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कोरोना से लड़ता दक्षिण

Mon, 13 Apr 2020 12:07 AM IST
bhaskar sai भास्कर साई
Updated Mon, 13 Apr 2020 12:07 AM IST
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Coronavirus case News in Hindi : South India fights against Corona
देश में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। - फोटो : PTI

डेढ़-दो महीने पहले तक भी जो कोरोना वायरस हमारे यहां के अखबारों में विदेश पेज पर सिंगल कॉलम की खबर हुआ करता था, आज वह पूरी दुनिया के साथ हमारे देश के प्रत्येक हिस्से में फैलकर आतंक का पर्याय बन गया है, और मीडिया के लिए आज यही एकमात्र खबर है।


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वह दक्षिण भारत भी इस महामारी से जूझ रहा है, जो अमूमन अपनी शानदार स्वास्थ्य सुविधा पर गर्व करता है। संक्रमण के मामले तमिलनाडु में 969, तेलंगाना में 473, केरल और कर्नाटक में 364-364 तथा आंध्र प्रदेश में 363 हैं।

केरल देश के उन राज्यों में है, जहां कोविड-19 के संक्रमण के शुरुआती मामले सामने आए थे, लेकिन मुख्यमंत्री पिनरई विजयन के नेतृत्व में राज्य सरकार ने अब तक बेहद प्रभावी ढंग से इस महामारी का मुकाबला किया है। केरल में कोविड-19 से मारे जाने वालों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम है, हालांकि विदेशों में अब तक इस महामारी से केरल के करीब 24 लोगों की मृत्यु हुई है।

राज्य के डेढ़ लाख से अधिक लोग निगरानी में हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, पिछले सप्ताह 10,717 लोगों के सैंपल्स जांच के लिए गए थे, जिनमें से 9,607 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आई है। इस बीच कसरगोड के जिला मेडिकल अस्पताल को कोविड-19 अस्पताल में तब्दील कर दिया गया है।

जबकि एर्नाकुलम के कलामसरी स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में सैंपल लेने का एक ऐसा केंद्र स्थापित किया गया है, जहां सैंपल लेने वाले स्वास्थ्य कर्मचारी के संक्रमित होने की आशंका नहीं रहती, हां, दस्ताने को जरूर सैनिटाइज करना पड़ता है। सैंपल लेने वाले ऐसे अनेक केंद्रों की स्थापना की जा सकती है। इससे ज्यादा से ज्यादा सैंपल लिए जा सकेंगे, और इस तरह के केंद्र वैसे इलाकों में बेहद उपयोगी हैं, जहां संक्रमण के समुदाय के स्तर पर फैलने की आशंका है।

चूंकि तमिलनाडु में संक्रमितों की संख्या सर्वाधिक है, ऐसे में, यहां कोरोना के खिलाफ अभियान का नेतृत्व मुख्यमंत्री पलानीस्वामी कर रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य मंत्री सी विजय भास्कर तथा स्वास्थ्य सचिव बीला राजेश उनके साथ सहयोग कर रहे हैं; ये दोनों खुद भी डॉक्टर हैं।

ऐसे ही मुख्य सचिव के नेतृत्व में एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है, तो पूरे प्रदेश में कोविड-19 से निपटने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में 12 टीमें गठित की गई हैं। इसके अलावा तमिलनाडु सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग को बढ़ावा देने के लिए जहां व्यापक स्तर पर अभियान चलाया है, वहीं इसकी भी व्यवस्था की है कि लॉकडाउन के दौरान आवश्यक वस्तुओं की कोई कमी न हो।

स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सरकारी और निजी क्षेत्रों में 22,000 आइसोलेशन बेड तथा 5,934 आईसीयू बेड तैयार रखे हैं। तमिलनाडु में वायरस संक्रमितों की बड़ी संख्या उन लोगों की है, जिन्होंने दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात के आयोजन में हिस्सा लिया था। आश्वस्ति की बात इतनी है कि उस आयोजन में शामिल होने वाले तमिलनाडु के 1,103 लोगों की शिनाख्त कर ली गई है। दरअसल तब्लीगी जमात का मामला सामने आने के बाद पलानीस्वामी सरकार ने राज्य में जमात के लोगों की तलाश का काम शुरू कर दिया था।

