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रुपया तू और गिर !

Thu, 29 Aug 2013 08:28 PM IST
सुधीर विद्यार्थी
सुधीर विद्यार्थी Updated Thu, 29 Aug 2013 08:28 PM IST
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devaluation of rupee

साधो, मैं रुपये के गिरने से बहुत खुश हूं। मैं चाहता हूं कि यह और गिरे। इसने बहुत जुल्म ढाए हैं। इसने राजपाट, घर-परिवार और नाते-रिश्तों को जमींदोज किया है। सामाजिक ताने-बाने को जितनी हानि इस रुपये ने पहुंचाई है, उतनी किसी ने नहीं। वैसे हर किसी की जिंदगी में उठने और गिरने के दिन आते हैं। पर जाने क्यों लोग रुपये के गिरने पर इतने परेशान हैं। संसद में बैठे लोग तो चिंता में दुबले हुए चले जा रहे हैं। वे जनता को क्या जवाब दें कि उनकी मुद्रा इतनी नीचे पहुंच गई है कि उसे अब हाथों से उठा पाना बहुत मुश्किल हो गया है।

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सड़क पर रुपया पड़ा है। लोग-बाग आ-जा रहे हैं। कुछ लोग उस रुपये को देखते हैं, पर कोई नहीं उठाता। रुपये का इतना पतन हुआ है, तो यह अच्छा ही है। कोई इतना गिर जाए कि उसे उठाने की जहमत से भी लोग कतराने लगें, तो समझो कि उसके अच्छे दिन आ गए। हालांकि हम चाहते हैं कि रुपया इतना गया-गुजरा हो जाए कि उसकी चोरी, लूट और ठगी बंद हो जाए। कहते हैं, रुपया हाथ का मैल है। साधु-संतों ने इसीलिए इससे दूर रहने की सलाह दी है। रुपया जब और गिरेगा, तब लोग स्वतः ही उसकी ओर से मुंह फेर लेंगे और बाप-भैया के रिश्तों के पुनर्स्थापन का दौर लौट आएगा। कितने खुशनसीब होंगे तब हम।
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उस रोज हम मंदिर गए। पूजा की थाली में एक रुपया चढ़ाया, तो पुजारी की त्योरियां चढ़ गईं। वह बोला, इतना गिरा हुआ रुपया चढ़ाते शर्म नहीं आती। मैंने कहा, गिरे हुए को गिरी नजर से देखना अपराध है। मैंने इसी रुपये का एक सेर देसी घी खाया है। वह बोला, तुमसे देवता नाराज होंगे कि तुम गिरा हुआ रुपया चढ़ाते हो। यह सुनकर मैंने झट-से गिरा हुआ रुपया उठाकर अपनी जेब में सेंत लिया। मुझे अच्छा लगा कि अब रुपये के लोभ-लालच से धर्म-कर्म को मानने वाले भी दूर होते जा रहे हैं। इससे सच्चे अर्थों में मनुष्यता की प्रतिष्ठा का मार्ग प्रशस्त होगा।
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रुपये के गिरने का एक लाभ यह है कि इससे जमाखोरी खत्म होगी। हर कोई सोचेगा कि इतने गिरे हुए रुपये को जमा कर क्या करेंगे। सरकारी मुलाजिम गिरते रुपये की घूस लेना बंद कर देंगे। संसद के भीतर इस गिरे हुए रुपये की गड्डियां लहराने की मशक्कत कोई नहीं करेगा। कोई अमीर-गरीब नहीं रहेगा। हर एक के पास गिरा हुआ रुपया होगा। गिरे हुए रुपये के मालिक को कौन भकुआ ऊंची नजरों से देखेगा!

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