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सौदे के बाद भी राह कठिन

Tue, 14 Jul 2015 08:52 PM IST
सुजेन डाली एवं लिज एल्डरमैन
सुजेन डाली एवं लिज एल्डरमैन Updated Tue, 14 Jul 2015 08:52 PM IST
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Deal on Greek Debt Crisis Is Reached, but Long Road Remains

अपने देश को वित्तीय पतन से बचाने के लिए कर्जदाताओं द्वारा नई व्यापक रियायत पर मजबूर ग्रीस के प्रधानमंत्री एलेक्सिस सिप्रास हताश सांसदों और घबराए मतदाताओं के साथ सौदे पर अंतिम फैसला करने के लिए सोमवार को स्वदेश लौटे। यूरोपीय नेताओं के साथ रात भर की माथापच्ची के बाद वह जिस समझौते पर तैयार हुए, उससे उन्हें अगले पांच वर्षों में तीसरा अंतरराष्ट्रीय राहत पैकेज मिलेगा, जो 86 अरब यूरो यानी 96 अरब डॉलर का होगा। इसके साथ ही उन्हें 300 अरब यूरो से ज्यादा के मौजूदा कर्ज को आसान शर्तों के साथ चुकाने और अल्पकालीन आर्थिक प्रोत्साहन योजना का अवसर भी मिलेगा। पर ग्रीस को इसके लिए कई उपाय करने होंगे, जिसमें पेंशन में कटौती, कर में बढ़ोतरी और गहन अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण शामिल हैं।

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सिप्रास को बुधवार तक समझौते के प्रमुख तत्वों पर संसद से मोहर लगवानी होगी, जिनमें से ज्यादातर वे शर्तें हैं, जिनका वह और उनकी वामपंथी सीरिजा पार्टी महीनों से विरोध कर रही थी। वह ऐसे समय में ब्रुशेल्स से लौटे हैं, जब देश में राजनीतिक उथल-पुथल जारी है, उनकी अपनी पार्टी में विद्रोह है, गठबंधन के सहयोगी ने इस सौदे को खारिज कर दिया है और लंबे समय से चल रहे इस ड्रामे में खुद उनकी भूमिका पूरी तरह बदल गई है। वह उन साधारण नागरिकों के लिए भी लौट आए हैं, जो लंबे समय से स्थापित जीवन-शैली और परंपराओं को बदलने वाले व्यापक आर्थिक परिवर्तन से डरे हुए हैं।
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सौदे पर हस्ताक्षर करते हुए (बेशक अनिच्छा से ही) अचानक सिप्रास ने खुद को उन नीतियों का ही समर्थक पाया, जिनका वह विरोध करते थे और खुद के पैदा किए संकट को कम करने की उम्मीद की। क्या उन्हें समझौते में शामिल नीतियों का क्रियान्वन करना चाहिए, या वह केवल बाजार आधारित बदलावों को देखेंगे, जिसकी मांग कर्जदाता देश कर रहे हैं और ग्रीस की एक के बाद एक आने वाली सरकारें उन्हें पूरा करने में विफल रही हैं।
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जैसे ही ब्रुशेल्स में वार्ता खत्म हुई, सिप्रास, जो कभी मितव्ययिता की नीति का विरोध करते थे, ने कहा कि उन्होंने ग्रीस की अर्थव्यवस्था में कटौती कर दी है और अपने नागरिकों को कष्ट में छोड़ दिया है। वह अब कर्जदाताओं द्वारा 'ब्लैकमेल करने' जैसी बातें नहीं कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नया पैकेज ग्रीस की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा और फिर से सही हालत में आने की क्षमता प्रदान करेगा।

जर्मनी और अन्य देश के लिए, जो अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने की ग्रीस की अक्षमता से तंग आ चुके थे, यह भरोसा जरूरी था कि एथेंस की सरकार अपनी प्रतिबद्धता पर टिकी रहेगी। लेकिन कुछ ग्रीसवासियों और जर्मनी के नेतृत्व वाली नीतियों के आलोचकों के अनुसार, सहायता के लिए शर्त के रूप में बजट में भारी कटौती का प्रस्ताव ग्रीस की संप्रभुता का अनुचित उल्लंघन है।

