{"_id":"8589e7d4-63e2-11e2-93f9-d4ae52bc57c2","slug":"congress-marks-on-babys-cheek","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्चे के गाल पर कांग्रेस का निशान","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया ","slug":"opinion"}}
बच्चे के गाल पर कांग्रेस का निशान
आसिम अनमोल
Updated Mon, 21 Jan 2013 09:22 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैंने जैसे ही घर के अंदर एंट्री मारी बेगम मुंह खोले ही बैठी थीं। बोलीं, इन नासपीटे टीचरों को तो इसके सिवाय कुछ आता ही नहीं। कैसा मेरे बच्चे के गाल पर कांग्रेस का निशान बनाया है। बस अल्लाह इनको समझे। मैंने बेगम का तमतमाया हुआ चेहरा देखा, तो उनको शांत करना और बच्चे से उसके ऊपर बीती घटना सुनना मुनासिब समझा।
विज्ञापन
बच्चे का दोष सिर्फ यह था कि उसने होमवर्क नहीं किया था। मैंने सोचा बच्चे का होमवर्क तो कराया भी जा सकता था, फिर बच्चे को पीड़ा पहुंचाने की क्या जरूरत थी। कहीं ऐसा तो नहीं कि मास्टर घर वाली से झगड़कर आया हो और इधर उसकी सैलरी न बढ़ रही हो। शायद इसलिए उसने सारा गुबार बच्चे पर निकाल दिया हो।
विज्ञापन
मैं यह सब सोच ही रहा था कि बेगम फिर मुझ पर बरस पड़ीं और बोलीं, तुम ऐसे ही अपने पीएम की तरह हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना, चाहे बच्चे का रोज कीमा बनता रहे।
तो मैं क्या करूं? असंवेदनशील पाक की तरह मास्टर के ऊपर अटैक कर दूं। फिर तो मामला और पेचीदा हो जाएगा। सफाई देनी पड़ेगी, वह अलग। मैंने बेगम को हालात से अवगत कराया। बेगम ने फिर अपने जज्बातों का इजहार किया, आखिर ये मास्टर होते कौन हैं?
विज्ञापन
शिक्षा के मंदिर में अपनी हिंसात्मक गतिविधियों को अंजाम देने वाले। क्या इन्हें कानून का भी खौफ नहीं? मास्टरगीरी दिखानी है, तो बच्चों का खूबसूरत भविष्य बनाकर दिखाए। यह क्या, आए दिन बच्चों को मारने-पीटने की खबरें सुर्खियां बनती हैं। दो-चार दिन हाय-तौबा मचती है। मां-बाप स्कूलों में जाकर निराशा की लाठी तोड़ते हैं। फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। बेगम ने बच्चों पर होते अन्याय का कच्चा-चिट्ठा खोलने का प्रयास किया।
मैंने कहा, तुम थक गई होगी, लो एक गिलास पानी पी लो। इस पर बेगम और भड़क गईं। सरकार को आड़े हाथों लेते हुए बोलीं, सरकार से तो उम्मीद करना ही बेकार है। यहां तो ऐसा लगता है, जैसे सरकार है ही नहीं। एक अच्छी सरकार की सभी को दरकार है। ऐसी स्थिति में भय और अनुशासन पानी नहीं भरेगा, तो क्या संवेदनशीलता का पाठ पढ़ेगा!
अंतिम बार बेगम को टोकते हुए कहा, अब बस भी करो। बेगम ने कहा, मैं क्यों? बच्चों पर जुल्म करने वाले मास्टर बस करें, और शिक्षा के उस संविधान पर अमल करें, जिसमें सही शिक्षा देने की नीति पर विशेष बल दिया गया है।