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खुद भी बचें और उन्हें भी बचाएं

Wed, 13 May 2020 04:05 AM IST
योगेश साहू डॉ. आर कुमार-नेत्र रोग विशेषज्ञ तथा जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ
डॉ. आर कुमार-नेत्र रोग विशेषज्ञ तथा जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ Published by: योगेश साहू Updated Wed, 13 May 2020 04:05 AM IST
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Coronavirus Case News In Hindi : Save yourself and save them
मुंबई के धारावी में एक निजी क्लीनिक के बाहर लोग कतार में खड़े नजर आए। - फोटो : PTI

महामारी फैलाने वाले खतरनाक वायरस ने हमारे प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के परिसरों में भी दस्तक दी है और बड़ी संख्या में डॉक्टरों, नर्सों और अर्ध चिकित्सा कर्मियों जैसे अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को भी संक्रमित किया है। इसी वजह से सिटी ब्यूटीफूल चंडीगढ़ में 29 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव मामले बढ़कर 73 हो गए थे।


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इसने अस्पतालों में संक्रमण फैलने के जोखिम की ओर ध्यान खींचा, जो कि मरीजों, उनकी देखभाल करने वालों के साथ ही अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के जीवन के लिए घातक हो सकता है। गैर कोविड मरीजों के लिए सारे अस्पतालों को बंद करने के प्रशासन के फैसले में खामियां हैं।

वास्तव में इमरजेंसी के आधार पर कोविड के लिए समर्पित अस्पताल स्थापित किए जा सकते थे। इसके लिए आर्मी की मदद से क्रिकेट स्टेडियम जैसी जगहें भी अस्पताल में बदली जा सकती थीं। संक्रमण के बारहमासी स्रोत के रूप में अस्पतालों के मद्देनजर रोगी सुरक्षा का मुद्दा समय-समय पर विश्व समुदाय का ध्यान आकर्षित करता रहा है।

हालांकि मरीजों के जरिये घातक वायरस के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के संपर्क में आने का मुद्दा कोरोना के हजारों कीमती जानें लेने के बाद ही सामने आया है। अब तो यह आधिकारिक रूप से पुष्ट हो चुका है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को एचएआई ( अस्पताल से मिले संक्रमण) का जोखिम हो सकता है।

कोरोना ने सारे प्रतिमान ही बदल दिए हैं कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी जोखिम में हैं। बुजुर्ग और ऐसे लोग, जिनकी प्रतिरोधक प्रणाली कमजोर है, उनके संक्रमित होने की आशंका अधिक है। जोखिम के कुछ कारक हैं, लंबे समय तक अस्पताल में रहना, कैथेटर या विंडपाइप का इस्तेमाल, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का ठीक से हाथ नहीं धोना और एंटीबायोटिक्स का दुरुपयोग इत्यादि।

अमेरिका के एक अनुमान के मुताबिक, हर साल अस्पताल से मिले संक्रमण से 17 लाख लोग ग्रस्त होते हैं, जिनमें 99,000 की मौत हो जाती है। भारत, जहां जवाबदेही और जागरुकता की कमी है, यह संख्या बहुत बड़ी हो सकती है।

दुनिया भर में अस्पतालों में एचएआई यानी अस्पताल में होने वाले संक्रमण को कैसे कम किया जाए? इसके लिए ये कदम उठाए जा सकते हैंः

  • स्वास्थ्य कार्यकर्ता नियमित साबुन और पानी से हाथ धोएं।
  • अत्यंत आवश्यक हो तभी कैथेटर, रिले ट्यूब का इस्तेमाल करें।
  • सर्जिकल साइट की जगह त्वचा को अच्छी तरह से साफ करें।
  • स्वास्थ्य कार्यकर्ता बालों को ढकने वाले कवर, मास्क, गाउन, बूट और ग्लोव्स पहनें। रोगी और आगंतुकों से फैलने वाले संक्रमण के स्रोत को नियंत्रित करें।

डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की खबरें सारे देश से आ रही हैं। आरंभिक अनुमान के मुताबिक, 26 अप्रैल तक पांच सौ स्वास्थ्य कार्यकर्ता संक्रमित थे, इस आंकड़े को अपडेट करने की जरूरत है। अमेरिका में 14 अप्रैल तक नौ हजार स्वास्थ्य कार्यकर्ता संक्रमित थे।

आंकड़ों के मुताबिक, चंडीगढ़, दिल्ली, हैदराबाद, चेन्नई, मुंबई और श्रीनगर इत्यादि शहरों में अधिकांश संक्रमित स्वास्थ्य कार्यकर्ता गैर कोविड-19 ऑपरेशन से जुड़े थे और उन्हें अच्छी गुणवत्ता के एन-95 मास्क तथा पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्वीपमेंट (पीपीई) उपलब्ध नहीं कराए गए। चंडीगढ़ में तो 75 फीसदी प्रभावित इमरजेंसी क्षेत्र में गैर कोविड-19 मरीजों का इलाज कर रहे थे और अक्सर पीपीई की कमी तथा आईसीयू में काम करने के प्रशिक्षण के अभाव की शिकायत कर रहे थे।

लैंसेंट के एक आलेख के मुताबिक, कोविड-19 का इलाज कर रहे अस्पतालों में तैनात स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को थकावट, वरीयता के आधार पर मरीजों के चयन के कठिन फैसले की पीड़ा और संक्रमण के जोखिम के अलावा रोगियों और सहकर्मियों को खोने का दर्द होता है।

यह महत्वपूर्ण है कि बड़े स्तर पर सरकारें और समाज स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को न केवल पर्याप्त प्रशिक्षण और सुरक्षा के बिना मोहरे की तरह तैनात करने से बचें, बल्कि उनके साथ मानवीय बर्ताव करें और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने इमरजेंसी डिपार्टमेंट में काम करने वाले प्रत्येक स्वास्थ्य कार्यकर्ता के लिए एन-95 मास्क और उच्च गुणवत्ता के पीपीई किट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसी तरह से ओपीडी में काम करने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने की जरूरत है।

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