मुख्यमंत्री की अपील के बाद जमात से जुड़े लोगों ने खुद ही हेल्पलाइन से संपर्क करना शुरू कर दिया। संक्रमितों की त्वरित स्क्रीनिंग के लिए सरकार ने एक लाख रैपिड टेस्ट किट्स का ऑर्डर दिया है। चीन से मंगाए जाने वाले इन टेस्ट किट्स से 30 मिनट में ही संक्रमण का पता चल जाएगा। इससे राज्य में संक्रमितों का तेजी से पता लगाया जाना संभव हो सकेगा। सरकार ने वेंटिलेटर, पीपीई तथा और ज्यादा मास्क के भी ऑर्डर दिए हैं। तमिलनाडु में कोविड-19 की जांच के 20  केंद्र हैं तथा जांच केंद्रों की संख्या और बढ़ाने के लिए राज्य सरकार केंद्र की अनुमति का इंतजार कर रही है।

तेलंगाना को इसका श्रेय दिया जाना चाहिए कि उसने देश का पहला स्वतः चालित कोविड-19 मॉनिटरिंग सिस्टम्स ऐप विकसित किया है। इसका लक्ष्य संक्रमितों की शिनाख्त और उनकी निगरानी तथा मुख्यमंत्री तथा स्वास्थ्य विभाग को इससे जुड़ी पल-पल की जानकारी मुहैया कराना है। इस ऐप का फायदा यह है कि इससे स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर संक्रमितों का आंकड़ा जुटाने की परेशानी से बच जाते हैं। वैसे भी मुख्यमंत्री ने राज्य को कोविड-19 से मुक्त करने का वादा किया है।

आंध्र प्रदेश, जहां अनेक लोगों को पहले ही क्वरंटीन केंद्रों में भेजा गया है, की सरकार संक्रमितों की शिनाख्त करने के लिए पूरे राज्य में स्वास्थ्य जांच करवा रही है। आंध्र प्रदेश में भी वायरस दिल्ली से लौटे तब्लीगी जमात के सदस्यों के कारण फैला, और संक्रमितों की कड़ी इस तरह जुड़ती चली गई।

चूंकि राज्य में संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में, मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने अधिकारियों को हर जिले में जांच प्रयोगशाला गठित करने तथा हर अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड बनाने के निर्देश दिए हैं। आंध्र में भी तब्लीगी जमात के सदस्यों, उनके परिवार जनों तथा उनके संपर्क में आए तमाम लोगों की जांच को प्राथमिकता में रखा गया है।

कर्नाटक में स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की सिफारिशों के मुताबिक प्रयोगशालाएं गठित की हैं। मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने पिछले दिनों केरल से लगती सीमा को यह कहते हुए बंद कर दिया कि इसी सीमा से कर्नाटक के सीमांत जिलों में कोरोना वायरस फैला। सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों ही राज्यों को इस मामले में सहमति बनाने के लिए कहा था। लेकिन येदियुरप्पा इस सीमा को खोलना नहीं चाहते।

कोविड-19 से लड़ाई के लिए येदियुरप्पा ने अपने एक साल का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में दिया है और कोरोना के खिलाफ अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं के प्रति सम्मान दिखाते हुए हाल ही में सिर्फ एक वक्त भोजन किया। दूसरी ओर, पिनरई विजयन ने केरल से लगती तमिलनाडु की सीमा को बंद करने की संभावना को खारिज कर दिया। उनका कहना था कि राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के कारण आवाजाही बंद है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं तमिलनाडु को जोड़ती सड़कों को बंद कर दूं। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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