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डिजिटल इंडिया में मची होड़

Tue, 21 Mar 2017 07:23 PM IST
मार्क स्कॉट
मार्क स्कॉट Updated Tue, 21 Mar 2017 07:23 PM IST
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compitition in Digital india
मार्क स्कॉट

भारत तेजी से प्रौद्योगिकी और दूरसंचार क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के रण का मैदान बनता जा रहा है। फेसबुक, वोडाफोन और इसी तरह की अन्य कंपनियों में देश की 1.20 अरब जनता को इंटरनेट से जोड़ने के लिए होड़ मची हुई है। इस लड़ाई ने सोमवार को उस वक्त नया मोड़ ले लिया, जब ब्रिटिश कंपनी वोडाफोन ने एलान किया कि उसकी भारतीय इकाई स्थानीय सेल्यूलर कंपनी आइडिया के साथ करार कर रही है। 23 अरब डॉलर के इस करार के जरिये दोनों कंपनियों का विलय होगा और जो नई कंपनी बनेगी, वह दुनिया की सबसे बड़ी सेलफोन प्रदाता कंपनी बन जाएगी, जिसके पास अकेले भारत में ही 40 करोड़ उपभोक्ता होंगे।

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वास्तव में देश का सेलफोन उद्योग जबर्दस्त बदलाव के दौर से गुजर रहा है, क्योंकि ज्यादा से ज्यादा भारतीय डिजिटल दुनिया से जुड़ते जा रहे हैं। हाल के वर्षों में देश में स्मार्टफोन उपभोक्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। यहां बाजार में 20 डॉलर यानी करीब 1,200 रुपये तक के स्मार्टफोन उपलब्ध हैं। यही वजह है कि भारतीयों में गूगल और फेसबुक जैसी डिजिटल सेवाएं लेने की होड़ मच गई है। उपभोक्तओं की संख्या के आधार पर भारत फेसबुक का सबसे बड़ा बाजार है। वहीं ई-कॉमर्स के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ते फ्लिपकार्ट जैसे स्थानीय स्टॉर्ट अप अमेजान जैसे दिग्गजों से मुकाबला कर रहे हैं।
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मुंबई में टैक्सी चलाने वाले और मूल रूप से नेपाल की सीमा के पास के रहने वाले सिकंदर झा बताते हैं, 'घर पहुंचने पर मेरे बच्चे अपना होमवर्क करने के लिए मेरे फोन से गूगल की मदद लेते हैं। मेरी पत्नी और बच्चे मुंबई में मेरे साथ रहते हैं, और हम अक्सर गांव में अपने भाइयों से वीडियो चैट के जरिये बात करते हैं।' इंटरनेट के उपयोग को लेकर हुए विस्फोट ने सेवा प्रदाता कंपनियों के बीच गलाकाट प्रतिस्पर्धा पैदा कर दी है, जिससे वे एक ऐसे देश में तेज मोबाइल नेटवर्क और सस्ता डाटा पैकेज देने को मजबूर हुए हैं, जहां उपभोक्ता दाम को लेकर खासे संवेदनशील हैं। इस तेजी ने निवेश और सौदों में भी तेजी ला दी है।
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तेल क्षेत्र की भारतीय दिग्गज रिलायंस इंडस्ट्रीज ने हाल ही में अपने नए मोबाइल फोन नेटवर्क जियो के लिए अरबों रुपये निवेश कर मुफ्त में डाटा और वॉयस प्लान की पेशकश की। प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए पिछले महीने ही एयरटेल ने नार्वे की कंपनी टेलीनॉर की भारतीय परिसंपत्तियां खरीद ली। गुड़गांव स्थित प्रौद्योगिकी संबंधी शोध कंपनी गार्टनर के विश्लेषक ऋषि तेजपाल कहते हैं, 'समेकन या एकजुटता भारतीय बाजार में टिके रहने के लिए जरूरी है। दस से बारह स्थानीय ऑपरेटर लंबे समय तक अपना अस्तित्व बचाए नहीं रख सकते।'

