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दुष्प्रचार : अमेरिकी धार्मिक रिपोर्ट अस्वीकार्य, भारत ने फिर किया 'बदनामी के एजेंडे' का प्रतिकार

Sat, 20 May 2023 07:10 AM IST
अवधेश कुमार अवधेश कुमार
Updated Sat, 20 May 2023 07:10 AM IST
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सार
भारत अनेक पंथों, संप्रदायों का देश है। विविधता और सहिष्णुता इसकी संस्कृति हैं। इस संबंध में हमें किसी बाहरी से सीख लेने की जरूरत नहीं है।
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Disinformation: US religious report unacceptable, India again retaliates with defamation agenda
व्हाइट हाउस, अमेरिका (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : Pixabay

विस्तार

अमेरिका ने फिर अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी वार्षिक रिपोर्ट में भारत को अल्पसंख्यक विरोधी देश साबित करने की कोशिश की है। अमेरिका इसे विश्व भर के देशों में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति का तथ्यात्मक एवं प्रामाणिक दस्तावेज बताता है। अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता कार्यालय के विशेष राजदूत राशद हुसैन ने कहा कि रिपोर्ट विश्व भर के लगभग 200 देशों और क्षेत्रों में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति के बारे में एक तथ्य आधारित व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करती है।



अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने इसे जारी करते हुए भारत का उल्लेख नहीं किया, पर रिपोर्ट में भारत का संदर्भ भयानक तस्वीरों से भरा है। राशद हुसैन के बयान में भारत का जिक्र है। उन्होंने कहा कि कई सरकारों ने अपनी सीमाओं के भीतर धार्मिक समुदाय के सदस्यों को खुले तौर पर निशाना बनाना जारी रखा है। चीन और अफगानिस्तान समेत कई देशों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में विविध धार्मिक समुदाय से जुड़े कानून के हिमायती और धार्मिक नेताओं ने हरिद्वार में मुस्लिमों के खिलाफ घोर नफरती भाषा का इस्तेमाल किया, जो निंदनीय है।


इसमें 20 से अधिक ऐसी घटनाओं का जिक्र है, जिससे आभास होता है कि भारत की वर्तमान सरकार के अंदर बहुसंख्यक समुदाय अल्पसंख्यकों पर हमले कर रहा है। जैसे, कहा गया है कि इस वर्ष कई राज्यों में धार्मिक अल्पसंख्यक सदस्यों के खिलाफ कानूनी एजेंसी के अधिकारियों द्वारा हिंसा की रिपोर्ट सामने आई। गुजरात में सादी वर्दी में पुलिस द्वारा अक्तूबर में एक त्योहार के दौरान हिंदुओं को घायल करने के आरोपी चार मुस्लिम पुरुषों को सार्वजनिक रूप से पीटने और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा अप्रैल में खरगोन में सांप्रदायिक हिंसा के बाद मुस्लिमों के घरों और दुकानों पर बुलडोजर चलाने की बात कही गई है। इसे मुस्लिमों पर अत्याचार के रूप में पेश किया गया है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा बुलडोजर से घर और संपत्तियां ध्वस्त करने का भी उल्लेख है। कोई निष्पक्ष और विवेकशील व्यक्ति इस रिपोर्ट को स्वीकार नहीं कर सकता।

अमेरिकी रिपोर्ट में भारत की स्वतंत्र न्यायपालिका की भूमिका को नजर अंदाज किया गया है। इसमें तथ्यात्मक गलतियां भी हैं। उदाहरण के लिए, हरिद्वार की जिस सभा का जिक्र है, उसके कई लोगों पर न केवल मुकदमे हुए, बल्कि उन्हें जेलों में भी डाला गया। भारत को पाकिस्तान, चीन, अफगानिस्तान आदि की श्रेणी में रखना साफ करता है कि रिपोर्ट तैयार करने वालों का उद्देश्य क्या हो सकता है। यह रिपोर्ट मीडिया एडवोकेसी रिसर्च ग्रुप्स द्वारा तैयार की गई है। इसमें कौन-कौन सी संस्थाएं और लोग शामिल हैं, इनकी जानकारी सामने आनी चाहिए। राशद हुसैन पाकिस्तानी मूल के हैं।  

कई बार भारत में इसे स्वीकार करने से बहुत लोग बचते हैं कि यहां के बारे में दुष्प्रचार में अपने ही लोगों की भूमिका सबसे ज्यादा होती है। इसके पहले भी अनेक घटनाएं हुई हैं। कोई सामान्य घटना देखते-देखते दुनिया भर में सोशल मीडिया से लेकर मुख्य मीडिया तक बड़ी घटना के रूप में प्रचारित हो जाती है और उसका खंडन करना कठिन हो जाता है। भारत में ऐसी रिपोर्ट का समर्थन करने वाले इसका ध्यान रखें कि जब आप भाजपा, संघ और उससे जुड़े संगठनों पर अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा करने के आरोप को प्रचारित करते हैं, तो चूंकि ये हिंदुओं के संगठन हैं, इसलिए इससे विश्व भर में हिंदुओं की छवि विकृत होती है।

इस कारण अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा ऑस्ट्रेलिया सहित कई यूरोपीय देशों में हिंदू नफरती अपराध तथा हिंसा के शिकार हो रहे हैं। अपनी उत्साहित प्रतिक्रिया देने से पहले इस पहलू पर अवश्य विचार करना चाहिए। दूसरे, अमेरिका में अन्य धार्मिक समुदायों के साथ क्या कुछ हुआ हो रहा है, इसे भी उजागर करना चाहिए। अनेक देशों के मुसलमानों को अमेरिकी धरती पर उतरने के साथ हवाई अड्डों पर जिस तरह की सुरक्षा जांच का सामना करना पड़ता है, उससे बड़ा भेदभाव कुछ हो नहीं सकता। भारत सदियों से अनेक पंथों, संप्रदायों का देश है। विविधता और सहिष्णुता इसकी संस्कृति थी, है और रहेगी। इसके लिए हमें किसी बाहरी से सीख लेने की आवश्यकता नहीं है।

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