आओ तुम्हें हम स्टिंग सिखाएं

सहीराम Updated Wed, 22 Jan 2014 07:10 PM IST
come and learn that how to sting
आजकल कुछ भी सीखा जा सकता है जी। लोग तो जीने की कला तक सिखा देते हैं। उस्तादों की कमी थोड़े ही है। बस अंटी ढीली करो और कुछ भी सीखो। पर अभी दिल्ली सरकार आपको बुला रही है कि आओ और स्टिंग सीखो। सरकारें सीख तो हमेशा ही देती रही हैं। उनकी यह आदत होती है। और आदतें अक्सर मजबूर कर देती हैं। पर कई बार सीख देते-देते वे सबक भी सिखाने लगती हैं। इसका लोग बुरा मान जाते हैं और उल्टे सरकार को सबक सिखाने पर आ जाते हैं। इधर दिल्ली में सिखा दिया ना।

खैर, पहले सरकारें सीख देती थी कि आराम हराम है। फिर उसने सीख दी-बातें कम और काम ज्यादा। इसे लोगों ने सीख नहीं माना और उल्टे सरकार को ही सबक सिखा दिया। बीच-बीच में सरकारें पानी बचाओ और ऊर्जा बचाओ जैसी शाकाहारी सीखें भी देती थी। पर अब सरकार जनता को आमंत्रित कर रही है कि आओ और हमसे स्टिंग सीखो।

पहले सरकारों को सबक सिखाने के लिए स्टिंग होते थे। अब खुद सरकार ही स्टिंग सिखा रही है, ताकि सरकार के भ्रष्टाचारी अफसरों और कर्मचारियों को सबक सिखाया जा सके। वैसे बताते हैं कि स्टिंग स्वाध्याय जैसी चीज है। उस्ताद जरूरी नहीं। उद्यमी किस्म के लोग पहले खुद स्टिंग सीखते हैं, फिर दूसरों को, खासकर अपने उन विरोधियों को सबक सिखाते हैं, जो उन्हें परेशान करते हैं।

हालांकि जिन नेताओं के स्टिंग ऑपरेशन हुए, उन बेचारों ने उन्हें तो बिल्कुल भी परेशान नहीं किया, जिन्होंने उनका स्टिंग किया था। लेकिन बाद में उन्होंने उन्हें सबक सिखाने की कोशिशें जरूर कीं। बताते हैं कि सरकारें, पार्टियां और व्यक्तिगत स्तर पर नेता लोग स्टिंग जैसी इस चीज से काफी परेशान होते रहे हैं। कुछ पार्टियों ने इसका तोड़ निकालने की भी कोशिश की और उन्होंने अपने नेताओं के कुछ ऐसे प्रशिक्षण शिविर लगाए-स्टिंग से कैसे बचे। हालांकि फिर भी स्टिंग हो रहे हैं। सीडियां तक बन रही हैं।

पर दिल्ली की नई सरकार अपने विधायकों, मंत्रियों से यह नहीं कह रही कि स्टिंग से बचो। वह उन्हें स्टिंग से बचने के तरीके नहीं सिखा रही है, बल्कि वह तो खुद जनता को स्टिंग सिखाने को तैयार है। वह तो खुद उसे आमंत्रित रही है कि आओ और हमसे स्टिंग सीखो। स्टिंग सीखो और स्टिंग करो। स्टिंग ही भ्रष्टाचार मिटाने का एक तरीका है। स्टिंग से ही भ्रष्टाचार पर झाड़ू फेरी जा सकती है।

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