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वित्त मंत्री जी! आम टैक्सपेयर के लिए बढ़ाएं सभी तरह के अलाउंस
अतुल कुमार गर्ग
Updated Sat, 28 Jan 2017 04:17 PM IST
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सीए अतुल गर्ग
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इस साल पेश होने वाले बजट के बारे में चल रही सभी प्रकार की अनिश्चितताओं के बादल छट गए हैं और अब यह 1 फरवरी को ही पेश होगा। इस बार के बजट से आम टैक्सपेयर को काफी आशाएं हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि, नोटबंदी के बाद परेशान हुए लोगों को कुछ रिलीफ मिलनी चाहिए।
सैलरी क्लास को इस बार के बजट से काफी उम्मीदें हैं। उनकी मांग है कि स्टैण्डर्ड डिडक्शन को वापस लेकर के आया जाए। सरकार को भी कई सालों से इस बारे में कई कमेटियों से सुझाव मिले हुए हैं। सरकार को इसके बारे में बजट में घोषणा करनी चाहिए और इसकी सीमा 1.50 लाख रुपये कर देनी चाहिए।
अभी लोगों को जो कंवेंस अलाउंस मिलता है, उसको 800 रुपये से बढ़ाकर के 1600 रुपये किया गया था। लेकिन यह मेट्रो शहरों के हिसाब से काफी कम है। इसलिए वित्त मंत्री जी से अपेक्षा है कि वो इसे मेट्रो शहरों के लिए बढ़ाकर के 3 हजार रुपये प्रति माह और अन्य शहरों के लिए 2400 रुपये प्रति माह कर दें।
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बच्चों की पढ़ाई का खर्च बढ़ता जा रहा है, लेकिन इसके लिए जो टैक्स छूट मिलती है वो नाकाफी है। अभी यह 100 रुपये प्रति माह है, जो अधिकतम दो बच्चों के लिए है। यह अलाउंस 1997-98 में लाया गया था जिसको तब से लेकर अभी तक बढ़ाया नहीं गया है। अब इसको 2500 रुपये प्रति माह अधिकतम दो बच्चों के लिए किया जाना चाहिए।
इसी के साथ छात्रावास के खर्चों के लिए 300 रुपये प्रति माह प्रति बच्चा (अधिकतम दो बच्चों के लिए) मिलता है जो कि नाकाफी है। इसको भी बढ़ाकर के 5000 रुपये प्रति माह प्रति बच्चा कर देना चाहिए।
फाइनेंस एक्ट 1998 के सैलरी क्लास के लिए मेडिकल खर्च की लिमिट 15 हजार रुपये तय की गई थी जिसको वित्त मंत्री को अब बढ़ाकर के 50 हजार रुपये कर देना चाहिए।
इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी के तहत अभी 1.5 लाख रुपये की छूट मिलती है। यह छूट तब मिलती है जब कोई टैक्सपेयर एलआईसी, एनएससी, पीपीएफ, ईपीएफ, होम लोन का पेमेंट, बच्चों की ट्यूशन फीस, यूलिप, म्युचुअल फंड में निवेश करता है। यह लिमिट 2014-15 में तय की गई थी जिसको अब बढ़ाकर के 2.5 लाख रुपये किया जाना चाहिए।
अभी बजट को पेश होना बाकी है, इसलिए हम आशा करते हैं कि वित्त मंत्री जी इन बिंदुओं पर गौर करेंगे।
(लेखक ICAI नोएडा चैप्टर के पूर्व अध्यक्ष हैं और यह उनके निजी विचार हैं। )
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सैलरी क्लास को इस बार के बजट से काफी उम्मीदें हैं। उनकी मांग है कि स्टैण्डर्ड डिडक्शन को वापस लेकर के आया जाए। सरकार को भी कई सालों से इस बारे में कई कमेटियों से सुझाव मिले हुए हैं। सरकार को इसके बारे में बजट में घोषणा करनी चाहिए और इसकी सीमा 1.50 लाख रुपये कर देनी चाहिए।
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अभी लोगों को जो कंवेंस अलाउंस मिलता है, उसको 800 रुपये से बढ़ाकर के 1600 रुपये किया गया था। लेकिन यह मेट्रो शहरों के हिसाब से काफी कम है। इसलिए वित्त मंत्री जी से अपेक्षा है कि वो इसे मेट्रो शहरों के लिए बढ़ाकर के 3 हजार रुपये प्रति माह और अन्य शहरों के लिए 2400 रुपये प्रति माह कर दें।
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बच्चों की पढ़ाई का खर्च बढ़ता जा रहा है, लेकिन इसके लिए जो टैक्स छूट मिलती है वो नाकाफी है। अभी यह 100 रुपये प्रति माह है, जो अधिकतम दो बच्चों के लिए है। यह अलाउंस 1997-98 में लाया गया था जिसको तब से लेकर अभी तक बढ़ाया नहीं गया है। अब इसको 2500 रुपये प्रति माह अधिकतम दो बच्चों के लिए किया जाना चाहिए।
इसी के साथ छात्रावास के खर्चों के लिए 300 रुपये प्रति माह प्रति बच्चा (अधिकतम दो बच्चों के लिए) मिलता है जो कि नाकाफी है। इसको भी बढ़ाकर के 5000 रुपये प्रति माह प्रति बच्चा कर देना चाहिए।
फाइनेंस एक्ट 1998 के सैलरी क्लास के लिए मेडिकल खर्च की लिमिट 15 हजार रुपये तय की गई थी जिसको वित्त मंत्री को अब बढ़ाकर के 50 हजार रुपये कर देना चाहिए।
इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी के तहत अभी 1.5 लाख रुपये की छूट मिलती है। यह छूट तब मिलती है जब कोई टैक्सपेयर एलआईसी, एनएससी, पीपीएफ, ईपीएफ, होम लोन का पेमेंट, बच्चों की ट्यूशन फीस, यूलिप, म्युचुअल फंड में निवेश करता है। यह लिमिट 2014-15 में तय की गई थी जिसको अब बढ़ाकर के 2.5 लाख रुपये किया जाना चाहिए।
अभी बजट को पेश होना बाकी है, इसलिए हम आशा करते हैं कि वित्त मंत्री जी इन बिंदुओं पर गौर करेंगे।
(लेखक ICAI नोएडा चैप्टर के पूर्व अध्यक्ष हैं और यह उनके निजी विचार हैं। )