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कूटनीति: यह तिनका है, जो तूफान ला सकता है; पश्चिम एशिया का इस्राइल-फलस्तीन मुद्दा बेहद संवेदनशील

Thomas L Freedman थॉमस एल फ्रीडमैन
Updated Fri, 24 May 2024 06:12 AM IST
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सार
फलस्तीन को तीन यूरोपीय देशों के समर्थन को कमतर आंकने वाले न भूलें कि अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ आंदोलन ऐसे ही शुरू हुआ था।
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Diplomacy: It is the straw that can create a storm; Israel-Palestine issue of West Asia is very sensitive
इस्राइल-हमास संघर्ष के बीच गाजा पट्टी का दृश्य - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

एक तरफ इस्राइल की सरकार पूरी दुनिया से गाजा में हमास को नष्ट करने के उसके संघर्ष में साथ देने का आह्वान कर रही है, तो दूसरी तरफ वह गैर-हमास फलस्तीनियों के साथ किसी भी तरह के सहयोग से इन्कार भी कर रही है। ठीक ऐसे समय में यूरोप के तीन देश स्पेन, नॉर्वे और आयरलैंड ने जिस तरह फलस्तीन को स्वतंत्र व संप्रभु देश के तौर पर मान्यता देने का फैसला किया है, उससे यही लगता है कि यूरोप में इस्राइल विरोध का दायरा व्यापक होने लगा है।



उल्लेखनीय है कि आज 140 से ज्यादा देश एक राष्ट्र के रूप में फलस्तीनियों के अधिकार को वेस्ट बैंक, गाजा और पूर्वी येरुशलम में मान्यता दे चुके हैं। हालांकि, तीन यूरोपीय देशों के हालिया कदम में गौर करने वाली बात यह है कि अब तक प्रमुख पश्चिमी यूरोपीय देश और अमेरिका ऐसा करने से पीछे ही हटे हैं। दरअसल, इनका मानना है कि पहले दोनों देशों में शांति की स्थापना होनी चाहिए। यह दीगर बात है कि ऐसा अब तक हो नहीं सका है। मेरा ध्यान हमेशा व्यावहारिक बातों पर रहता है। क्या बिना पूर्व निर्धारित सीमाओं और बिना अस्तित्व वाले फलस्तीनी देश को मान्यता देने भर से स्थायी समाधान हो जाएगा? दो देसज समुदायों-यहूदी और फलस्तीनियों के लिए दोनों देशों के बीच वास्तविक जीवन में शांति आएगी? इसका जवाब हां भी है और नहीं भी। इस्राइल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष योहानन प्लेसनर ने मुझे बताया कि साथी लोकतंत्रों द्वारा ये अल्पकालिक राजनयिक मान्यताएं इस्राइली जनता को प्रभावित नहीं कर पाएंगी। पिछले वर्ष सात अक्तूबर को हमास द्वारा की गई हत्याओं, दुष्कर्मों एवं अपहरण की भयावह घटनाओं के मद्देनजर उन्होंने कहा कि यूरोपीय लोग इस्राइल से कह रहे हैं कि उसे फलस्तीन राष्ट्र को स्वीकार कर लेना चाहिए। वे इसका उल्लेख भी नहीं करते कि वहां से सेना हटाई जानी चाहिए या हमास को नकारना फलस्तीनियों का भी कोई दायित्व है। ऐसे में इस प्रस्ताव को इस्राइल मौन बहुमत से खारिज कर देगा।


हालांकि, दीर्घकाल में यह बिल्कुल इस्राइल के लिए रणनीतिक झटके से कम नहीं होगा। इससे इस्राइल के विपक्षी नेताओं को नेतन्याहू को घेरने का मौका मिलेगा। वह नेतन्याहू पर फलस्तीन में चल रहे युद्ध को रोकने और इस्राइल द्वारा फलस्तीन को मान्यता देने के लिए दबाव भी बना सकते हैं। हालांकि फिलहाल यह कहना दूर की कौड़ी होगा, क्योंकि अभी तो यही स्थिति है कि इन विषयों पर क्या कहना है, क्या नहीं कहना है, सब कुछ नेतन्याहू ही तय करते हैं। जाहिर है, स्पेन, नॉर्वे और आयरलैंड की ओर से फलस्तीन को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने से तनाव बढ़ेगा, क्योंकि इस्राइल ने इस पर नाराजगी जताई है।  इस्राइल की नाराजगी इतनी बढ़ गई है कि उसने नॉर्वे व आयरलैंड से अपने राजदूतों को वापस बुलाने का आदेश दिया है। इस्राइल के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस कदम के गंभीर नतीजे होंगे। सबसे पहले नॉर्वे ने मान्यता देने के फैसले की घोषणा की।

नॉर्वे के पीएम जोनस गार स्तूर ने कहा, यदि मान्यता नहीं दी गई, तो पश्चिम एशिया में शांति नहीं हो सकती। नॉर्वे आगामी 28 मई तक फलस्तीन को देश के तौर पर मान्यता दे देगा। यूरोपीय संघ के कई देशों ने पिछले दिनों संकेत दिया है कि फलस्तीन को मान्यता देने की योजना बना रहे हैं, क्योंकि क्षेत्र में शांति के लिए द्वि-राष्ट्र समाधान जरूरी है। इस निर्णय से एक तरफ इस्राइल नाराज है, तो फलस्तीन ने खुशी जताई है।

1990 के दशक में नेल्सन मंडेला की पोलिंग टीम के सदस्य रहे एक सर्वेक्षणकर्ता क्रेग चार्नी ने मुझसे कहा कि इस्राइल ने यदि अपना रास्ता नहीं बदला, तो यूरोपीय देशों का फलस्तीन को राष्ट्र की मान्यता देना-‘हवा में उड़े एक बड़े तिनके की तरह है, जो तूफान में बदल जाएगा।’ चार्नी ने बताया कि 1960 के दशक में दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद शासन का अलगाव सबसे पहले स्वैच्छिक हथियारों पर प्रतिबंध के साथ शुरू हुआ था, जो 1970 के दशक में सोवतो विद्रोह के बाद औपचारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र हथियार प्रतिबंध में बदल गया। इसके बाद 1980 के दशक के मध्य में यह एक व्यापक आर्थिक, सैन्य और यात्रा प्रतिबंध में बदल गया, जब तक कि दो महान नेता, नेल्सन मंडेला और एफ.डब्ल्यू. डी क्लार्क अंततः रंगभेद को समाप्त करने के लिए सामने नहीं आए। चार्नी ने कहा कि लेकिन 'यह बहुत दर्दनाक यात्रा थी।'

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