वोडाफोन और आइडिया के विलय को लेकर की गई घोषणा के मुताबिक, दोनों कंपनियां भारत में अपने नेटवर्क का विलय करेंगी और देश की सबसे बड़ी मोबाइल नेटवर्क प्रदाता कंपनी बनाएंगी, जिसके पास बाजार का 35 फीसदी हिस्सा होगा। दोनों कंपनियों ने कहा है कि विलय से पूरे भारत में तेज मोबाइल नेटवर्क फैलाने के लिए उन्हें निवेश का मौका मिलेगा। इस नेटवर्क को फोर्थ जेनरेशन यानी 4जी कहा जाता है और इसके जरिये स्मार्टफोन में फिल्म और टीवी कार्यक्रम देखे जा सकते हैं।

चूंकि भारत में अब भी अनेक लोगों के पास साधारण फोन हैं, जिसमें सीमित सुविधाएं उपलब्ध हैं और इसके जरिये नेट से नहीं जुड़ा जा सकता, ऑपरेटर लोगों को 'बजट स्मार्टफोन' (सस्ते स्मार्टफोन) में निवेश करने के लिए लुभा रहे हैं, क्योंकि ऐसे फोन से मोबाइल डाटा का उपयोग किया जा सकता है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की मुफ्त पेशकश पर वोडाफोन के मुख्य कार्यकारी विटोरिओ कोलाओ कहते हैं कि हमने नई कंपनी को प्रभावी तरीके से जवाब दिया है। यदि कोई भी आपको जिंदगी भर कोई चीज मुफ्त दे रहा है, तो उसे निश्चित रूप से आपसे कुछ न कुछ वसूलना पड़ेगा। उम्मीद है कि 2018 के अंत तक वोडाफोन और आइडिया के विलय की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। भारतीय बाजार में हो रहे इस करार ने सिलिकॉन वैली की बड़ी कंपनियों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है।

फेसबुक ने एक स्थानीय सहयोगी के साथ करार कर अपने सोशल नेटवर्क और मैसेजिंद ऐप पर मुफ्त इंटरनेट सर्विस देने की पेशकश की थी, मगर पिछले साल सरकार ने यह कहते हुए इस सौदे पर रोक लगा दी कि फेसबुक की मुफ्त सेवा से देश के नेट न्यूट्रालिटी ( नेट की तटस्थता) के नियमों का उल्लंघन होगा और कुछ निश्चित इंटरनेट डाटा पर रोक लगाने वाले कानून को दूसरी तरह से देखना होगा।

विश्लेषकों का कहना है कि वोडाफोन और आइडिया के विलय का सबसे बड़ा कारण मोबाइल फोन नेटवर्क बाजार में जियो का प्रवेश है। पिछले वर्ष शुरू हुए जियो ने मुफ्त वॉयस और डाटा पैकेज के जरिये 10 करोड़ उपभोक्ताओं को जोड़ लिया। रिलायंस ने पूरे देश में तेज मोबाइल नेटवर्क के निर्माण के लिए कम से कम 25 अरब डॉलर का निवेश किया है, जिससे प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को अपनी दरें घटाने को मजबूर होना पड़ा है। वैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज मार्च के अंत तक अपनी मुफ्त सेवा वापस ले लेगी और उसके बदले वह उपभोक्ताओं को सस्ते मासिक डाटा प्लान के जरिये लुभा रही है।


मोबाइल डाटा बाजार में सस्ती दरों को लेकर मची होड़ ने भारतीयों को तेजी से इंटरनेट से जुड़ने का मौका दिया है। इसके जरिये वे गूगल और उबर जैसी डिजिटल सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं, वरना इससे पहले ये सेवाएं काफी महंगी थीं और लोगों की पहुंच से दूर थीं। दो सिम कार्ड वाला स्मार्टफोन उपयोग करने वाले मुंबई के युवा स्टॉक ट्रेडर वरुण माहतनी ने दिसंबर में जियो के लिए पंजीयन किया था और उनके पास पहले से वोडाफोन का कनेक्शन भी है। वह कहते हैं, यदि जियो ने मुफ्त सेवाओं में कटौती की, तो वे किसी और प्रदाता के पास चले जाएंगे। उनके मुताबिक, उपभोक्ताओं के लिए यह अच्छा समय है।

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