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नजरिया: दक्षिण में कांग्रेस को मजबूती मिलेगी, तमिलनाडु में सीमित हुए भाजपा के विकल्प

Sun, 14 May 2023 07:01 AM IST
r.rajgopalan राजगोपालन आर. राजगोपालन
Updated Sun, 14 May 2023 07:01 AM IST
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सार
कर्नाटक के नतीजे का दक्षिण में असर पड़ेगा और वहां की पार्टियां कांग्रेस व गांधी परिवार के प्रति नरमी का परिचय देंगी। इसके बाद तमिलनाडु में भाजपा के लिए अन्नाद्रमुक के साथ गठजोड़ करने के अलावा चारा नहीं है।
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Congress will gain in South india after Karnataka Results
सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार - फोटो : ट्विटर/सिद्धारमैया

विस्तार

कर्नाटक के मतदाताओं ने अपना फैसला कर दिया है। उन्होंने कांग्रेस को राज्य की सत्ता सौंपी है। जाहिर है, कर्नाटक का चुनावी नतीजा भाजपा के खिलाफ है, जिसने हर बार की तरह जोरदार ढंग से चुनाव प्रचार किया था। हालांकि अनेक जगह जीत का अंतर बेहद मामूली, लगभग 1,000 वोटों का है, लेकिन कांग्रेस ने भाजपा की तुलना में लगभग दोगनी सीटें जीती हैं और कांग्रेस के लिए यह एक बड़ी जीत है। दरअसल कर्नाटक के मतदाता बदलाव चाहते थे, क्योंकि वे भाजपा की सरकार से तंग आ गए थे। कर्नाटक में भाजपा की यह हार बसवराज बोम्मई की भविष्य की राजनीति को भी प्रभावित करने वाली है, क्योंकि मुख्यमंत्री बनने के बाद वह भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहे। चूंकि कर्नाटक में भाजपा की यह हार बड़ी है, इसलिए भी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व अब बोम्मई को ज्यादा महत्व नहीं देने वाला।    



दूसरी तरफ कर्नाटक में कांग्रेस की इस विशाल जीत के रणनीतिकार चुनाव विशेषज्ञ प्रशांत किशोर की तरह एक तेलगू भाषी व्यक्ति सुनील कोनागुलू हैं। जीत के बाद भी वह नेपथ्य में हैं, जो उनकी शैली है। वह बड़ी-बड़ी बातें नहीं करते, न मीडिया में अपना प्रचार कराते हैं, न ही उनकी तस्वीर कहीं दिखती है। वह आज कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से हैं, जो राहुल गांधी को चुनाव के मामले में सीधे सलाह दे सकते हैं। जब कोनागुलू कांग्रेस से जुड़े थे, तब पार्टी का चुनाव अभियान शुरू हो चुका था, लेकिन वह दिशाहीन था। पार्टी के अलग-अलग धड़े अपने लोगों के लिए अधिक से अधिक टिकट मांग रहे थे। लेकिन राहुल और प्रियंका गांधी के पूरे समर्थन से उन्होंने चुनाव की जिम्मेदारी ली और भाजपा को हटाने के लिए चुनाव विशेषज्ञों की एक टीम गठित की।


स्थिति भांपकर मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कोनागुलू से संपर्क साधा और उन्हें भाजपा में वापस लाने की भरपूर कोशिश की। लेकिन उन्होंने उनका प्रस्ताव खारिज कर दिया और स्पष्ट तौर पर कहा कि वह कांग्रेस की वैचारिकता में यकीन करते हैं। क्या कर्नाटक में कांग्रेस की जीत से 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए बेहतर संभावनाएं बनेंगी? क्या ममता बनर्जी और केसीआर जैसे कांग्रेस-विरोधियों को नीतीश कुमार कांग्रेस के साथ ले आने में सफल होंगे?

अगर आप जातिगत समीकरण की बात करें, तो लिंगायत और वोक्कालिगा वोटरों ने एकमुश्त कांग्रेस को वोट दिया है। भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ठीक तरह से चुनाव प्रचार नहीं कर पाए। नतीजतन लिंगायत वोटर भाजपा से निकल गए। कांग्रेस देवगौड़ा के वोक्कालिगा वोटरों को भी अपने पक्ष में ले आने में सफल रही। ऐसे ही, मुस्लिम वोटर भी जेडीएस से निकल कर कांग्रेस में चले गए। यानी कांग्रेस ने जेडीएस के वोट बैंक पर भी जबर्दस्त चोट की।

कांग्रेस कार्यकर्ता क्या अब प्रियंका गांधी वाड्रा को अध्यक्ष बनाने की मांग करेंगे? वह हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाने में सफल हुईं और अब कर्नाटक में कांग्रेस की जीत में भी उनका योगदान है। राहुल गांधी की तुलना में, जिनकी लोकसभा सदस्यता रद्द हो गई है,  प्रियंका गांधी को लोग ज्यादा सुनना पसंद करेंगे। अचानक हनुमान जी राजनेताओं के इतने प्रिय हो गए कि नतीजे के बाद प्रियंका गांधी को शिमला के जाखू मंदिर में पूजा करते देखा गया।

ध्यान देने की बात है कि कर्नाटक में वर्ष 1989  से ही कोई सत्तारूढ़ पार्टी लगातार दूसरी बार सत्ता में नहीं आ पाई है। इस चुनाव में भी यही हुआ है। हालांकि इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही पार्टियों के नेताओं ने रैलियों और रोड शो का आयोजन किया था, लेकिन जनता ने कांग्रेस को गले लगाया और भाजपा पर भरोसा नहीं किया। हालांकि कर्नाटक में भाजपा की यह हार उसके लिए ठीक ही है, क्योंकि अब वह लोकसभा चुनाव के लिए अच्छी तरह तैयारी कर पाएगी।

कर्नाटक में कांग्रेस की वापसी दक्षिण के राज्यों में सत्तारूढ़ पार्टियों, जैसे तमिलनाडु में द्रमुक, आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस और केरल में माकपा के लिए ठोस संदेश है। दक्षिण की ये राजनीतिक पार्टियां अब गांधी परिवार के प्रति नरमी का परिचय देंगी। दूसरी तरफ इस जीत से उत्साहित कांग्रेस अब के चंद्रशेखर राव की पार्टी भारत राष्ट्र समिति को हराने के लिए तेलंगाना पर अपना ध्यान केंद्रित करेगी। कर्नाटक के नतीजे का तमिलनाडु पर भी असर पड़ने वाला है। वहां भाजपा के सामने अब अन्नाद्रमुक के साथ गठजोड़ करने के अलावा चारा नहीं है। तमिलनाडु में भाजपा के अकेले ही मजबूती के साथ आगे बढ़ने की संभावना पर ग्रहण लग गया है।

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