फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Coronavirus Case News In Hindi : Post Lockdown Strategy

लॉकडाउन के बाद की रणनीति

Fri, 17 Apr 2020 06:53 AM IST
K S Tomar केएस तोमर
Updated Fri, 17 Apr 2020 06:53 AM IST
विज्ञापन
Coronavirus Case News In Hindi : Post Lockdown Strategy
नई दिल्ली में लॉकडाउन के दौरान टैंकर से पानी भरने के लिए खड़े लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग के नियम को तोड़ते दिखे। - फोटो : PTI

इक्कीस दिन के लॉकडाउन की सफलता और उसे आगामी तीन मई तक बढ़ाने के फैसले ने केंद्र और राज्य सरकारों के सामने जांच की सुविधा बढ़ाने, वायरस के प्रसार के पैटर्न को परखने, असंगठित क्षेत्र में रोजगार खो चुके 40 करोड़ लोगों को सुरक्षा देने, डॉक्टरों तथा चिकित्साकर्मियों की सुरक्षा करने, लघु तथा मध्यम स्तर की औद्योगिक इकाइयों के लिए पैकेज की घोषणा करने, कट चुकी 80 फीसदी रबी फसल का प्रबंधन करने, दूसरी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों का इलाज करने तथा पंजाब में फंसे 80,000 अनिवासी भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने जैसी कई चुनौतियां पेश की हैं।


loader

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम  संबोधन में स्पष्ट किया कि लॉकडाउन बढ़ाने के मामले पर सर्वसम्मति बनने के बाद ही यह फैसला लिया गया तथा कई राज्यों ने अपने स्तर पर यह कदम पहले ही उठा लिया, पर केंद्र सरकार हॉटस्पॉट्स पर 20 अप्रैल तक नजर रखेगी, जिसके बाद कुछ और छूटों की घोषणा की जाएगी। प्रधानमंत्री ने नए पैकेज की घोषणा नहीं की, पर सात सूत्री सुझावों का पालन करने पर जोर दिया।

विश्लेषकों का मानना है कि राज्यों द्वारा एक तरह की नीति अपनाने तथा प्रधानमंत्री का सर्वसहमति बनाने के लिए सक्रियता दिखाने के कारण भारत ने अब तक कोरोना वायरस को सामुदायिक स्तर पर फैलने से रोक दिया है। लॉकडाउन बढ़ाने समेत दूसरी रणनीतियों पर सहमति बनाने के लिए पहले के अपने रुख से परे हटकर प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं से बात की।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, अगर 24 मार्च से लॉकडाउन लागू करने का समयोचित फैसला नहीं लिया जाता, तो 14 अप्रैल तक देश में कोरोना से मौत का आंकड़ा 8.20 लाख को पार कर जाता। उनका यह भी कहना है कि बीसीजी के टीके के कारण भी हमारे यहां इस वायरस से लड़ने की इम्युनिटी है, जबकि विकसित देशों में यह टीका नहीं लगाया जाता।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का यह भी दावा भी उम्मीद जताने वाला है कि देश में अब तक इस वायरस के सामुदायिक स्तर पर फैलने का कोई संकेत नहीं है। वैश्विक स्तर पर दृश्य दूसरे हैं, तथा संक्रमण तथा मौत के निरंतर बढ़ते आंकड़ों से अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, स्पेन आदि खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।

विशेषज्ञ लॉकडाउन के बढ़ाए जाने को सकारात्मक मान रहे हैं, क्योंकि इससे राज्यों को संक्रमण के नए मामलों की जांच का अवसर मिल जाएगा, जिससे इस बारे में जानकारी मिल सकेगी कि समुदाय के स्तर पर वायरस के फैलने की आशंका कितनी है। नीति नियंताओं और राज्य सरकारों की चिंता का बड़ा कारण यही है।

महाराष्ट्र ने बड़े पैमाने पर जांच शुरू की है। मध्य प्रदेश ने प्रवासी मजदूरों तक जांच का पैमाना बढ़ा दिया है। उत्तर प्रदेश ने पूल टेस्टिंग समेत बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है। बिहार ने आउटडोर मरीजों के लिए दरवाजे खोले हैं और घर-घर जांच हो रही है। पश्चिम बंगाल ने लॉकडाउन को मानवीय चेहरा देने की कोशिश की है।

