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बीमारी भी इलाज है

Thu, 25 Apr 2013 09:20 PM IST
प्रकाश पुरोहित
प्रकाश पुरोहित Updated Thu, 25 Apr 2013 09:20 PM IST
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diseases and cure

आप चाहकर भी बीमार हो सकते हैं। अपनी सुविधा-असुविधा से बीमार हो सकते हैं। कहीं जाना हो, तो बीमार हुआ जा सकता है, जैसे जेल। और कहीं नहीं जाना हो, तो भी आप बीमार पड़ सकते हैं, जैसे विरोधी की रैली में।

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बीमार होने के लिए, बीमार होना कतई जरूरी नहीं है। वैसे ही, जैसे बीमार रहते हुए भी आप सेहतमंद होने का दावा कर सकते हैं।

बीमारी की खबर जब अफवाह के रूप में उड़ाई जाती है, तो बीमार यों तनकर नजर आता है कि आप यकीन ही नहीं करें कि इनकी सात पुश्तों में कभी कोई स्टेथोस्कोप के नजदीक भी गया होगा।
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डॉक्टर भी अपना संपूर्ण अनुभव और ज्ञान ‘दांव’ पर लगा दे, तो साबित नहीं कर पाए कि बंदे को सर्दी भी हुई है। बीमारी हमला है, तो ढाल भी है और बचाव भी है। मौके के हिसाब से इसका उपयोग बदलता जाता है।
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जब जेल जाने के आसार बनने लगते हैं, तो लोग समझ जाते हैं कि अब यह गंभीर रूप से बीमार होने वाला है। और होता भी यही है कि जेल जा रही सरकारी गाड़ी अस्पताल जाकर हांफने लगती है।

जेल से पहले अस्पताल में उनके रहने के इंतजाम हो जाते हैं। तब लोग नहीं मानते कि ये बीमार हैं। मगर डॉक्टर की पर्ची यह साबित कर देती है कि इन जैसा खूंखार बीमार इन दिनों पाया जाना मुश्किल ही है।

इसी तरह जब यह पता चलता है कि दूसरे शहर के कार्यकर्ता उनके नाम पर चंदा वसूली के जरिये रैली, पोस्टर, होर्डिंग का महासंग्राम करने जा रहे हैं और लेने के देने पड़ सकते हैं, तो वे बीमार हो जाते हैं। ‘नहीं आना’ यह कहकर तो आज तक कोई नेता नहीं बना। हां, बीमार होकर तो नेता बना ही जा सकता है।

अपने नाम पर जम रही दूसरों की दुकान भंड करना है, तो बीमार होने के सिवा और क्या किया जा सकता है। वह बीमार होकर बाकी को खटिया पकड़ा देता है और कई का तो इलाज भी कर देता है।


इसीलिए कहा गया है कि बीमारी बड़े काम की चीज है, मगर तभी तक, जब तक आप सच्ची-मुच्ची बीमार न पड़ें। बल्कि यही मानते रहना चाहिए कि आप बीमार होंगे, तो अपने मन से ही। शायद यह भी टोटका ही होगा कि खुद जरूरत के हिसाब से बीमार होते रहो, ताकि असल में बीमार पड़ने की कभी नौबत  ही न पड़े। और होता भी तो ऐसा ही है। नेता कहां बीमार होते हैं इस देश में!

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