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Deepfake 2024: छह देशों में चुनाव होंगे, डीपफेक की बारिश होगी

Sun, 31 Dec 2023 07:54 AM IST
गुलाम अहमद माइकल वेड
माइकल वेड Published by: गुलाम अहमद Updated Sun, 31 Dec 2023 07:54 AM IST
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सार
चुनावी धोखाधड़ी, कॉरपोरेट ब्लैकमेलिंग, बाजारों को अपने हितों के अनुरूप चालित करने और डीपफेक के कारण साइबर सुरक्षा से जुड़े खतरे के मामले वर्ष 2024 में बढ़ेंगे। ऐसे में, यह चर्चा, चिंता और लड़ाई सतत बनी रहेगी कि कोई लिखित सामग्री, कोई तस्वीर, कोई ऑडियो क्लिप या कोई वीडियो असली है या फर्जी।
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Deepfake misuse likely to increase in General Elections to be held in six countries in 2024
Deepfake 2024 - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

डीपफेक 2024 में बड़ी समस्या बनने वाला है। दरअसल डीपफेक तैयार करने के लिए जिस तकनीक की जरूरत पड़ती है, वह आज न सिर्फ पहले की तुलना में आसानी से उपलब्ध है, बल्कि कम लागत या कीमत में भी उपलब्ध है। इसके लिए जेनरेटिव एआई या कृत्रिम मेधा का इस्तेमाल किया जाता है। जेनरेटिव एआई के जरिये किसी भी शैली और किसी भी भाषा में ई-मेल लिखे जा सकते हैं। ऐसे में, इसकी कोई गारंटी नहीं कि सीएफओ की तरफ से आए ई-मेल वाकई उन्होंने ही लिखे हैं। ऐसे में, आश्चर्य नहीं कि सिलिकॉन वैली के अनेक लोग बगैर विराम चिह्नों के पोस्ट लिख रहे हैं-यही एक तरीका है, जिससे पता चल सकता है कि इसमें एआई की मदद नहीं ली गई है।



लिखित सामग्री को जांचने का खतरा तो है ही, लेकिन 2024 में असली खतरा आवाज और वीडियो से होगा। इलेवनलैब्स जैसी वॉयस क्लोनिंग सर्विसेज इतनी पेशेवर हैं कि वे हू-ब-हू आवाजों की क्लोनिंग कर लेती हैं। आवाज को जांचने की तकनीक जल्दी ही बेकाम की हो जाएगी। वॉयस मेल विश्वसनीय नहीं है। मैंने अपनी आवाज की क्लोनिंग करा ली है, लिहाजा जो भी पाठ मैं चुनूंगा,  वह मेरी ही आवाज में बोलेगा। लेकिन इसका भी एक खतरा है-गलत हाथों में चले जाने पर वह आवाज मेरे स्वर में न जाने क्या-क्या बक डालेगी।


इस लिहाज से ऑडियो पर तो ध्यान रखना ही होगा, लेकिन वीडियो ज्यादा महत्वपूर्ण साबित होने जा रहे हैं। वीडियो में दिख रहे व्यक्ति को उसकी ही आवाज में सुने जाने पर भ्रम पैदा होगा। जो उसने नहीं कहा, वीडियो में उसे भी कहते देखा जाएगा। जो उसने नहीं किया, वीडियो में वह करते भी उसे देखा जाएगा। ऐसे में, जाहिर है, पसोपेश, असमंजस और भ्रम की स्थिति पैदा होगी। इससे कॉरपोरेट जासूसी और भयादोहन को बल मिलेगा। वर्ष 2024  में दुनिया की आधी से अधिक आबादी चुनावों में हिस्सा लेगी। अमेरिका के अलावा भारत, इंडोनेशिया, मेक्सिको, रूस और ब्रिटेन सहित कई देशों में चुनाव होंगे।

मेरा मानना है कि इनमें से हर चुनाव में डीपफेक वीडियो बड़ी भूमिका निभाएंगे। मतदाताओं में व्याप्त भ्रम का असर चुनावी नतीजों पर भी पड़  सकता है। यूक्रेन और गाजा के मोर्चों पर डीपफेक वीडियोज पहले ही पहुंच चुके हैं, जिससे फैसले उन घटनाओं के आधार पर लिए जा रहे हैं, जो कभी घटी ही नहीं। चुनावी धोखाधड़ी, कॉरपोरेट ब्लैकमेलिंग, बाजारों को अपने हितों के अनुरूप चालित करने और डीपफेक के कारण साइबर सुरक्षा से जुड़े खतरे के मामले वर्ष 2024 में बढ़ेंगे। ऐसे में, यह चर्चा, चिंता और लड़ाई सतत बनी रहेगी कि कोई लिखित सामग्री, कोई तस्वीर, कोई ऑडियो क्लिप या कोई वीडियो असली है या फर्जी।

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