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विकास की राह में रोड़े अटकाती कांग्रेस

Fri, 21 Aug 2015 08:23 PM IST
श्रीकांत शर्मा
श्रीकांत शर्मा Updated Fri, 21 Aug 2015 08:23 PM IST
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Congress hurdle in development path

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजग सरकार के उपायों से देश उच्च विकास दर के मार्ग पर अग्रसर हो रहा है। औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि, राजस्व में वृद्धि और महंगाई में रिकॉर्ड गिरावट इस बात के द्योतक हैं। मोदी सरकार ने साल भर में भ्रष्टाचार को काबू कर सुधारों की दिशा में जो कदम उठाए हैं, उनसे अर्थव्यवस्था की सेहत में तेज सुधार हुआ है। दुर्भाग्य से कांग्रेस अपने ‘प्रथम परिवार’ के तुच्छ राजनीतिक हितों के लिए विकास की राह में रोड़ा अटका रही है। उसने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को रोकने के लिए जिस तरह संसद के मानूसन सत्र में बाधा डाली, वह सवा सौ करोड़ देशवासियों के हितों पर कुठराघात है।

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यह सर्वविदित है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार के दस साल के शासन में भ्रष्टाचार और नीतिगत-जड़ता की वजह से महंगाई चरम पर थी, विकास दर लगातार नीचे आ रही थी, निवेश के लिए माहौल प्रतिकूल था और विदेशी निवेश आने के बजाय घरेलू पूंजी देश से बाहर जा रही थी। ऐसे मोड़ पर नरेंद्र मोदी ने बागडोर संभाली। उन्होंने बीते एक साल में जो कदम उठाए हैं, उनके परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था आज उच्च वृद्धि के मार्ग पर फर्राटा भरने को तैयार है।
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अर्थव्यवस्था में सुधार का पहला संकेत औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में हुई वृद्धि है। सांख्यिकीय और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार, विगत जून में आईआईपी में 3.8 प्रतिशत वृद्धि हुई है। मोदी सरकार के महत्वाकांक्षी 'मेक इन इंडिया' अभियान के कारण मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में 4.6 प्रतिशत वृद्धि हुई, जिसका हमारे युवाओं के लिए विशेष महत्व है। राजस्व में भी बढ़ोतरी हो रही है। मौजूदा वित्त वर्ष में अप्रैल से जुलाई तक अप्रत्यक्ष करों में 37 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। केंद्रीय उत्पाद शुल्क में इस अवधि में रिकॉर्ड 75 प्रतिशत वृद्धि हुई, जो औद्योगिक क्षेत्र के शानदार प्रदर्शन को दर्शाती है। इसके अलावा महंगाई में रिकॉर्ड गिरावट आई है। थोक महंगाई दर लगातार कई महीनों से शून्य से नीचे चल रही है, जबकि खुदरा महंगाई दर लगातार घटते हुए विगत जुलाई में 3.78 प्रतिशत पर आ गई। खाद्य महंगाई तो और भी कम होकर मात्र 2.15 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है।
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अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ेगी, तो गरीबों के लिए आय और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इससे समाज में समृद्धि और खुशहाली आएगी। यह समृद्धि स्थायी रहे, इसके लिए लंबित आर्थिक सुधारों को लागू करना जरूरी है। मानसून सत्र में सरकार ने जीएसटी के लिए जरूरी संविधान संशोधन विधेयक, भूमि अधिग्रहण विधेयक और रीयल एस्टेट विधेयकों सहित कई महत्वपूर्ण सुधारों को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया, पर कांग्रेस ने इनकी राह में रोड़े अटका दिए। अनुमान के मुताबिक, यदि जीएसटी एक अप्रैल, 2016 की निर्धारित समय सीमा से लागू नहीं होता, तो लगभग नौ लाख करोड़ रुपये का नुकसान होगा। भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह बहुत बड़ी क्षति होगी।


सोनिया और राहुल गांधी को समझना चाहिए कि संसद में व्यवधान डालकर, जीएसटी और भूमि अधिग्रहण जैसे विधेयकों की राह में रोड़ा अटकाकर वे देश का अहित तो कर ही रहे हैं, वे हमारे गरीब, मजदूर, दलित, पिछड़े और आदिवासियों के हितों का सबसे अधिक नुकसान कर रहे हैं। बेहतर होगा कि आत्मनिरीक्षण करते हुए कांग्रेस देश को आगे बढ़ाने की दिशा में सहयोग करे।

-लेखक भाजपा के राष्ट्रीय सचिव हैं

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