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युद्ध के बीच : पुतिन की दरकती छवि के बावजूद समर्थन में खड़ी एक विचारधारा
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सार
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन।
- फोटो :
Twitter @MissJacque_line
विस्तार
एक लोकतांत्रिक देश, जिसमें दूसरे तमाम देशों की तरह बुराइयां हैं, लेकिन वह मुक्त विश्व का हिस्सा होना चाहता है। उस पर एक ऐसे पड़ोसी ने हमला किया है, जो आकार में उससे बहुत बड़ा है। वहां एक निर्मम तानाशाही है, जो सामूहिक अत्याचार करती है। इसके बावजूद छोटे-से उस लोकतांत्रिक देश ने एक साल तक बहादुरी से उसका मुकाबला किया, और अब भी कर रहा है। जबकि दुनिया के बड़े हिस्से को लगता था कि हमले के कुछ ही दिनों बाद उस लोकतंत्र की पराजय होगी।
कोई भी अमेरिकी, एक ऐसे देश का नागरिक, जो खुद को आजादी के प्रकाश स्तंभ के रूप में देखता है, जो जागरूक और समानता के जीवन मूल्यों का आग्रही है, वह इस युद्ध में यूक्रेन की विजय भला क्यों न चाहेगा? लेकिन अमेरिकी राजनीति में भी दो महत्वपूर्ण धड़े हैं, जो न सिर्फ यूक्रेन को मिल रहे पश्चिमी समर्थन का विरोध कर रहे हैं, बल्कि वे चाहते हैं कि रूस यह लड़ाई जीते। इनमें से एक छोटा-सा धड़ा अमेरिकी वामपंथियों का है, तो एक प्रभावी समूह दक्षिणपंथियों का है।
पुतिन इकलौते निरंकुश नहीं हैं, जिन्हें अमेरिकी दक्षिणपंथियों का समर्थन प्राप्त है। हंगरी के विक्टर ओर्बन भी रूढ़िवादियों के बड़े नेता के रूप में उभरे हैं, जो कंजर्वेटिव पॉलिटिकल ऐक्शन कमेटी की बैठकों के प्रभावी वक्ता हैं। लेकिन रूढ़िवादी ओर्बेन अपने लक्ष्य के बारे में स्पष्ट हैं, और उनकी बहुत आलोचना भी नहीं की जा सकती। अगर आप अपने देश को श्वेत राष्ट्रवाद और सामाजिक असमानता का केंद्र बनाना चाहते हों और लोकतंत्र सिर्फ कागज पर हो, जैसा हंगरी में है, तो ऐसी सरकार को हटाने का ओर्बेन का अभियान सही है। उनकी मॉडर्न रिपब्लिकन पार्टी के पास हंगरी के भविष्य का एक रोडमैप भी है।
लेकिन ओर्बेन उतने बड़े दक्षिणपंथी नेता नहीं हैं। न ही दुनिया भर में उनके इतने समर्थक-अनुयायी हैं, जितने रूस के तानाशाह राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हैं। पुतिन को पूजने वाले सिर्फ रूस में नहीं हैं, अमेरिका में भी दक्षिणपंथी वर्षों से उनके साथ खड़े हैं। मसलन, 2014 में नेशनल रिव्यू के एक स्तंभकार ने बगैर शर्ट के घुड़सवारी करते पुतिन की तस्वीर की गोल्फ खेलते बराक ओबामा की देहभाषा से तुलना की थी। यूक्रेन पर रूसी हमले से पहले रूसी सेना की कथित प्रभावी क्षमता की काफी तारीफ होती थी। वर्ष 2021 में अमेरिकी राजनेता टेड क्रूज ने रूस में सैनिकों की नियुक्ति से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए टिप्पणी की थी, 'सैन्य शक्ति कम रखना निश्चित तौर पर अच्छी सोच नहीं है।'