बहरहाल, यह समझौता ग्रीस के उस वित्तीय संकट को टालता दिख रहा है, जो इस हद तक बढ़ गया था कि ग्रीस को यूरो मुद्रा का परित्याग करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता था। पूरे यूरोप ने राहत की सांस ली कि एक गंभीर संकट टल गया, लेकिन इस बात पर बहस जारी है कि क्या जर्मनी और उसके सहयोगियों ने ग्रीस के प्रति जो कठोर रवैया अपनाया, और जिसने सिप्रास को एक बेकाबू और अस्थिर राजनीतिक हालत में डाला, आगे भी मुसीबत का कारण बन सकता है।

जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने एक संवाददाता सम्मेलन में सौदे को स्वीकार करने के अपने फैसले के बारे में बताते हुए कहा कि 'लाभ नुकसान से ज्यादा है'। साथ ही उन्होंने कहा कि जर्मन संसद भी मंजूरी देती है। ग्रीस के बारे में उन्होंने कहा कि हमने जिस देश की मदद की है, उसने सुधारों के प्रति अपनी इच्छा और तत्परता का इजहार किया है।

समझौता करके एथेंस लौटने के बाद सिप्रास ने दिन का ज्यादातर समय पार्टी के अधिकारियों के साथ बंद दरवाजे के भीतर बैठक में बिताया। लेकिन शाम को सौदे के कुछ नतीजे सामने आने शुरू हो गए। उनकी पार्टी के अति वाम धड़े ने घोषणा की कि वह इस नए प्रस्ताव के खिलाफ वोट करेगा, जबकि उनके दक्षिणपंथी गठबंधन सहयोगी ने कहा कि यह सौदा स्वीकार करने योग्य नहीं था।

लेकिन कई अन्य पार्टियों के पैकेज के पक्ष में वोट करने पर सहमत होने के बावजूद सिप्रास को संभवतः सबसे ज्यादा मुश्किल संसद की सभापति जोई कोन्स्तान्तोपोलु से होगी, जो सिप्रास की पार्टी की सदस्य भी हैं और जिन्होंने पिछले दिनों सिप्रास के एक संकीर्ण प्रस्ताव पास कराने की कोशिश पर आपत्ति जताई थी।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि कोन्स्तान्तोपोलु कानूनों की प्रबल समर्थक हैं और वह उन्हें त्वरित प्रक्रिया का इस्तेमाल करने से रोक देंगी, जो यूरोपीय संघ के नेताओं को संतुष्ट करने के लिए इस सौदे को समय पर मंजूरी दिलाने के लिए जरूरी है। इस सौदे के कुछ हिस्से बुधवार तक पारित हो जाने चाहिए और ज्यादातर बुधवार से एक हफ्ते के भीतर।

इस हफ्ते सौदे के जिन तत्वों को निपटाने की जरूरत है, उनमें ग्रीक द्वीप के विशेष कर दर्जे का अंत सहित मूल्यवर्धित कर में बढ़ोतरी, पेंशन व्यवस्था में सुधार और अगर सरकार बजट लक्ष्य हासिल करने में विफल रहती है, तो स्वतः खर्च में कटौती लागू करना शामिल है। अगर यह सौदा ग्रीस के लिए एक राजनीतिक भूचाल है, तो वह उसे बड़े आर्थिक बदलाव के मद्देनजर मंथन करने को मजबूर भी कर सकता है।


इसका उद्देश्य ग्रीस को एक बार फिर उन मुद्दों पर विचार करने के लिए विवश करना है, जिसे उसने वर्षों से नजरंदाज किया है, जिसमें विश्वसनीय आर्थिक आंकड़े हासिल करने जैसी सामान्य बात के साथ वस्तु एवं सेवा बाजार खोलने, पेंशन प्रणाली को व्यवस्थित बनाने, कर संग्रहण में बढ़ोतरी करने और निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ने जैसे जटिल विषय शामिल हैं।

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