तीसरे देश की तलाश में क्रिकेट...।

प्रकाश पुरोहित Updated Thu, 23 Jan 2014 07:35 PM IST
cricket- in search of third nation
इस तरह तो क्रिकेट खत्म ही हो जाएगा! यदि क्रिकेट से अनिश्चितता निकाल दें, तो वह भी और खेलों की तरह नहीं हो जाएगा?  जो क्रिकेट की जान और पहचान है, उसे ही आज खत्म किया जा रहा है और जानकार कुछ नहीं कह रहे हैं। जब यह लगा कि घरू टीम के अंपायर शकूर राणा हो जाते हैं, तभी तीसरे देश के यानी तटस्थ अंपायर का नियम शुरू किया गया था ना! किसलिए किया था कि क्रिकेट की अनिश्चितता तो बची रहे। वरना ग्यारह खिलाड़ी और दो अंपायर मिलकर किसी भी टीम को हरा सकते थे। आप बाद में लाख कहते रहो कि अंपायरिंग गलत हुई, मगर रिकॉर्ड बुक में तो आपकी हार दर्ज हो गई न!

इसी क्रम में आगे बढ़ें, तो थर्ड अंपायर की व्यवस्था भी इसीलिए हुई कि क्रिकेट में कुछ भी निश्चित नजर न आ जाए। निश्चितता को दूर करने में क्रिकेट के रखवालों ने कभी सुस्ती नहीं दिखाई, मगर अब न जाने क्या हो रहा है कि क्रिकेट लगातार निश्चितताओं का खेल होता जा रहा है।

देखिए, इंग्लैंड में हम उसी तरह धुले थे, जैसे ऑस्ट्रेलिया में धुल रहे थे। फिर इंग्लैंड की टीम वन डे खेलने आई तो वह उसी तरह धुली थी, जैसे इन दिनों पाकिस्तान के हाथों यूएई में धुल रही है। यानी जब भी विदेशी दौरे पर टीम जाती है, तो घरू टीम की जीत तय होती जा रही है। अब यह तो कहिए मत कि पाकिस्तान न घर पर है, ना घाट पर, क्योंकि यूएई भी तो एक तरह से पाकिस्तान ही है। यानी इंग्लैंड को परदेस में खेलना पड़ रहा है और पाकिस्तान को विदेश में रहकर भी घर में खेलने का सुख मिल रहा है। शारजाह में हम इसीलिए तो पाकिस्तान से हार जाते थे।

तो अब क्या किया जाए! तयशुदा नतीजे अगर कुछ दिन और आते रहे, तो क्रिकेट खत्म ही समझो। क्या यह संभव नहीं है कि जिस तरह तीसरे अंपायर तय किए जाते हैं, उसी तरह दोनों टीम के लिए जरूरी कर दिया जाए कि वे तटस्थ देश में ही खेलेंगे।

तब किसी को शिकायत नहीं रहेगी कि वहां का मौसम ठीक नहीं था, हवा तेज थी, विकेट उछाल वाला था, स्पिन ले रहा था या गेंद स्विंग हो रही थी। तब सही हार-जीत होती और यह नहीं कहा जाता कि अपनी गली के शेर हैं! इससे क्रिकेट की अनिश्चितता और बढ़ जाएगी और आईपीएल में कमाई भी! शायद दूसरी बात ज्यादा असर करे और यह बदलाव लागू हो जाए। वैसे भी देखनेवाले आ कहां रहे हैं, इन दिनों!

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