तेलंगाना ने जरूरी चीजों के वितरण पर जोर दिया है, तो हरियाणा औद्योगिक गतिविधियां शुरू करना चाहता है। तमिलनाडु और पंजाब वायरस को रोकने के लिए सख्ती बरत रहे हैं, तो राजस्थान ने अपनी गतिविधियां हॉटस्पॉट्स पर केंद्रित रखी हैं। केरल, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश आदि राज्य कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।

लॉकडाउन बढ़ा देने के बाद केंद्र और राज्य सरकारों के सामने असली चुनौती है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती जांच का दायरा बढ़ाने की है, ताकि संक्रमितों की सही संख्या का पता चल सके। राज्यों को जांच के लिए प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ानी होगी, और इस मामले में धन की कमी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि केंद्र पर्याप्त मदद कर रहा है।

दूसरी बड़ी प्राथमिकता डॉक्टरों और दूसरे चिकित्साकर्मियों की सुरक्षा होनी चाहिए। वे जोखिम उठा रहे हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा के साथ पीपीई की खरीद, पर्याप्त बेड और वेंटिलेटर्स का इंतजाम होना चाहिए। कोरोना के खिलाफ जंग में लगे डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों पर हाल में हुए हमले बेहद गंभीर हैं, लिहाजा केंद्र को ऐसे हमलों पर सख्त सजा के प्रावधान वाला अध्यादेश लाना चाहिए।

तीसरी बात यह कि लॉकडाउन के बाद की रणनीति पर काम करने के लिए प्रधानमंत्री को एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स गठित करना चाहिए, जिसमें शीर्ष अर्थशास्त्री हों। देश में अस्पतालों के बंद होने से अनेक गंभीर मरीजों का जीवन खतरे में पड़ गया है। इनमें रोज डायलिसिस कराने वाले हैं, तो कीमोथैरेपी कराने वाले कैंसर के मरीज भी, अविलंब ऑपरेशन की जरूरत वाले दिल के रोगी भी, तो गंभीर स्थिति में पहुंची गर्भवती महिलाएं भी।

ऐसे ही, प्रधानमंत्री का नया नारा, 'जान भी है और जहान भी' पहले के नारे 'जान है, तो जहान है' से आगे की रणनीति का संकेत देता है। ऐसे में, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए योजना की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने कहा है कि असंगठित क्षेत्र के 40 करोड़ कर्मचारी गरीबी के दायरे में आ जाएंगे। इनका अस्तित्व बचाने के लिए सरकार को बजट में 10 लाख करोड़ रुपये का आवंटन करना होगा। 

अमेरिका में एच-1 वीजा प्राप्त हजारों भारतीय सड़कों पर आ जाने वाले हैं, क्योंकि उनके वीजा नवीकरण की कोई संभावना नहीं है। ऐसे ही, कोरोना के कारण पंजाब में फंसे करीब 80,000 अनिवासी भारतीयों को ब्रिटेन, अमेरिका और दूसरे देशों में भेजने की समस्या भी बड़ी है। कोरोना के खिलाफ जंग में राजस्थान के भीलवाड़ा मॉडल की देश-दुनिया में तारीफ हुई है। लिहाजा जांच पर जोर देने और लॉकडाउन को सख्ती से लागू करने के इस मॉडल को दूसरे राज्य और केंद्र सरकार लागू करें, यही तार्किक है। 

दक्षिण कोरिया के इंटरनेशनल वैक्सीन इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. जेरेमी एच किम के मुताबिक, कोरोना की वैक्सीन शायद 2021 में उपलब्ध हो। उन्होंने कहा है कि संक्रमण के बारे में जानने के लिए भारत को जांच का दायरा व्यापक करना होगा, जिससे सामुदायिक स्तर पर वायरस के फैलने के खिलाफ रणनीति बनाई जा सकती है। (लेखक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed