फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   developing countries demand for reform of international financial system to address climate change crisis

जलवायु परिवर्तन: पूर्व-पश्चिम के बीच नए संवाद की बानगी और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में सुधार की मांग

Thu, 22 Jun 2023 07:42 AM IST
Seema Javed सीमा जावेद
Updated Thu, 22 Jun 2023 07:42 AM IST
विज्ञापन
सार
 जलवायु परिवर्तन के संकट से निपटने के लिए विकासशील देशों के नेता अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे हैं।
loader
developing countries demand for reform of international financial system to address climate change crisis
निर्मला सीतारमण - फोटो : Social Media

विस्तार

कल से फ्रांस में दो दिवसीय 'ग्लोबल समिट फॉर न्यू फाइनेंशियल पैक्ट' शुरू होने जा रहा है, जो एक नए वैश्विक वित्तीय समझौते की बानगी है। इस शिखर सम्मेलन की सह मेजबानी भारत भी कर रहा है। बिगड़ती जलवायु और जैव विविधता संकट का सामना कर रही दुनिया में एक के बाद एक समस्याएं खड़ी हो रही हैं। खासतौर से विकासशील देशों को आए दिन कभी जानलेवा गर्मी, तो कभी असामान्य बारिश और बाढ़, तूफान, चक्रवात व सूखे की वजह से फसलों के नुकसान का सामना करना पड़ता है।



ये वे देश हैं, जो ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार न होने के बावजूद इसके विपरीत प्रभावों का सबसे ज्यादा सामना करने को मजबूर हैं। इनसे निपटने के लिए जाहिर है कि उन्हें कर्ज की दरकार है। ऐसे में विकासशील देशों के नेता अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली के पूर्ण कायापलट की मांग कर रहे हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक जैसे बहुपक्षीय वित्तीय संस्थान कम आय वाले और कमजोर देशों को ऋण संकट से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


इस शिखर सम्मेलन का मकसद जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान सहित कुछ सबसे अधिक दबाव वाले वैश्विक मुद्दों पर बातचीत शुरू करना है। यह जलवायु और विकास चुनौतियों के मुद्दे पर पूर्व-पश्चिम के बीच एक नए संवाद की बानगी है। बॉस्टन यूनिवर्सिटी के ग्लोबल पॉलिसी सेंटर के अनुसार, 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद से उभरते बाजारों में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का ऋण स्तर दोगुना से अधिक हो गया है। इसी तरह, ऐक्शन एड के एक विश्लेषण में पाया गया है कि जलवायु संकट के लिए सबसे अधिक असुरक्षित 93 फीसदी देश पहले से ही ऋण संकट में हैं, जबकि सबसे अधिक जलवायु-संवेदनशील देशों में से 60 फीसदी अपने ऋणों की अदायगी जारी रखने के लिए जलवायु कार्रवाई में निवेश सहित सार्वजनिक सेवाओं पर खर्च में कटौती करने की संभावना रखते हैं।

कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी (सीबीडी) की कार्यकारी सचिव एलिजाबेथ म्रेमा के अनुसार, राजकीय ऋण जोखिम के बढ़ते स्तर ने विकासशील देशों को निर्यात संचालित वस्तुओं और एक्सट्रैक्टिविज्म (प्राकृतिक संसाधनों के दोहन) में फंसा दिया है। इससे वैश्विक जैव विविधता और कम हो गई है और विश्व स्तर पर सहमत सीबीडी उद्देश्यों को प्राप्त करना कठिन हो गया है।

जलवायु वित्त पर एक विशेषज्ञ समूह द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार, जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई के लिए वित्त पोषण का अंतर गरीब और अमीर देशों के बीच लगातार बढ़ रहा है। चीन के अलावा उभरते विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए 2025 तक प्रतिवर्ष लगभग 10 खरब डॉलर और 2030 तक प्रतिवर्ष लगभग 24 खरब डॉलर खर्च करने की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह लक्ष्य पहुंच के भीतर है, लेकिन अगर हम 2030 तक उभरती अर्थव्यवस्थाओं में वैश्विक जीडीपी के 2-2.5 फीसदी मूल्य के निवेश तक पहुंचना चाहते हैं, तो वैश्विक वित्तीय ढांचे में एक मौलिक परिवर्तन की जरूरत है। इसलिए विश्व नेता अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली के पूर्ण कायापलट की मांग कर रहे हैं, जिसका समर्थन संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी किया है।

आईएमएफ और विश्व बैंक पर अपनी नीतियों और संरचनाओं में सुधार करने का दबाव है, ताकि उन्हें वर्तमान वैश्विक चुनौतियों के उपयुक्त बनाया जा सके। ब्रिजटाउन पहल एक व्यावहारिक योजना है, जो वैश्विक वित्तीय प्रणाली में सुधार के लिए एक नई कार्य योजना की पेशकश करती है, ताकि दुनिया वर्तमान और भविष्य के संकटों का बेहतर जवाब दे सके। इसके जरिये जलवायु प्रभावों और जैव विविधता के नुकसान की उच्चतम कीमत चुकाने वाले गरीब देशों को आर्थिक मदद देने का रास्ता निकलता है। यह शिखर सम्मेलन एक प्रमुख क्षण होगा, जब विश्व नेता अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में सुधार के लिए एक साहसिक और समावेशी दृष्टि और स्पष्ट मार्ग स्थापित करने का लक्ष्य रखेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed