को कम करने, घरेलू अर्थव्यवस्था को अधिक कुशल बनाने और सेवाओं को सस्ता करने में भी प्रभावी योगदान दे रहा है। इससे भारतीय घरेलू बाजार को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिल रही है। दुनिया की नजरों में यह युग भारत के घरेलू बाजार को रफ्तार देने का युग है। दुनिया में भारत ग्लोबल फिनटेक एडॉप्शन में पहले, इंटरनेट उपभोक्ताओं के मामले में दूसरे, स्टार्टअप के मामले में तीसरे और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में चौथे स्थान पर है। वस्तुतः भारत के पास उपभोक्ताओं का विशाल बाजार, युवाओं में आगे बढ़ने की ललक, उद्यमिता की भावना और सुधार का रवैया आदि ऐसे कारण हैं, जिनसे वैश्विक संघर्ष व चुनौतियों के बावजूद भारत में नए अवसरों का बाहुल्य है। घरेलू निवेशकों के दम पर ही चुनौतियों के बीच भारतीय शेयर बाजार ऊंचाई पर है।
कृषि के विकास और खाद्यान्न अधिशेष ने भारतीय घरेलू बाजार को मजबूती दी है। यह भारतीय कृषि क्षेत्र की बदौलत ही हुआ कि कोविड-19 के दौरान भारत ने देश के लोगों को भूख की पीड़ाओं से बचाया। सरकार ने कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया है और देश में कृषि उन्नयन, खेती में नवाचार को प्रोत्साहन देने, लागत को कम करते हुए उत्पादन के साथ ही किसानों की आय बढ़ाने का अभूतपूर्व अभियान आगे बढ़ाया है। बेहतर मानसून से ग्रामीण इलाकों में खपत बढ़ रही है। देश के कोने-कोने में घरेलू बाजार को मेक इन इंडिया अभियान से शक्ति मिल रही है। अब कई औद्योगिक उत्पाद देश में ही बनाए जा रहे हैं, जिन्हें पहले आयात किया जाता था। इस समय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर करीब 2.73 करोड़ से अधिक श्रमबल के साथ अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहा है। भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन विनिर्माता है और तीसरा सबसे बड़ा ऑटो मोबाइल मार्केट है। भारत का फार्मा उद्योग उत्पादन के आधार पर दुनिया में तीसरे क्रम पर है। साथ ही भारत दुनिया में सबसे अधिक मांग वाला तीसरा बड़ा विनिर्माण गंतव्य है। विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए जो प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (पीएलआई) स्कीम लागू की है, उसके अच्छे परिणाम मिल रहे हैं।
शहरों से लेकर गांवों तक स्वदेशी सामान की खरीदारी में जोरदार उछाल आया है। चीन से त्योहारी उत्पादों के आयात में कमी के साथ-साथ खिलौनों और दवा बनाने की मूल सामग्री बल्क ड्रग इंटरमीडिएट्स (एपीआई) के आयात में भी भारी कमी आई है। इससे घरेलू बाजार को मजबूती मिली है। भारतीय कंपनियां शोध व नवाचार में आगे बढ़ रही हैं। ऑटोमेशन और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों पर भी अपेक्षित ध्यान दिया जा रहा है। उम्मीद है कि वर्ष 2025 तक जीडीपी में 25 फीसदी योगदान मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर से आएगा। हालांकि घरेलू बाजार को और मजबूत बनाने के लिए कुछ और बातों पर ध्यान देना होगा। उम्मीद करनी चाहिए कि सरकार जीएसटी और आयकर में सरलता, निवेश के लिए अधिक अनुकूल माहौल, कुशल बुनियादी संरचना, लॉजिस्टिक लागत में कमी, गतिशक्ति योजना का तेज क्रियान्वयन, व्यवसाय करने की प्रक्रिया की सरलता, कृषि सुधारों जैसे रणनीतिक कदमों से भारत के घरेलू बाजार की चमक और बढ़ाएगी।