पुतिन के व्यक्तित्व को पूजने के क्या कारण हो सकते हैं? दरअसल दक्षिणपंथी सोच में अनेक लोग शक्तिशाली, प्रभावशाली और बेपरवाह व्यक्तित्व को पसंद करते हैं, जो अपनी सनक के सामने किसी को कुछ नहीं समझता, जो बौद्धिक खुलेपन और विविधता को सम्मान देने की परवाह नहीं करता। ऐसे लोगों ने पुतिन को अपने आदर्श के रूप में देखा। और पुतिन जिस देश के शासक हैं, उस रूस की कथित सैन्य क्षमता और आक्रामकता ने भी उन्हें आकर्षित किया। ऐसे लोगों का वर्षों से यह मानना रहा है कि पुतिन ने अपनी ताकत और सनक से रूस को एक बेहद ताकतवर देश बना दिया है। हालांकि प्रारंभ से ही यह स्पष्ट था कि विश्व को इस तरह से देखने का नजरिया भ्रामक और गलत है। आधुनिक विश्व में किसी राष्ट्र की शक्ति उसकी सैन्य क्षमता में नहीं, बल्कि उसकी आर्थिक मजबूती और तकनीकी क्षमताओं में निहित है। फिर यूक्रेन पर पुतिन के हमले ने यह और स्पष्ट कर दिया कि रूस की कथित बेहद ताकतवर सेना भी युद्ध लड़ने में कुशल नहीं है।
युद्ध में रूसी सैनिक इतने दयनीय रूप से विफल क्यों हुए? क्योंकि आधुनिक युद्ध सैनिकों द्वारा भुजाएं फड़काने से नहीं जीते जा सकते। आधुनिक युद्ध में जीत सैन्य संभार तंत्र, तकनीक और खुफिया क्षमताओं के जरिये ही संभव है। अभी तक के युद्ध में रूसी सैनिकों की प्रभावहीनता की तुलना में यूक्रेन ने शानदार क्षमता का परिचय दिया। यूक्रेन ने अगर रूस के सामने घुटने नहीं टेके हैं, तो निश्चय ही उसका एक बड़ा कारण उसे मिले पश्चिमी शस्त्रास्त्र हैं। पर यही अकेला कारण नहीं है। यूक्रेन ने अपनी सैन्य जरूरतों की पूर्ति में जिस अद्भुत मौलिकता का परिचय दिया है, वह भी उसकी मौजूदा संतोषजनक स्थिति का कारण है। फिर रूसी आक्रामकता के खिलाफ यूक्रेन के नागरिकों में मरने-मिटने का जो भाव है, रूसियों में वह नहीं है।
यूक्रेन के प्रति दुनिया भर में दक्षिणपंथियों का गुस्सा बढ़ रहा है। इसका कारण सिर्फ यह नहीं है कि जिस नेता को वे पूजते थे, वह कमजोर साबित हुआ है, बल्कि उनका गुस्सा इसलिए भी बढ़ रहा है, क्योंकि निरंकुश सत्ता और बेपरवाह ताकत के बारे में उनकी सोच भी गलत साबित हो रही है। यह गुस्से और हताशा का ही नतीजा है कि अमेरिका में दक्षिणपंथी लॉबी इस सुनियोजित प्रचार में लगी है कि यूक्रेन हार रहा है। दक्षिणपंथी सोच वाले और ट्रंप समर्थक अमेरिकी टेलीविजन शख्सियत टकर कार्लसन ने तो पिछले अगस्त में ही रूसी विजय की घोषणा कर दी थी, जबकि उसके कुछ ही दिनों बाद यूक्रेन ने युद्ध के एकाधिक मोर्चे पर रूस को करारा जवाब दिया था। अब भी प्रचारित किया जा रहा है कि जाड़े में यूक्रेन पर रूस भीषण सैन्य कार्रवाई की योजना बना रहा है। रूस की वह भीषण युद्धक कार्रवाई वस्तुत: अब भी जारी है, लेकिन जैसा कि एक यूक्रेनी अधिकारी ने बताया, कि रूस की भीषण युद्धक कार्रवाई से इतना कम हासिल हुआ है कि यूक्रेन के खिलाफ वह आक्रामकता अब दिखाई भी नहीं देती।
हालांकि इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस जीत नहीं सकता। लेकिन निकट भविष्य में रूस अगर यूक्रेन पर विजय हासिल करता है, तो वह टुकड़ों-टुकड़ों में ही हासिल हो सकती है, एकबारगी नहीं। यूक्रेन पर जीत इसलिए भी संभव है, क्योंकि अमेरिका में पुतिन समर्थक लॉबी बाइडन प्रशासन पर दबाव डालकर यूक्रेन को दी जाने वाली मदद में कटौती करवाने में सफल हो गई है। रूस की विजय अगर संभव होगी, तो उन अमेरिकी दक्षिणपंथियों की वजह से संभव होगी, जो उदार विश्व के पक्षधर नहीं हैं, जो जागरूक समाज को कमजोर समझते हैं और तानाशाह की ताकत के पक्ष में हैं।